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दिल्ली : सवाल मेरे हिंदू होने का नहीं, राष्ट्रीय एकता का है

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 एक मित्र ने मुझ से कहा कि नागरिकता संशोधन एक्ट, आपको तो किसी तरह से प्रभावित नहीं करता, तो फिर आप क्यों इसका विरोध कर रहा हैं ? उनका यह भी कथन था कि हम हिन्दुओं को तो खुश होना चाहिए कि एक ऐसा कानून बना है, जो पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा अफ़ग़ानिस्तान में अपमान व पीड़ा की अवस्था में रह रहे हमारे सहधर्मी भाई-बहनों को भारत में शरण देने तथा नागरिकता देने का न्यायिक रास्ता साफ करता है ? उनका यह भी कहना रहा कि यह कानून तो पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष है, क्योंकि यह पीड़ित ईसाई, बौद्ध, पारसी, सिखों तथा जैनों को भारत आने का रास्ता खोलता है। भारत ही तो ऐसा देश है जो इनकी पितृ भूमि है, इसके अलावा वे जाएंगे कहाँ ? यह सभी ऐसे  मासूम प्रश्न हैं, जो किसी को भी आंदोलित करते हैं। अभी हमारे शहर में इस कानून के पक्ष में एक रैली आयोजित हुई। उसके अनेक नारों में से कुछ चुनिंदा नारे यह भी थे "बिछड़ों को वापिस लाना है एक नया राष्ट्र बनाना है। "सीएए के समर्थन में राष्ट्रवादी मैदान में"।   इस बारे में कतई दो राय नहीं कि सन् 1947 में भारत की आज़ादी  के समय भारत एक तरफ एक लोकतांत्रिक व धर्मनिरपेक्ष ...

USA : Obama said happy birthday baby!

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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपनी पत्नी मिशेल ओबामा को इन फोटो के साथ बोला "In every scene you are my star, @MichelleObama !  Happy birthday, baby!"                  

अमन चाहिए, जंग नहीं

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                     ब्रेख्त के जरिए दर्पण  का पैगाम  के. विक्रम राव आ ज बगदाद से बालाकोट तक, बरास्ते तेहरान, युद्ध का जुनून दुनिया को ग्रस रहा है| अतः जर्मन नाटककार बर्तोल्ट ब्रेख्त की  याद आना सहज है, नीक भी| सैकड़ों अमरीकी बम बर्लिन को नहीं बदल सके, मगर ब्रेख्त कि एक रचना “मदर करेज एण्ड हर चिल्ड्रेन” (1941) ने यही कर दिखाया था| आज जर्मनी सबसे जबरदस्त युद्ध-विरोधी राष्ट्र है| कारण वाजिब भी है| बौराए हिटलर की खब्त से तबाही वही भुगता था| मटियामेट हो गया था| दर्पण  की पेशकश में इसी का चित्रण चाक्षुष दृश्य के अनुरूप है (रूपक ‘हे ब्रेख्त’ , 11-12 जनवरी 2020, वाल्मीकि रंगमच, संगीत नाटक अकादमी, लखनऊ)| जानेमाने व्यंग्यकार और नाट्यशास्त्री डॉ. उर्मिल कुमार थपलियाल की कल्पनाशीलता की यह नायाब कृति है| प्रस्तोता अनिल रस्तोगी की कला का नैपुण्य नेपथ्य से झांकता है| इस (उर्मिल-अनिल) युग्म ने दर्शकों को अंत तक समेटे रखा| आगोश में बांधे रखा| ब्रेख्त की उक्तियों, संदेशों, घटनाओं और तात्पर्यों को समेटकर यह...

वीडियो : देसी मनोरंजन

New Zealand : volcanic eruption (Video)

This is the volcanic eruption at New Zealand caught on camera by CNN. This is an infinitesimal sample of hell visiting earth. God is awesome and also terrible.       

अब शुगर और बीपी रोगियों को मिलेगी जीवन भर मुफ्त दवा

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हा ई ब्लड प्रेशर, शुगर आदि कुछ ऐसी बीमारियां हैं, जो एक बार लग गई तो ताउम्र दवाई खानी पड़ती है। यह बीमारियां आनुवांशिक तो हो सकती हैं लेकिन एक दूसरे के छूने या साथ खाने पीने से नहीं फैलती हैं। बावजूद इसके इनका दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसमें कई तरह का कैंसर भी शामिल हैं। यदि आप भी इससे पीड़ित हैं तो चिंता मत कीजिये, क्योंकि यह दवाइयां अब आपको अपने घर के निकट ही मिलने वाली हैं, वह भी निशुल्क और जिंदगीभर के लिए। इसके लिए स्वास्थ्य एवं चिकित्सा विभाग ने 16 जनवरी से इन रोगों से पीड़ित मरीजों को चिह्नित करने के लिए अभियान शुरू किया है। टीम ऐसे रोगियों के नामों की सूची तैयार करेगी, इसके बाद आपको जिंदगी भर फ्री दवाई मिलती रहेगी।

दिल्ली : इन बच्चों का गलत इस्तेमाल करने वालों को क्या कहेंगे? (वीडियो)

सीएए : जनता का उत्पीड़न बंद हो

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CAA-NRC-NPR के नाम पर देश की जनता को प्रताड़ित करने और सांप्रदायिकता फैलाने की सरकारी साजिश का विरोध करो।  साथियों , एक ऐसे दौर में जब भारत की अर्थव्यवस्था चौपट हो चुकी है, GDP घटकर 4.5 से भी नीचे जा रही है, बेरोजगारी की दर बीते 45 साल में सबसे खराब स्थिति में पहुंच रही है ,शिक्षा और इलाज लगातार महंगा होता जा रहा है, सरकारी स्कूलों , अस्पतालों की स्थिति जानबूझकर खस्ता की जा रही है ,भ्रष्टाचार, महंगाई चरम पर है और हिंसा तथा बलात्कार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, तब इन सब बुनियादी मुद्दों से जनता का ध्यान भटकाने के लिए सरकार ने नागरिकता का मुद्दा उठाया है और पूरे देश को एक भयानक मानव संकट में डाल दिया है। जिसका विरोध पूरे देश में हो रहा है और सरकार शांतिपूर्वक हो रहे विरोध को साजिशन हिंसक बनाकर बदनाम करने तथा सांप्रदायिकता फैलाने में लगी हुई है। नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध क्यों करना चाहिए? 1- दुनिया के किसी भी देश के नागरिक को भारत की नागरिकता देने की व्यवस्था भारत के नागरिकता कानून में पहले से ही थी। लेकिन धार्मिक आधार पर भेदभाव करने की मंशा से इस कानून में बदलाव किय...

वीडियो : मोदी के नाम पर ट्रेन में देखो क्या बेच रहा ?

मां-बाप: अनमोल वचन

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यूपी: पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चिकित्सक को धमकाया

दिल्ली : दुनिया को सोशल मीडिया ने बनाया ग्लोबल विलेज

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नोआखाली, बांग्लादेश से एक युवा रंगकर्मी फिरदौसी आलम व उनकी आठ वर्षीय बेटी मिचिल तक़वा उदीची आज लगभग 25 दिन हमारे परिवार के साथ बिता कर स्वदेश लौट गए। हम अभी उन्हें विदा कर घर लौटे ही हैं। इस दौरान वे दोनों हम से इतना घुल-मिलकर पारिवारिक माहौल में रहे कि अब उनका जाना अखर रहा है ।फिरदौसी की अब से पहले हमारी कोई मुलाकात व परिचय नहीं था। पर सोशल मीडिया ने इस पूरी दुनिया को इतना छोटा कर दिया है कि अब यह एक ग्लोबल विलेज सा लगता है । यह ही सूत्र बना हमारे परिचय का। पर इसे संदर्भ दिया ढाका में रह रहे मेरे मित्र प्रिंस ने, जो अपने देश की कम्युनिस्ट पार्टी का एक अग्रणी नेता है तथा वह और मैं 1980 में लगभग छह माह तक एक साथ ताशकंद-मास्को (तत्कालीन सोवियत संघ) में एक साथ रहे थे। वैसे तो प्रिंस से भी 1980 के बाद कोई संपर्क नहीं था, परन्तु गत वर्ष हमारी बांग्लादेश यात्रा के दौरान लगभग 38 वर्षों बाद मुलाकात हमारी बहन तंद्रा बरुआ व उनके पति नब कुमार राहा के प्रयासों से हुई थी।   फिरदौसी, नोआखाली में एक सांस्कृतिक ग्रुप उदीची (ध्रुव तारा)  के साथ जुड़ी हैं। बांग्लादेश के छोटे पर्दे पर अक्सर वह...

वीडियो : शास्त्रों को शस्त्र मत बनाइए (शास्त्रार्थ)

अमेरिकाः मजबूत लोकतंत्र की पहचान (अच्छा लेख)