किसान आंदोलन खत्म, 11 दिसंबर को विजय यात्रा के साथ लौटेंगे अपने घर केंद्र सरकार के नए प्रस्ताव पर संयुक्त किसान मोर्चा ने ने फैसला लेते हुए आंदोलन को स्थगित कर दिया है।आंदोलन स्थगित करने का फैसला लिए जाने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए किसान नेता योगेंद्र यादव ने शहीद किसानों को याद किया। साथ ही उन्होंने सीडीएस बिपिन रावत और उनके साथ मृतक जवानों को भी याद किया। 13 दिसंबर को जाएंगे स्वर्ण मंदिर संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि किसान आंदोलन को स्थगित किया जा रहा है। 11 दिसंबर से किसानों की घर वापसी होगी। 13 दिसंबर को स्वर्ण मंदिर जाएंगे। किसान नेताओं ने कहा कि संयुक्त किसान मोर्चा बरकरार रहेगा। हर महीने 15 तारीख को बैठक होगी। किसानों के मुद्दे पर आंदोलन जारी रहेगा। मीडिया के चुनाव में उतरने के सवाल पर स्पष्ट रूप से कहा गया कि मोर्चा चुनाव नहीं लड़ेगा. साथ ही मीडिया और सोशल मीडिया के साथियों को भी किसान नेताओं ने धन्यवाद दिया. धरना स्थल को खाली करने के लिए पैकिंग शुरू कर दी गई : टिकैत किसानों का एक वर्ष से चल रहा आंदोलन स्थगित करने के फैसले के बाद भ...
तुलसी : पुण्यकारक है, सेहत हेतु मुफीद भी ! के. विक्रम राव @Kvikramrao हाल ही में लखनऊ के एक साहित्यिक आयोजन में शरीक हुआ था। अनूठी प्रतीति हुई। मनभावन लगी। साझा करने की इच्छा जगी। कारण था कि इस बौद्धिक समारोह में वक्ताओं के अभिनंदन पर न तो महकते फूलों का कोई हार मिला। न कोई रंगीन गुलदस्ता, न ऊनी शाल, ना रेशमी उत्तरीय। बस पाया तो सादर प्रणाम तथा प्लास्टिक गमले में रोपित श्याम हरी तुलसी का पौधा। नायाब भेंट है। आप्त अनुष्ठान लगा। सभाओं इस रस्म का प्रयोग असरदार था, मौसम पर विशेषकर। बंजर पर रोक, प्राणवायु को बाधित न होने देना। इससे आंगन की शोभा ज्यादा बढ़ेगी ही। कुछ लोग जो ज्यादा जानते हैं, वे बताते हैं कि विष्णुवल्लभ और कृष्णप्रिया होने के कारण लक्ष्मी और राधा की तुलसी सौतन है। यह भ्रामक है, क्योंकि नाम अनेक हैं पर व्यष्टि तो एक अकेली है। विपर्यक नहीं है। आज निर्माण योजनाओं से जंगल फैल रहे हैं। उर्वरता घटती और बंजरता बढ़ती जा रही है। अत: तुलसी की आवश्यकता और उपयोगिता अधिक हो गई है। इसे स्वास्थ्य से ज...
इंदिरा हारीं थीं शेरे गढ़वाल से !! के. विक्रम राव हे मवती नन्दन बहुगुणा का जीता हुआ गढ़वाल संसदीय उपचुनाव आज ही के दिन (21 जून 1981) पलट दिया गया था। ठीक चार दशक हुए। हालांकि उसी दौर में अमेठी से राजीव गांधी निर्वाचित घोषित हो गये थे। दोनों उपचुनावों में इन्दिरा गांधी का असर दिखा था। उनके सत्ता में लौटे साल भर ही हुआ था। उत्तर प्रदेश (तब अविभाजित था) के इन दोनों मतदानों पर दुनिया की नजर टिकी थी। हवाई दुर्घटना में संजय गांधी की मौत से अमेठी की सीट रिक्त हो गयी थी। सरकारी एयरलाइन्स के पाइलट पद को छोड़ कर राजीव गांधी एक दिन पूर्व ही कांग्रेस में भर्ती हो गये थे। प्रत्याशी बन गये थे। हालांकि इन्दिरा गांधी के लिये ये दोनों चुनाव जीतना अत्यावश्यक था। अपने वंश के नये उत्तराधिकारी को नामित करना था। अपने घोर शत्रु को गढ़वाल में परास्त करना था। बहुगुणाजी कांग्रेस से बाहर हो गये थे। उनका प्रतिद्वंदी थे चन्दमोहन सिंह नेगी। दोनों ''भांजों'' (राजीव और संजय) ने बहुगुणाजी को पार्टी में लाकर प्रधान सचिव नियुक्त कराया था, तो अपमानित भी उतनी ही शीघ्...
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