मुबाहिसा : राजेन्द्र मौर्य रात को सबकुछ अच्छे की उम्मीद लेकर लोग सोते हैं, लेकिन इन दिनों देखा जा रहा है कि दिन निकलते ही कोई न कोई हतप्रभ कर देने वाली खबर मिलती है, जिसे देश की भोली-भाली जनता सरकार या पुलिस की बहादुरी का कारनामा मानकर खुशी मनाने लगती है। जनता तो जनता कुछ टीवी पर मुखड़ा दिखाने के लिए बेताब विभिन्न वर्गों के स्वयंभू प्रतिनिधि भी आधारहीन बहस का हिस्सा बन जाते हैं, जिसमें लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून की खूब धज्जियां उड़ाई जाती हैं। आज सुबह उठा तो मेरे एक मित्र राजकिशोर बादली ने बताया कि एक कवयित्री ने वाट्सएप संदेश दिया है कि हैदराबाद कांड के चारों आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराया है। यकीन नहीं हुआ तो तुरंत अपने समाचार तंत्र से पुष्टि की।...
असाधारण प्रतिभा के धनी दुनिया के महानतम विद्वान, युगप्रवर्तक बाबा साहेब का जन्म 14 अप्रेल 1891 को एक दलित परिवार में हुआ था। उस समय भारत में दलितों के साथ भारी भेदभाव, छुआछूत घृणा और असमानता का व्यवहार होता था तथा उन्हें जानवर से भी ज़्यादा बदतर समझा जाता था। बाबा साहेब ने इस तिरस्कार, असमानता और दुर्व्यवहार को जीवन पर्यन्त झेला। दलित समाज की भारी दुर्गति व नारकीय जीवन देख उन्हें असीम पीड़ा हुई। इस तरह दलितोत्थान उनके जीवन का मुख्य संकल्प बना। उनकी सोच थी कि एक समग्र शिक्षित भारतीय समाज ही अखंड और मज़बूत भारत का निर्माण कर सकता है। डॉक्टर भीमराव अंबेडकर में गज़ब का अदम्य साहस और अदभुत विद्वता थी। बाबा साहेब की अदभुत योग्यता एवं तार्किक शक्ति को ध्यान में रखकर कांग्रेस के उच्चस्तरीय नेताओं ने विशेष रूप से महात्मा गाँधी, जवाहर लाल नेहरू एवं डॉक्टर राजेन्द्र प्रसाद ने उनको संविधान सभा का प्रतिनिधित्व करने हेतू महाराष्ट्र से चुने गए प्रतिनिधि श्री जयकर से इस्तीफा दिलवाकर डॉक्टर अंबेडकर को कांग्रेस के समर्थन से संविधान सभा का प्रतिनिधि बनाया और संविधान प्रारूप कमेटी का उनको चेयरमैन भी ...
भारत में हर साल 14 अप्रैल को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती बड़ी धूमधाम से मनती है। शहरों, गांवों में शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। इस बार कोरोना के चलते भारत भी पूरी दुनिया के साथ लॉकडाउन है। सड़कों पर कोई नहीं दिख रहा है तो देश में डॉ. अंबेडकर जयंती घरों में मनाई जा रही है। अंबेडकर अनुयाइयों के घरों में दिवाली जैसा उत्सव मनाया जा रहा है। बाबा साहेब के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। घरों में रोशनी की गई है और आतिशबाजी छोड़ी जा रही है। देशभर मिल रही जानकारी के मुताबिक घरों में मन रही जयंती कार्यक्रमों की कुछ झलकियां। ...
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