Shashi Throor Tweeted Pt. Jawaharlal Nehru & Indira Gandhi in the US in 1954. Look at the hugely enthusiastic spontaneous turnout of the American public, without any special PR campaign, NRI crowd management or hyped-up media publicity.
आज मैं हरियाणा के करनाल में समाज साक्षी समाचार पत्र के तीन वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में शामिल हुआ l जिसमें मैंने मुख्य वक्ता के रूप में पत्रकारिता के सामने चुनौती विषय पर विचार रखे l
मुक्त तिब्बत ही भारत का ध्येय हो! के. विक्रम राव तिब्बत के पुनीत बौद्धआस्था केन्द्र जोरबांग मठ के मुख्य उपासक लामा ल्हाकपा ने विदेशी संवाददाताओं की एक टीम से ल्हासा में वार्ता (15 जून 2021) के दौरान बताया कि ''धर्म गुरु दलाई लामा अब मान्य धर्मगुरु नहीं रहे।'' इस पर अमेरिकी संवाद समिति एसोसियेटेड प्रेस (एपी) के संवाददाता ने पूछा : '' तो फिर कौन गुरु तिब्बत में मान्य है?'' वह मठाधीश बोला, ''शी जिनपिंग।'' अर्थात कम्युनिस्ट चीन के जीवन—पर्यन्त नामित राष्ट्रपति जो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सवा नौ करोड़ सदस्यों (भाजपा से कम) के अधिनायक हैं। गत दिनों में पश्चिम संवाद समितियों के प्रतिनिधियों के एक दल को तिब्बत का ''विकास'' दर्शाने ल्हासा ले जाया गया था। चीन की सरकार का मकसद साफ है कि बुद्ध के इस पवित्रतम केन्द्र में अनीश्वरवाद अब पनपायें। यूं चीन ऐलान भी कर चुका है कि 15वें दलाई लामा को कम्युनिस्ट चीन ही नामित करेगा, चयन की पारम्परिक विधि खत्म होगी। इन संवाददाताओं के रपट से स्पष्ट हो गया है कि भिन्न नस्ल की जनत...
असहमति की सीमा, प्रतिरोध के प्रकार के. विक्रम राव पूर्वी दिल्ली के दंगों (फरवरी 2020) वाले मुकदमें के अभियुक्तों पर उच्चतम न्यायालय का कल (18 जून 2021) का आदेश कहीं अधिक निर्णयात्मक हो सकता था। अभियुक्तों की जमानत निरस्त तथा हाईकोर्ट के आदेश को ही रद्द किया जा सकता था। ये आरोपी जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के तीन दंगाई छात्र हैं जिनकी मंशा और मकसद पर गौर होना चाहिये था। दंगा का समय था जब अमेरिकी राष्ट्रपति राजकीय यात्रा पर दिल्ली आये थे। दुनियाभर के संवाददाता उपस्थित थे। अर्थात स्थानीय खबर पूरे भूलोक में प्रसारित होती और हुयी भी। भारत की छवि खराब करने की सुविचारित षड़यंत्र था। इन दंगों में 53 नागरिक मार डाले गये थे। करीब 700 घायल हुये थे। दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिद्वय सिद्धार्थ मृदुल और अनूप जे. भंभानी ने अभियुक्तों की साधारण जमानतवाली याचिका पर विस्तृत 100 पृष्ठवाला फैसला लिखा। इसे उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्तिद्वय हेमंत गुप्ता तथा बी. रामसुब्रहमण्यम ने अचंभाभरा तथा बहुत लम्बा बताया। उन्होंने कहा कि इस आदेश ...
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