तो राहुल गांधी ही होंगे पहली पसंद !
पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पूर्व मेरे दफ्तर में खबरिया चैनल के प्रमुख एंकर पूण्य प्रसून वाजपेयी आए थे। वह अपने चैनल के लिए लोगों से सीधे बातचीत के कार्यक्रम के लिए भ्रमण पर थे। मैंने उनसे पूछा कि उत्तर प्रदेश में किस की सरकार आ रही है, उनका तपाक से जवाब था कि इस बार भी मायावती की सरकार बनने जा रही है, जबकि मैं उनकी बात से इत्तेफाक नहीं करता था। मेरा मानना था कि इस बार मायावती सरकार नहीं बना पाएंगी और सपा के पक्ष में अधिक समर्थन जाता दिख रहा है। चुनाव परिणाम ने वाजपेयी जी को गलत साबित ‌किया।  
इस समय कुछ चैनलों पर नील्सन के सर्वे को अपने से जोड़कर एक राजनीतिक सर्वे दिखाया जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री के लिए देश के 49 फीसदी की पहली पसंद नरेंद्र मोदी को बताया जा रहा है। यह ही नहीं देश में एनडीए को भरपूर समर्थन के जरिए उसकी सरकार आती दिख रही है। ये सर्वे ‌कितने विश्वसनीय हैं, यह इसी बात से स्पष्ट होता है कि हर चुनाव में ये सर्वे झूठे साबित हो रहे हैं। कुछ हजार लोगों से बातचीत के आधार पर देश का फैसला सुनाना केवल उनका व्यावसा‌यिक हित साधने की रणनीति है, जिसे अब आम जनता भी समझने लगी है।
नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद के लिए प्रतिष्ठापित किया जाना खबरिया चैनलों की व्यावसायिक हित पूरे करने की रणनीति है। मोदी कितने लोकप्रिय और पसंदीदा नेता हैं, यह इस बात से साबित हो चुका है कि जब उनको देश के प्रधानमंत्री का दावेदार प्रोजेक्ट किया गया और इसके लिए माहौल बनाया गया, तब भी वह गुजरात में पिछले चुनाव से एक सीट कम प्राप्त कर पाए हैं। इसके अलावा मत प्रतिशत भी घटा है। इसके विपरित जिस कांग्रेस को लोगों की नजर में बराबर गिरने की बात की जा रही है। उस कांग्रेस ने तमाम विपरित परिस्थिति होने के बावजूद गत चुनाव के मुकाबले एक सीट भी बढ़ाई है और वोट फीसदी भी बढ़ाया है। 
मेरा मानना है कि यदि आगामी लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार रहे तो राहुल गांधी ही प्रधानमंत्री के रूप में जनता की पहली पसंद बनेंगे। 
देश का जनमानस किसी भी समुदाय के कट्टरपंथी को कतई पसंद नहीं करता है। यह बात समय-समय पर स्पष्ट हो चुकी है।     

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