बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र का दिल्ली में निधन हो गया। उनके निधन पर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत तमाम नेताओं ने गहरा शोक जताया है।
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मजमा फिर हिट.... आइए भाइयों-बहनों, आपका जाना-पहचाना मदारी अपने जमूरे के साथ आ गया। मजमा मेरा पसंद आए तो बजाना ताली, नहीं आए पसंद तो देना गाली। पर बात पते की बताता हूं, मजमा मेरा ऐसा, नामुमकिन को कर दे मुमकिन। बोलो कैसे! सुनो भाई एेसे, कपड़े से बना ये सांप का पुतला नेवले को चबा जाएगा। और तो और मेरे जमूरे के कहते ही, हर तमाशबीन की जेब नोटों से भर जाएगी। बताना जमूरे, वो सामने खड़ा तमाशबीन गंजा क्यों है? बता दूँ उस्ताद, यह हमारे मजमे से दूर था। अब इसके सिर पर बाल उगेंगे, और वो बोड़ा भाई पीछे खड़ा, उसके नए मोती जैसे चमकते दांत निकलेंगे। वो कैसे जमूरे बताओ सबको, उस्ताद आप हैं तो नामुमकिन भी मुमकिन है। अब बताओ, मजमे में कौन अपनी खाली जेब नोट से भरना चाहता है। गंजे सिर पर बाल उगाना चाहता है, दांत मोती जैसे चमकाना चाहता है। ...
दाण्डी मार्च की सालगिरह जब ब्रिटिश को नमक मिर्चेदार लगा था !! *के. विक्रम राव* ठीक पचास वर्ष हुये आज से, (12 मार्च 2021)। मेरे पत्रकारी व्रत (अब वृत्ति) का प्रथम दशक था। अहमदाबाद के आश्रम रोड (नवरंगपुरा) पर हमारा दफ्तर (टाइम्स आफ इंडिया) रहा, अभी भी है। साबरमती नदी तट पीछे और गांधी आश्रम दूसरी छोरपर पड़ता है। गुजरात में मेरी पहली खास ऐतिहासिक रिपोर्टिंग का वह मौका था। बापू की दाण्डी मार्च। (12 मार्च 1930)की चालीसवीं जयंती थी। ब्रिटिश फिल्म निर्माता रिचर्ड एटेनबरो ने अपनी कृति ''गांधी'' ने इस सत्याग्रह की घटना का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। यह फिल्म 1982 में प्रदर्शित हुयी थी। तभी बस चन्द माह पूर्व (1968) मुंबई मुख्यालय से नये संस्करण हेतु मेरा तबादला अहमदाबाद कार्यालय किया गया था। मेरा भाग्य था कि वह गांधी शताब्दी वर्ष था। पत्रकारिता का नया दशक शुरु करने का मुझे अवसर मिला था। ठीक दो वर्ष पूर्व (फरवरी 1928) चालीस किलोमीटर दूर बारडोली में वल्लभभाई पटेल का किसान सत्याग्रह विपुल सफलता लिये ख्...
मुसलमान इनके डराने से डरेंगे नहीं : नसीरूदीन शाह जाने-माने फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा है कि जो मुसलमानों के जनसंहार के लिए कह रहे हैं, वे गृह युद्ध कराना चाहते हैं. जब जब देश में चुनाव की आहट होती है तो देखा जा रहा है कि पिछले तीन दशक से कुछ लोग देश के सांप्रदायिक सद्भाव को खंडित करने पर आमादा हो जाते हैं। अगले कुछ माह में देश के पांच प्रदेशों में विधानसभा चुनाव होने की तैयारी की जा रही है। जहां विभिन्न राजनीतिक दल मैदान में अपनी तैयारी में जुटे हैं, वहीं देश के धार्मिक उन्मादी प्रवृत्ति के कुछ तथाकथित संत अपने भड़काऊ भाषण से माहौल को खराब करने पर तुले हैं। इन दिनों धर्म संसद में एक तथाकथित (कोई भी धार्मिक संत की तो वाणी ऐसी हो ही नहीं सकती है) संत कालीदास का भाषण चर्चा में है, जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी को गाली और उनकी हत्या के लिए नाथूराम गोडसे की तारीफ की। हरिद्वार की धर्म संसद पहले ही बवाल मचाए है। दोनों ही धर्म सांसदों की वीडियो वायरल हो रहीं है, जिनका विरोध भी जमकर हो रहा है। इस पर एक संत ने धर्म संसद का बहिष्कार भी किया। मीडिया में उक्त पर ही फिल्म अ...
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