महात्मा गांधी के सत्याग्रह वाले चंपारण को अपनी पहचान दिलाने में जुटे केबीसी करोड़पति सुशील कुमार चंपा चंपारण और चमत्कार मो तिहारी पूर्वी चंपारण (बिहार) में इन दिनों शेयर योर ह्यूमैनिटी की संस्थापिका मोनी बिजय आई हुई हैं। उन्होंने बताया कि केबीसी विजेता सुशील कुमार ने बिहार के चंपारण जिले में न सिर्फ चंपा का फूल लगाकर लोगों को चमत्कृत किया है, बल्कि अपने सादगी अंदाज और सरल स्वभाव से मानव जीवन में सरल रहने का उत्तम संदेश दिया हैं। मोनी बिजय ने अपने निवास स्थान,चंपारण मोतिहारी में अपनी भारत यात्रा की इस अवधि में भी अपने मानवता मंत्र के उद्देश्य को फैलाने का कार्य किया है। उन्होंने अपने निवास स्थान पर गौरैया घोंसला और चंपा का फूल लगाया तथा शेयर योर ह्यूमैनिटी की तरफ से दो अक्टूबर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी के जन्मदिवस के शुभ अवसर पर प्रकृति संरक्षण की महिमा सबमें विस्तृत करने के लिए सुशील कुमार के कर कमलों द्वारा 25 घोंसले गौरैया के लिए तथा 115 चम्पा के फूलों को लगाने का कार्य कराया। इसके लिए सुशील कुमार को अनुदान देकर उनसे आग्रह कि...
बलात्कार पर इमरान खान इस्लामी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री खान मोहम्मद इमरान खान ने गत सप्ताह राय व्यक्त की कि महिलाओं के हल्के परिधान से बलात्कारी प्रवृत्ति को बल मिलता है। सेक्स करने के लोभ को संवरण करने की इच्छा-शक्ति क्षीण हो जाती है। दिल्ली को ‘‘रेप कैपिटल‘‘ करार देकर, पाकिस्तानी वजीरे आजम ने पर्दा की वापसी को आवश्यक बताया। इस्लाम में इसीलिये बुर्का का नियम मुफीद बताया गया है। फिर पाकिस्तान तो दारूल इस्लाम है। भारत जैसा दारूल-हर्ब (शत्रु भूमि) तो है नहीं। अपने पूर्व पति की उक्त राय पर टिप्पणी करते इमरान खां की पहली (अंग्रेज) बीबी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने खेद जताया कि इमरान अब तालिबानी होते जा रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पहले इमरान की तय मान्यता थी कि बजाये बुर्के के पुरुष की आखों पर पर्दा डाल देना चाहिये। अर्थात् पाकिस्तान में बुर्का लौटने वाला है। भारत के सेक्युलरिस्टों का इस पर क्या कहना है? इस इस्लामी रिवायत का विरोध का अर्थ है मुस्लिम वोट कट जायेंगे। कांग्रेसियों और सोशलिस्टों को खासकर हिचक होगी? सोशलिस्टो...
मायावती का दलित विरोधी ढोल बसपा की अध्यक्ष मायावती जी जब भी मीडिया से बात करती हैं, उनकी शुरूआत में दलित विरोधी ढोल पीटना एक आदत बन गई है। उन्होंने कहा कि मान्यवर कांशीराम के प्रेरणा स्थल के बंगले और उनके भाई तथा उनकी संपत्ति को लेकर जारी खबर पूरी तरह दलित विरोधी मानसिकता का प्रमाण है। कुछ हद तक उनका यह आरोप सच हो सकता है, लेकिन क्या उनको यह नहीं बताना चाहिए कि सत्ता में आने से पहले तक साधारण परिवार कैसे अरबोपति बन गया है? उनके और उनके परिजनों के नाम यह अकूत संपत्ति कहां से आ गई है? अब वह कांग्रेस को कोस रही हैं, तो फिर पिछले 9 वर्षों से कांग्रेस की सरकार को समर्थन देने का काम क्यों कर रही हैं? या फिर भोले-भाले दलितों को गुमराह करने के लिए ही उनको डॉ. अंबेडकर या फिर अब मान्यवर कांशीराम की याद आती है। वह 2007 में उत्तर प्रदेश के सभी वर्गों के सहयोग से पूर्ण बहुमत की मुख्यमंत्री बनी तो उनको लगा कि अब वह देश की प्रधानमंत्री बन जाएंगी, जिसके लिए उन्होंने और उनके कुछ खास चहेतों ने 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान खूब मुंगेरी लाल ...
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