सूर्योदय होता है जहॉ को चमकाने के लिए, सूर्यास्त होता है सुबह और नई उम्मीद के लिए। बस शरीर अस्त हुआ है, ये तो नामवर है चमकता रहेगा सूर्य की मानिंद।। -राजेन्द्र मौर्य
दाण्डी मार्च की सालगिरह जब ब्रिटिश को नमक मिर्चेदार लगा था !! *के. विक्रम राव* ठीक पचास वर्ष हुये आज से, (12 मार्च 2021)। मेरे पत्रकारी व्रत (अब वृत्ति) का प्रथम दशक था। अहमदाबाद के आश्रम रोड (नवरंगपुरा) पर हमारा दफ्तर (टाइम्स आफ इंडिया) रहा, अभी भी है। साबरमती नदी तट पीछे और गांधी आश्रम दूसरी छोरपर पड़ता है। गुजरात में मेरी पहली खास ऐतिहासिक रिपोर्टिंग का वह मौका था। बापू की दाण्डी मार्च। (12 मार्च 1930)की चालीसवीं जयंती थी। ब्रिटिश फिल्म निर्माता रिचर्ड एटेनबरो ने अपनी कृति ''गांधी'' ने इस सत्याग्रह की घटना का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। यह फिल्म 1982 में प्रदर्शित हुयी थी। तभी बस चन्द माह पूर्व (1968) मुंबई मुख्यालय से नये संस्करण हेतु मेरा तबादला अहमदाबाद कार्यालय किया गया था। मेरा भाग्य था कि वह गांधी शताब्दी वर्ष था। पत्रकारिता का नया दशक शुरु करने का मुझे अवसर मिला था। ठीक दो वर्ष पूर्व (फरवरी 1928) चालीस किलोमीटर दूर बारडोली में वल्लभभाई पटेल का किसान सत्याग्रह विपुल सफलता लिये ख्...
Comments
Post a Comment