पूर्व सांसद मुनकाद अली को बसपा सुप्रीमो मायावती ने यूपी बसपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। यह एलान होते ही मुनकाद अली को बधाई देने वालों का तांता लग गया है।
मुसलमान इनके डराने से डरेंगे नहीं : नसीरूदीन शाह जाने-माने फिल्म अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने कहा है कि जो मुसलमानों के जनसंहार के लिए कह रहे हैं, वे गृह युद्ध कराना चाहते हैं. जब जब देश में चुनाव की आहट होती है तो देखा जा रहा है कि पिछले तीन दशक से कुछ लोग देश के सांप्रदायिक सद्भाव को खंडित करने पर आमादा हो जाते हैं। अगले कुछ माह में देश के पांच प्रदेशों में विधानसभा चुनाव होने की तैयारी की जा रही है। जहां विभिन्न राजनीतिक दल मैदान में अपनी तैयारी में जुटे हैं, वहीं देश के धार्मिक उन्मादी प्रवृत्ति के कुछ तथाकथित संत अपने भड़काऊ भाषण से माहौल को खराब करने पर तुले हैं। इन दिनों धर्म संसद में एक तथाकथित (कोई भी धार्मिक संत की तो वाणी ऐसी हो ही नहीं सकती है) संत कालीदास का भाषण चर्चा में है, जिसमें उन्होंने महात्मा गांधी को गाली और उनकी हत्या के लिए नाथूराम गोडसे की तारीफ की। हरिद्वार की धर्म संसद पहले ही बवाल मचाए है। दोनों ही धर्म सांसदों की वीडियो वायरल हो रहीं है, जिनका विरोध भी जमकर हो रहा है। इस पर एक संत ने धर्म संसद का बहिष्कार भी किया। मीडिया में उक्त पर ही फिल्म अ...
चिराग को अब गैर बिहारी घोषित करने की कोशिश मुबहिसा : आर.के. मौर्य दिवंगत दलित नेता रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को कब्जाने के बाद उनके छोटे भाई पशुपति पारस अब उनकी दूसरी पत्नी श्रीमती रीना पासवान और उनके बेटे चिराग पासवान को गैर बिहारी घोषित करके उनका बिहार और पासवान परिवार से कोई आत्मिक लगाव न होने की बात फैलाने की कोशिश में लग गए हैं। इस मुहिम में रामविलास पासवान की पहली पत्नी श्रीमती राजकुमारी पासवान और उनकी दोनों बेटियों उषा और आशा व दामादों, बहनों समेत उन सभी रिश्तेदारों को भी जोड़ना शुरू कर दिया है, जो किन्हीं न किन्हीं कारणों से पासवान की दूसरी पत्नी श्रीमती रीना पासवान और उनकी दोनों संतान चिराग पासवान व बिटिया लवली से चिढ़ते हैं। इनकी मंशा अब चिराग और उनकी मां रीना पासवान को पूरी तरह गैर बिहारी बताकर बिहार से बेदखल करने की है। पासवान के रहते कभी उनके भाई या अन्य परिजन रीना पासवान और उनके बेटे चिराग व बेटी के प्रति नफरत होते हुए भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाए, लेकिन अब...
चीन-अमेरिका शीत युद्ध व उसके वैश्विक सरोकार ची न एवं अमेरिका के बीच शीतयुद्ध तथा उनके संबंधों का तीसरी दुनिया पर असर, विषय पर नित्यनूतन वार्ता के 362वें सत्र में चर्चा में मुख्यवक्ता प्रसिद्ध कवि एवं नवभारत टाइम्स के संपादक चंद्र भूषण रहे। श्रोताओं में वार्ता की दिलचस्पी व सक्रिय भागीदारी का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि समय सीमा डेढ़ घंटे निश्चित होने के बावजूद यह सवा दो घंटे तक चली और इसमें प्रश्नों की झड़ी लगी रही। चंद्र भूषण जी, विषय के न केवल मर्मज्ञ विद्वान हैं, वहीं उन्होंने हर दृष्टि से उसका समग्र मूल्यांकन भी किया। मुख्य वक्ता बेशक किसी खास राजनीतिक विचारधारा के पक्षधर हों, परंतु अपने व्याख्यान में अपने विषय का हर पक्ष रखा, जो हर प्रकार के पूर्वाग्रहों से मुक्त था। चीन की राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक स्थिति को उन्होंने विकासशील बताया परंतु उनकी यह बात भी प्रासंगिक रही कि अमेरिका आज अनेक जातीय नस्लों, रंग व क्षेत्रों का एक सामूहिक समूह है और यह ही उसे संयुक्त राष्ट्र बनाता है जबकि अन्य देश अपने राष्ट्रवादी पहचान से मुक्त नहीं हो पाए। चं...
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