दिल्ली : आगाज ए दोस्ती का कैलेंडर जारी

युवाओं के "आग़ाज़ ए दोस्ती" ग्रुप द्वारा दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में  भारत-पाक शांति कलेंडर जारी करने के कार्यक्रम में उपस्थित जन की दोनों देशों में बेहतर मैत्री पूर्ण सम्बन्ध होने की न केवल कामना थी वही उस उपायों तथा गतिविधियों की भी झलक थी जिनके जरिये जनता के स्तर पर एक मुहिम तैयार की जा सकती है । स्मरण रहे इस ग्रुप द्वारा ऐसे किसी कलेंडर का *आठवां प्रकाशन* था जिसमे भारत और पाकिस्तान के विभिन्न स्कूलों में पढ़ रहे 8 से 14 साल के बच्चों की छह-2 चित्रकारी थी जिसे अपनी निरवैर भावनाओं को उनके कोमल नन्हे हाथों ने कागज़ पर रंगों से भरा था ।इस कैलेंडर पर ही दोनों देशों के लब्धप्रतिष्ठ 12 लोगों की भी शुभकामनाएं अंकित थी जिन्हें हम आमजन की आकांक्षा के रूप में देखते है ।कार्यक्रम में सुशोभना बर्वे, एयर चीफ मार्शल  कपिल काक, प्रसिद्ध गांधीवादी राधा भट्ट , फादर जोसेफ  कलाथिल,और प्रसिद्ध मुखर मानवाधिकार कार्यकर्ता व मनीषी स्वामी अग्निवेश के ओजस्वी व प्रेरणादायी वक्तव्यों ने आयोजन को सार्थक बना दिया था *जिनका मानना था कि दोनों देशों में खिंची अप्राकृतिक सीमा रेखाए धरती को बांट सकती है परन्तु दिलों को हरगिज़ नही बांट सकती* । *आधुनिक विज्ञान के साधनों ने लोगों को जोड़ने का काम किया है* । सरकारी सम्बन्ध बेशक शिथिल हो पर सोशल मीडिया व नेट के सम्बन्ध आज प्रबल सम्पर्क साधन है । *भारत के विद्यार्थियों के पक्ष में लाहौर सहित पाकिस्तान के अनेक नगरों में छात्रों के प्रदर्शन ने बताया है कि हाली, स0 भगतसिंह और फ़ैज़ दोनों की संघर्ष के प्रेरक है*।
*गुरु नानक देव जी महाराज की 550 जयन्तिवर्ष में करतारपुर व डेरा नानक कॉरिडोर का खुलना इस बात का सूचक है कि सरबत का भला सन्देश देने वाले ऐसे महापुरुष ही लोगो के दिलो के फाटक भी खोलेंगे* ।
   कार्यक्रम में हर वर्ग व समूह के  लोगों की  हॉल में खचाखच भरी उपस्थिति अपने समर्थन को इस मुहिम को दे रही थी ।
*निराशा की इस अंधेरे में यह समारोह आशा की एक रुपहली किरण थी* ।
  *स्व0 निर्मला देशपांडे अक्सर कहती थी कि किसी एक देश की जय का अब समय गया ,अब समय है जय जगत का। उनके नारे होते *गोली नही बोली चाहिए* , *युद्ध नही बुद्ध चाहिए* *जंग नही अमन चाहिए*। और इन्ही भावों को की राह पर एक कदम चलना ही तो है *आग़ाज़ ए दोस्ती* ।
     युवाओं की इस मुहिम को सलाम ।
साभार : राम मोहन राय, दिल्ली।

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