मुंबई से मोइन का सवाल 


मेरी मुंबई में रेलवे स्टेशन से अपने मित्र के घर जाते  वक्त टैक्सी चालक मोइन से मुलाकात हुई, जिसकी पीड़ा सुनकर काफी दुखी हूं। उसका कहना था कि उसके दादा उत्तर प्रदेश के जिला प्रतापगढ़ से काम की तलाश में मुंबई आए थे। वह और उसके पिता की पैदाइश भी मुंबई की है, लेकिन उनको आज भी मुंबई का वासी नहीं माना जाता है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इस सवाल का जवाब देते हुए मोइन भावुक होकर बोला-राजनीति। मोइन का कहना था कि हम तो यहां काम करने के लिए आए हैं, लेकिन अपनी राजनीति के लिए पहले बाला साहेब ठाकरे और अब राज ठाकरे उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को महाराष्ट्र का दुश्मन और यहाँ की तरक्की का बाधक मानता है और इस विचार को आम मराठी के मन का विचार बनाने के लिए ही उनका पूरा  प्रयास रहता है। लोगों को उम्मीद थी कि उनके अपने प्रदेशों के नेता बनने पर उनको भी नई ताकत मिलेगी, लेकिन जो उनके नेता बने हैं वे भी राजनीतिक लाभ के लिए हमारे बाहरी प्रदेश वासी बने रहने को फायदे का सौदा  मानते हैं । यह केवल एक मोइन का सवाल नहीं है, बल्कि मुंबई में दुसरे राज्यों से काम की तलाश में गए हर व्यक्ति का है जो डर-डरकर  जी रहा है।
ऐसे में धर्मनिर्पेक्षता का ढोल पीटने वाले नेताओं को चाहिए कि वे मोइन की पीड़ा को समझें।   

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