भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का जन्मदिन मनाया गया।तमाम नेताओं ने उनको शुभकामनाएं दीं। कई नेताओं ने उनकी योग्यता का बखान करके मोदी सरकार के जनविरोधी और आर्थिक रूप से नुकसानदायक निर्णयों की कड़ी निंदा की।
इस्लाम को इतना क्षीण मत जानिये ! के. विक्रम राव दिल नाशाद हो गया। मन मायूस था। नववर्ष का आह्लाद ही तिरोभूत हो गया। भोर में ''टाइम्स आफ इंडिया'' (आज, 1 जनवरी 2022 पर पृष्ठ—15 : कालम एक, नीचे) में मेरठ की संवाददाता ईशिता मिश्र की रपट पढ़ी। उधृत है। रपट हृदयविदारक थी। जिक्र था कि धर्म—केन्द्र देवबन्द के 22—वर्षीय युवा कृषक एहसान से उसके बचपन के मित्र ने सारे नाते तोड़ दिये। मिल्लत से भी हत्या की धमकी मिल रही है। उसे बिरादरी और शायद जिन्दगी से भी कट जाना हो। ''टाइम्स'' संवाददाता ने सहारनपुर के पुलिस मुखिया आकाश तोमर की बात भी लिखी। मगर आफत इतनी बढ़ी है कि उसके लिये एक सशस्त्र सुरक्षा गार्ड भी तैनात कर दिया गया है। उसके चाचा—मामा आदि ने उसका बहिष्कार कर दिया। एहसान घर से निकल नहीं पा रहा है। तो क्या अपराध था इस मुस्लिम युवा का? गत माह (2 दिसम्बर 2021) वह नरेन्द्र मोदी तथा अमित शाह की जनसभा में गया था। वहां भीड़ नारे लगा रही थी। उसी रौ में, जुनून में एहसान भी भीड़ की आवाज से जुड़ गया। सभा में जब मोदी बोले थे : ''भ...
"गांव में मां का आंचल" राजेन्द्र मौर्य गांव में घर का चौबारा, खुला आसमां खिली धूप, हर ओर खुशी, गम का न दूर तक कोई ठिकाना । चेहरों पर हंंसी की लालिमा, देखते ही उछल रहे बच्चे ।। मेहमान आया है, खुशियों का खजाना लाया है। देख मां अपने बेटे को खुशी के आंसू बहाने लगती है। क्या तुझको कभी मां-बाप की याद नहीं आती है।। हम तो दिन में हर क्षण तुझे याद करते हैं। तेरा कैसा दिल, जो मां-बाप को कभी याद नहीं करता है। बेटा बोला, फुर्सत नहीं, बस हर वक्त काम की फिक्र रहती है।। हर रोज सोचता हूं अब रोजाना करूंगा मां-बाप से बात। पूछूंगा उनका हालचाल, लेकिन काम से नहीं होती फुर्सत। सुबह सूरज उगता जरूर घर की छत से देखता हूं।। शाम को घर की छत से सूरज छिपते देखे एक जमाना हो गया। गांव मां-बाप की छांव में यही तमन्ना लेकर आया हूं। जब तक हूं रोज सुबह-शाम घर के चौबारे से देखूंगा सूरज को। मां के हाथ से कच्चे चूल्हे पर बनी रोटी खाऊंगा । चाय पिऊंगा गुड़ क...
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