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Corona: महामारी में पीने का साफ पानी बेहद जरूरी
को रोना महामारी के कारण लॉकडाउन के दौरान स्वच्छ पेयजल सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार ने सभी राज्यों को स्वच्छ पीने के पानी की आपूर्ति की सलाह देते हुए विशेष रूप से पानी की आपूर्ति में कमीं हो और मेडिकल सैनिटाइज़र की सुविधा उपलब्ध नहीं होने वाले गांवों के लिए आवश्यक दिशा निर्देश जारी किए हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय ने समाज के कमजोर वर्गों को सर्वोच्च प्राथमिकता दिए जाने की सिफारिश की है, विशेषकर ऐसी जगहों पर लोगों का ध्यान रखने को कहा है, जो राहत शिविर, अस्पताल, वृद्धाश्रम, आश्रय स्थल, समाज के गरीब तबके के निवास स्थान एवं झुग्गी-झोपड़ी आदि में रह रहे हैं। इन स्थानों में पानी की आपूर्ति और सुरक्षित एवं शुद्ध पानी मुहैया कराने के लिए राज्य सरकारों के सार्वजनिक स्वास्थ्य इंजीनियरिंग विभागों / बोर्डों / निगमों को निर्देशित किया गया है। कोविड-19 बीमारी के प्रसार से निपटने के लिए बनाई गई जिलों की सूक्ष्म योजनाओं में पीने योग्य पानी की उपलब्धता को शामिल करने को बेहद जरूरी बताया है। साफ पानी की आपूर्ति के लिए शुद्धिकरण रसायन आवश्यक...
Fanishwar Nath Renu : साहित्यकार सरहद की कैद में कर्मों ?
साहित्यकार सरहद की कैद में क्यों ? के. विक्रम राव फणीश्वरनाथ रेणु की जन्मशती शुरू हुए चार माह (4 मार्च से) बीत गए| एक तिहाई काल तो गुजर गया| कोरोना का बहाना मिल गया| फिर भी हिंदी भूभाग में, खासकर दोआबा में, कोई तेज साहित्यिक स्पंदन अथवा हलचल न दिखी, न सुनाई दी| मानों वे मुगलसराय (अब डीडीयू जंक्शन) के पूरब तक ही बांध दिए गए हों| वहां भी बस अररिया से पूर्णिया तक के साठ किलोमीटर के दायरे में ही| हालाँकि हिंदी-धरा तो काफी व्यापक है| अर्थात, अगर “भारत यायावर” जी, डॉ. रामबचन राय और पूर्व विधायक प्रेमकुमार मणि को छोड़ दें, तो अन्य नाम खोजने पड़ेंगे| सवाल यही कि नदीतट तक ही हिंदी सीमित क्यों ? वह संगम तट से सागर तट तक है| क्योंकि डॉ. धर्मवीर भारती बांद्रा तक पहुंचे थे| भला हुआ कि अपनी संतानों के कारण अमृतलाल नागर चौक तथा भगवती चरण वर्मा “चित्रलेखा” बिल्डिंग (महानगर) तक कैद नहीं रहे| उनका व्यक्तित्व देशव्यापी रहा| फणीश्वरनाथ रेणुजी को साहित्य से हटकर भी आम भारतीय जानता है| विशेषकर हम जेपी के लोग रेणु को तानाशाही से लड़े धनुर्धर के रूप में देख चुके हैं| जो पीढ़ी गुजर गई, उसने ...


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