Congress Leader Rahul Gandhi Said on Tweet That I’m shocked to hear about the demise of Sushma Swaraj Ji, an extraordinary political leader, a gifted orator & an exceptional Parliamentarian, with friendships across party lines.
बस थोड़े दिन का रगड़ा है... -अनिल मौर्य- एक तरफ सारा जहां, कोरोना से जकड़ा है। दूसरी तरफ अमेरिका-चीन में, खामियों का झगड़ा है ।। तबाही के मंजर पर खड़ी है, दुनिया ये सारी । हमें तो इस बीमारी की, मुक्ति की आश ने पकड़ा है ।। देखकर मंजर ये खुदा, बहा रहा आंसू बार-बार। भूलकर गुनाहों को अपने तू, अमादा होकर बेशर्मी में जकड़ा है ।। रहम की खुद पर बांधे उम्मीद, ग़ैरो की हिफाजत का भी रख ख्याल। क्यूँ बार-बार की नसीहतों में तू, अपनी खुदाई में अकड़ा है। बन जा हमदर्द इक दूसरें का, संकट के इस दौर में। भूला दे खामियां अब सबकी, फिर काहें का झगड़ा है।। इज़हारे बयां कर, बन जा ग़ैरो की खुशी अब। गुम होकर घरों में बसर कर जिंदगी, बस थोड़े दिन का रगड़ा है।। हौंसला रख-हौंसलो की बात कर, मुहब्बत का चमन भी खिलेगा। दुआओं का दौर है अब जमानें में, खुदा हमारा भी तगड़ा है।। पूछकर दर्द किसी का, हमदर्दी जताता है तू बहुत । दिल से दिल की बात कर, फिर काहें का दुखड़ा है ।। यूँ वाहवाही लूटकर तू ना कर वक्त बर्बाद, तेरी दुआओं का असर हम भी देखेगें आज, रमजाने शरीफ़ में। कुबुल ...
नेहरू जी के न होने के मायने पं डित जवाहर लाल नेहरू विश्व इतिहास के उन विलक्षण व्यक्तियों में से एक है जिनकी सोच तथा विचार ने अपनी समय के सभी घटना चक्रों तथा पहलुओं को जहां एक और प्रभावित किया है वहीं दूसरी ओर अपने विचार प्रकट करने का भी मौका दिया है ।पंडित नेहरू की प्रासंगिकता पर यदि विचार करें तो निश्चित रूप से वे आज भी उतने ही प्रासंगिक है जितनी अपने समय में। उनके विचार किन्हीं जड़वादी सिद्धांतों अथवा बेतहाशा क्रांतिकारीता पर न होकर विज्ञान सम्मत यथार्थ पर आधारित थे। यदि किसी रूप में उन पर किसी वाद का ठप्पा लगाए जाने का प्रयास किया जाए तो उनकी सर्वागीणता को एक तंग नजरिए से देखना होगा। इसलिए तमाम प्रगतिशील विचारधाराएं तथा वाद उन्हें अपना जामा पहनाने के प्रयास करते हैं। परंतु नेहरू को वे अपने जामे से बाहर पाते हैं ।वे मार्क्सवादी नहीं थे ,परंतु मार्क्सवाद से प्रभावित जरूर थे ।गांधी जी के अनन्य प्रिय शिष्यों में एक होते हुए भी वे बापू की हर बात से सहमत हो, ऐसी बात न थी। तब भी महात्मा गांधी जी ने ...
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