मुबाहिसा : राजेन्द्र मौर्य रात को सबकुछ अच्छे की उम्मीद लेकर लोग सोते हैं, लेकिन इन दिनों देखा जा रहा है कि दिन निकलते ही कोई न कोई हतप्रभ कर देने वाली खबर मिलती है, जिसे देश की भोली-भाली जनता सरकार या पुलिस की बहादुरी का कारनामा मानकर खुशी मनाने लगती है। जनता तो जनता कुछ टीवी पर मुखड़ा दिखाने के लिए बेताब विभिन्न वर्गों के स्वयंभू प्रतिनिधि भी आधारहीन बहस का हिस्सा बन जाते हैं, जिसमें लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून की खूब धज्जियां उड़ाई जाती हैं। आज सुबह उठा तो मेरे एक मित्र राजकिशोर बादली ने बताया कि एक कवयित्री ने वाट्सएप संदेश दिया है कि हैदराबाद कांड के चारों आरोपियों को मुठभेड़ में मार गिराया है। यकीन नहीं हुआ तो तुरंत अपने समाचार तंत्र से पुष्टि की।...
भारत में हर साल 14 अप्रैल को भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती बड़ी धूमधाम से मनती है। शहरों, गांवों में शोभायात्राएं निकाली जाती हैं। इस बार कोरोना के चलते भारत भी पूरी दुनिया के साथ लॉकडाउन है। सड़कों पर कोई नहीं दिख रहा है तो देश में डॉ. अंबेडकर जयंती घरों में मनाई जा रही है। अंबेडकर अनुयाइयों के घरों में दिवाली जैसा उत्सव मनाया जा रहा है। बाबा साहेब के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। घरों में रोशनी की गई है और आतिशबाजी छोड़ी जा रही है। देशभर मिल रही जानकारी के मुताबिक घरों में मन रही जयंती कार्यक्रमों की कुछ झलकियां। ...
'तुम अगर चाहते हो मुल्क की खैर न किसी हम वतन को समझो गैर हो मुसलमान उसमे या हिन्दू बौद्ध मजहब हो या के हो ब्रह्मू जाफ़री होवे या के हो हनाफ़ी जैन मत होवे या के होवे वैष्णवी सब को मीठी निगाह से देखो समझो आँखों की पुतलियाँ सबको ' 'हाली पानीपती '
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