कैसे मानें अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार नागरिक ?
जनता को मतदान के लिए जागरूक करने के लिए अभियान चला रहे टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल खुद मतदान नहीं कर पाए, ऊपर से तुर्रा यह कि मतदाता परिचय पत्र उनके पास है, लेकिन सूची में नाम नहीं है तो वे क्या कर सकते हैं?, जबकि निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची का पुनरीक्षण होने के बाद अनंतिम प्रकाशन और उसके बाद भी लोगों को अपने नाम अंकित कराने और ठीक कराने का मौका मिलता है। ऐसे में अरविंद केजरीवाल जी अपनी जिम्मेदारी से भी बच नहीं सकते।
यह भी सभी जानते हैं कि केजरीवाल  पहले ही ऐलान कर चुके थे कि गोवा जाने के कारण मतदान नहीं करेंगे, लेकिन आज पूरी तरह चाट बनाकर खबर बेचने का धंधा करने वाले खबरिया चैनलों ने जब उनको सुबह घेर लिया तो वह मतदान के लिए मजबूरन चले गए, जहां उनको पता चला कि सूची में उनका नाम ही नहीं है। जिस मतदाता फोटो पहचान पत्र को उन्होंने दिखाया, उसपर उनका नाम अरविंद लिखा है, जो नाम ही अधूरा है, ऐसे में उनको अपना नाम भी ठीक कराने के लिए आवेदन करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने एक जिम्मेदार और जागरूक नागरिक होने का परिचय नहीं दिया। यूं भी कह सकते हैं कि समय-समय पर राइट टू रिजक्ट और राइट टू रिकाल की बात करने वाले इन टीम अन्ना के स्वयंभू जनता के रखवालों की लोकतंत्र में आस्था ही नहीं है। 
हम मानते हैं कि केजरीवाल के पास मतदाता परिचय पत्र होने के बावजूद सूची में उनका नाम नहीं होने को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, और मुझे खुशी है कि उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने इसकी जांच के आदेश भी दे दिए हैं।
 टीम अन्ना द्वारा सार्वजनिक जीवन में शुचिता की जो बड़ी-बड़ी बातें की जाती है, उनका अपने जीवन में शायद पालन नहीं किया जाता है, तब ही तो लोकतंत्र में एक जिम्मेदार नागरिक के कर्तव्य मताधिकार के प्रयोग को उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया।  यही कारण है कि केजरीवाल ने यह जानने की कोशिश ही नहीं की कि मतदाता सूची में उनका नाम है या नहीं। साबित हो गया है टीम अन्ना के सदस्य जो बातें करते हैं, उसे वे खुद पर लागू नहीं करते। टीम अन्ना के सभी सदस्यों ‌‌विशेष रूप से अरविंद केजरीवाल को यह बताना चाहिए कि उनका लोकतंत्र में विश्वास है या नहीं और यदि वह लोकतंत्र में विश्वास करते हैं तो किस तरह का लोकतंत्र चाहते हैं।


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