जिसके लिए अरमां सजाए बगिया में, अब वो फूल ही नहीं रहा इस दुनिया में। किस कंधे पर सिर रखकर रोऊं, नहीं दिखता कोई जिसको अपना दर्द बताऊं। सब कुछ है फिर भी हर ओर वीराना दिखता है। जहां में हर रोज देखे खूब दुख, पर अपने दुख ने पूरा जहां बेगाना बना दिया। -अकेला पक्षी
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