DALAI LAMA : भारत ने दुनिया को ज्ञान विज्ञान और आध्यात्म का सन्देश

भारत ने दुनिया को दिया ज्ञान विज्ञान और आध्यात्म का सन्देश : दलाई लामा


तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु परम पावन दलाई लामा जी द्वारा आज विभिन्न लॉ  विश्वविद्यालयों एवं कानूनी संस्थाओं के 17 प्रज्ञावान  
जिज्ञासओं को आज के विश्व की समस्याओं के उत्तर विषय पर संबोधित करते हुए कहा  कि भारत एक ऐसा देश है कि जिसने पूरे विश्व को ज्ञान- विज्ञान और आध्यात्म का संदेश दिया। भगवान बुद्ध ने लगभग 2500 वर्ष पूर्व बोधित्व की प्राप्ति के पश्चात स्पष्ट रूप से कहा कि उनके मत को कोई भी आस्था के आधार पर स्वीकार न करें, अपितु तर्क  के आधार पर उसकी जांच और प्रयोग करें, तभी उसे माने। हमारे देश में दो तरह के वैश्विक विचार रहे हैं। एक नालंदा और दूसरा संस्कृत विचार। नालंदा पक्ष के अनेक आचार्यों ने बुद्ध धर्म की समालोचना एवं समीक्षा की और वहीं के आचार्य नागार्जुन ने भगवान बुद्ध के शिष्य होने के बावजूद भी उनके ही कई विचारों को तर्क के आधार पर नकार दिया। पाली एवं अन्य भाषा के ग्रंथों का संस्कृत में अनुवाद करके 300 से भी अधिक संकलन तैयार किए गए। जिससे यह साबित होता है कि ज्ञान की प्राप्ति के लिए हर संभव प्रयास करने चाहिए।   
         महात्मा गांधी ने अहिंसा के सिद्धांत को न केवल स्वीकार किया,अपितु उसे व्यवहार में भी लाए और उसी सिद्धांत पर दक्षिण अफ्रीका के नेल्सन मंडेला और अमेरिका के मार्टिन लूथर किंग जूनियर ने अपने जीवन में स्वीकार कर अपने संघर्ष में विजय प्राप्त की।  
         पश्चिम जगत में आधुनिकता तो है, परंतु आध्यात्मिकता के नाम पर मात्र प्रार्थना है। परंतु भारत में पुरातन एवं आधुनिकता के मिश्रण के साथ-साथ भावनाएं भी प्रमुख है। भारत में अनेक भाषाएं हैं और यह देश प्रमुखत: उत्तर और दक्षिण भारत के नाम से बंटा है। कर्नाटक में प्रवेश करते ही आपको सभी  अहिंदी भाषी लोग मिलेंगे।इसके बावजूद भी इन सबका धर्म एक है और धर्म की बुनियाद है- अहिंसा, करुणा और ध्यान। हिंदू, इस्लाम एवम ईसाई धर्म जहां सृष्टि की उत्पत्ति का कारक ईश्वर को मानता है, वही जैन और बुद्ध इसे नकारते हैं।
       विश्व के सभी धर्मों में सबसे बड़ी खूबी यह भी है कि यद्यपि उनके भाव एवं संदेश अलग-अलग धर्मों के माने जाते हैं, परंतु उनके ऐसे भाव एवं उद्देश्य सार्वभौम है अर्थात धर्मनिरपेक्ष है। धर्मनिरपेक्षता हमारे जीवन के जीने का ढंग है और यह ढंग ही हमें आंतरिक सुख और आनंद की प्राप्ति करवाता है। 
       यूरोप में दो विश्व युद्ध लड़े गए। जिसमें लाखों लोग मारे गए। परंतु इसके बावजूद भी उन्होंने इस बात को समझा कि अहिंसात्मक ढंग से बातचीत ही सभी समस्याओं का हल है। सभी धर्मों का एक ही संदेश है कि सृष्टि में व्याप्त आत्मा निश्चल, अमर एवं  सार्वभौम है। हमारी मान्यताएँ एवं आस्थाएं व्यक्तिगत है। परंतु इसका धर्मनिरपेक्ष भाव इसे वैश्विक बनाता है। आत्मिक शांति मात्र करुणा, अहिंसा, तर्क और विपासना (ध्यान) के द्वारा ही प्राप्त की जा सकती है। हम ध्यान के द्वारा करुणा एवं अहिंसा को तो प्राप्त करते हैं, परंतु क्रोध एवं भय रहित नहीं हो सकते। 
           प्रसिद्ध वैज्ञानिक राजा रमन ने आज से अनेक वर्षों पूर्व कहा था कि यद्यपि पश्चिम जगत के पास विज्ञान की आधुनिक पद्धति है, परंतु वे अपूर्ण है यदि उनका भारत की पुरातन  पद्धति के साथ तालमेल न हो। क्षमाशीलता एवं असहिष्णुता हमारे गुण हैं। जो मात्र धर्म निरपेक्ष आध्यात्मिक भावों से ही प्रकट हो सकते हैं।
        पानीपत के श्री राम मोहन राय एडवोकेट उन 17 विशिष्ट लोगों में से एक रहे, जिन्होंने इस मंगलमय बुद्ध विचारों का श्रवण किया।
       वेबिनार में अपनी बात रखते हुए गांधी ग्लोबल फैमिली के महासचिव एडवोकेट श्री राम मोहन राय ने कहा कि नफरत और दुश्मनी के माहौल में महात्मा गांधी, संत विनोबा भावे तथा निर्मला देशपांडे जी के विचारों  के माध्यम से ही दुनिया को एक रखा जा सकता है। हमें यह ध्यान रखना होगा कि 21वीं शताब्दी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की शताब्दी है अर्थात सत्य अहिंसा और करुणा के विचार ही भारत को एक स्वस्थ और विकसित राष्ट्र बनाने की तरफ अग्रसर करेंगे।

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