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सीएए : जनता का उत्पीड़न बंद हो
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CAA-NRC-NPR के नाम पर देश की जनता को प्रताड़ित करने और सांप्रदायिकता फैलाने की सरकारी साजिश का विरोध करो। साथियों , एक ऐसे दौर में जब भारत की अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है, GDP घटकर 4.5 से भी नीचे जा रही है, बेरोजगारी की दर बीते 45 साल में सबसे खराब स्थिति में पहुंच रही है ,शिक्षा और इलाज लगातार महंगा होता जा रहा है, सरकारी स्कूलों , अस्पतालों की स्थिति जानबूझकर खस्ता की जा रही है ,भ्रष्टाचार, महंगाई चरम पर है और हिंसा तथा बलात्कार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, तब इन सब बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने नागरिकता का मुद्दा उठाया है और पूरे देश को एक भयानक मानव संकट में डाल दिया है। जिसका विरोध पूरे देश में हो रहा है और सरकार शांतिपूर्वक हो रहे विरोध को साजिशन हिंसक बनाकर बदनाम करने तथा सांप्रदायिकता फैलाने में लगी हुई है। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध क्यों करना चाहिए? 1- दुनिया के किसी भी देश के नागरिक को भारत की नागरिकता देने की व्यवस्था भारत के नागरिकता कानून में पहले से ही थी। लेकिन धार्मिक आधार पर भेदभाव करने की मंशा से इस कानून में बदलाव किय...
वीडियो : मोदी के नाम पर ट्रेन में देखो क्या बेच रहा ?
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यूपी: पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चिकित्सक को धमकाया
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दिल्ली : दुनिया को सोशल मीडिया ने बनाया ग्लोबल विलेज
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नोआखाली, बांग्लादेश से एक युवा रंगकर्मी फिरदौसी आलम व उनकी आठ वर्षीय बेटी मिचिल तक़वा उदीची आज लगभग 25 दिन हमारे परिवार के साथ बिता कर स्वदेश लौट गए। हम अभी उन्हें विदा कर घर लौटे ही हैं। इस दौरान वे दोनों हम से इतना घुल-मिलकर पारिवारिक माहौल में रहे कि अब उनका जाना अखर रहा है ।फिरदौसी की अब से पहले हमारी कोई मुलाकात व परिचय नहीं था। पर सोशल मीडिया ने इस पूरी दुनिया को इतना छोटा कर दिया है कि अब यह एक ग्लोबल विलेज सा लगता है । यह ही सूत्र बना हमारे परिचय का। पर इसे संदर्भ दिया ढाका में रह रहे मेरे मित्र प्रिंस ने, जो अपने देश की कम्युनिस्ट पार्टी का एक अग्रणी नेता है तथा वह और मैं 1980 में लगभग छह माह तक एक साथ ताशकंद-मास्को (तत्कालीन सोवियत संघ) में एक साथ रहे थे। वैसे तो प्रिंस से भी 1980 के बाद कोई संपर्क नहीं था, परन्तु गत वर्ष हमारी बांग्लादेश यात्रा के दौरान लगभग 38 वर्षों बाद मुलाकात हमारी बहन तंद्रा बरुआ व उनके पति नब कुमार राहा के प्रयासों से हुई थी। फिरदौसी, नोआखाली में एक सांस्कृतिक ग्रुप उदीची (ध्रुव तारा) के साथ जुड़ी हैं। बांग्लादेश के छोटे पर्दे पर अक्सर वह...