इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स के राष्ट्रीय अधिवेशन और नेपाल टूर में शामिल अपने सभी साथियों का स्वागत करता हूं। इस अधिवेशन में मुझे भी शामिल होना था, लेकिन पैर में चोट लगे होने के कारण नहीं पहुंच पा रहा हूं। आदरणीय श्री के. विक्रम राव और श्री परमानंद पांडेय जी का आपको मार्गदर्शन मिलेगा, जो आपके कैरियर के लिए लाभकारी होगा। मेरी ओर से टूर की सफलता के लिए शुभकामनाएं स्वीकार करें।
गांव में मां का आंचल
"गांव में मां का आंचल" राजेन्द्र मौर्य गांव में घर का चौबारा, खुला आसमां खिली धूप, हर ओर खुशी, गम का न दूर तक कोई ठिकाना । चेहरों पर हंंसी की लालिमा, देखते ही उछल रहे बच्चे ।। मेहमान आया है, खुशियों का खजाना लाया है। देख मां अपने बेटे को खुशी के आंसू बहाने लगती है। क्या तुझको कभी मां-बाप की याद नहीं आती है।। हम तो दिन में हर क्षण तुझे याद करते हैं। तेरा कैसा दिल, जो मां-बाप को कभी याद नहीं करता है। बेटा बोला, फुर्सत नहीं, बस हर वक्त काम की फिक्र रहती है।। हर रोज सोचता हूं अब रोजाना करूंगा मां-बाप से बात। पूछूंगा उनका हालचाल, लेकिन काम से नहीं होती फुर्सत। सुबह सूरज उगता जरूर घर की छत से देखता हूं।। शाम को घर की छत से सूरज छिपते देखे एक जमाना हो गया। गांव मां-बाप की छांव में यही तमन्ना लेकर आया हूं। जब तक हूं रोज सुबह-शाम घर के चौबारे से देखूंगा सूरज को। मां के हाथ से कच्चे चूल्हे पर बनी रोटी खाऊंगा । चाय पिऊंगा गुड़ क...
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