जम्मू एंड कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। माना जा रहा है कि मलिक जम्मू कश्मीर के राज्यपाल पद से हटाकर गोवा के उप उपराज्यपाल बनाए जाने से खुश नहीं हैं। एेसे में मोदी से उनकी यह मुलाकात काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
आज मैं हरियाणा के करनाल में समाज साक्षी समाचार पत्र के तीन वर्ष पूरे होने पर आयोजित समारोह में शामिल हुआ l जिसमें मैंने मुख्य वक्ता के रूप में पत्रकारिता के सामने चुनौती विषय पर विचार रखे l
अथ श्री साहित्य भूषण पुरस्कार प्राप्ति कथा "रूखी -सूखी खाय ले ठंडा पानी पी, देख पराई चूपड़ी मत ललचा यूँ जी " एक लिक्खाड़ कवि को एक दिन किसी मित्र ने पुस्तक के लिए उत्तर प्रदेश संस्थान की विज्ञप्ति भेज दी। पढ़कर उसकी बांछे खिल गई ।वह तो साहित्य भूषण के लिए भी अप्लाई कर सकता है।उसने आस पास नजर दौड़ाई कोई परिचित ऐसा नहीं था जिसे सहित्य भूषण मिला हो ।प्रकाशक ने रही सही हिम्मत यह कहकर तोड़ दी कि पुरस्कार यूँ ही नहीं मिलते इनके लिए केवल लिक्खाड़ होना ही नहीं ऊपर जुगाड़ होना भी जरूरी है। उसने एक पुरस्कार पा चुके व्यक्ति से बात की थी उसने बताया था कि उसने अपने रिश्तेदार को दिलवाया था ।उसने यह भी बताया था कि वह तो मुख्यमंत्री के साथ बैठकर खाना खाता है। नेट पर उसका लिटरेचर ढूंढा तो उसे केवल सड़क छाप अश्लील साहित्य नुमा एक सूखी पत्नी की देह से अरुचि और एक मोटी भद्दी स्त्री के प्रति आकर्षण की वासना भरी कहानी मिली ।उसने छी थू ये साहित्य है कहा मगर प्रत्यक्ष में तारीफ की ।बाकी भी लिखा होगा उसे मिला नहीं। वह चाह रहा था वह उसकी संस्तुति कर...
मुक्त तिब्बत ही भारत का ध्येय हो! के. विक्रम राव तिब्बत के पुनीत बौद्धआस्था केन्द्र जोरबांग मठ के मुख्य उपासक लामा ल्हाकपा ने विदेशी संवाददाताओं की एक टीम से ल्हासा में वार्ता (15 जून 2021) के दौरान बताया कि ''धर्म गुरु दलाई लामा अब मान्य धर्मगुरु नहीं रहे।'' इस पर अमेरिकी संवाद समिति एसोसियेटेड प्रेस (एपी) के संवाददाता ने पूछा : '' तो फिर कौन गुरु तिब्बत में मान्य है?'' वह मठाधीश बोला, ''शी जिनपिंग।'' अर्थात कम्युनिस्ट चीन के जीवन—पर्यन्त नामित राष्ट्रपति जो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सवा नौ करोड़ सदस्यों (भाजपा से कम) के अधिनायक हैं। गत दिनों में पश्चिम संवाद समितियों के प्रतिनिधियों के एक दल को तिब्बत का ''विकास'' दर्शाने ल्हासा ले जाया गया था। चीन की सरकार का मकसद साफ है कि बुद्ध के इस पवित्रतम केन्द्र में अनीश्वरवाद अब पनपायें। यूं चीन ऐलान भी कर चुका है कि 15वें दलाई लामा को कम्युनिस्ट चीन ही नामित करेगा, चयन की पारम्परिक विधि खत्म होगी। इन संवाददाताओं के रपट से स्पष्ट हो गया है कि भिन्न नस्ल की जनत...
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