खगड़िया (बिहार) जिला स्थित केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के पैतृक गांव शहरबन्नी के निकट कमला बागमती नदी के फुलतोड़ा घाट पर उनके छोटे भाई स्व. रामचंद्र पासवान के अस्थि विसर्जन के दौरान, अपने लोकप्रिय नेता को अंतिम विदाई देने के लिए लोगों का जनसैलाब उमड़ पड़ा और रामचंद्र पासवान अमर रहें के नारों से आसमान गूंज उठा। पटना शोक सभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत मंत्री विभिन्न दलों के नेताओं ने श्रद्धांजलि अर्पित की।
Chirag Vs Paras : पासवान के चहेते अब पारस के खेमे में, चिराग मिले स्पीकर से
पासवान के चहेते अब पारस के चहेते बने, चिराग मिले स्पीकर बिड़ला से दिवंगत दलित नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के चहेतों को अपनी ओर खींचने के लिए पशुपति पारस ने अपनी कार्यकारिणी की पहली सूची में खूब जगह दी है। उनका यह प्रयास भी चिराग पासवान को मैदान में अकेले छोड़ देने का है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि चिराग पासवान पूरी तरह से खालिक और एपी बाजपेई पर निर्भर हो चुके हैं, जबकि रामविलास पासवान किसी पर निर्भर नहीं थे। वह देशभर में अपने समर्थक कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े थे और सभी को यथा योग्य संगठन में सम्मान देकर साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। यह खालिक के पार्टी में बढ़े वर्चस्व का ही परिणाम है कि पासवान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले तमाम पार्टी के छोटे बड़े कार्यकर्ता पदाधिकारी पारस की ओर खींचे जा रहे हैं। आज पारस की जारी सूची से तो यही लगता है कि रामविलास पासवान के खास रहे लोगों को उन्होंने अपनी ओर खींचने के लिए कार्यकारिणी में खूब तरजीह दी है। लोजपा पारस गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पशुपति कुमार पारस ने पार्टी की सभी इकाइयों को भंग कर दिया। ...











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