Book review : फॉर्मूला 44 की लघु कथाएं

  •  " विविध विषयों को समेटे हुए बहुरंगी पुष्प गुच्छ है फार्मूला 44  की लघु कथाएं ।"




    डाक्टर पुष्पलता अधिवक्ता हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक सुपरिचित नाम हैं।वे एक प्रसिद्ध साहित्यकार हैं और अनेक  सरकारी- गैर सरकारी उच्च स्तरीय सम्मानों से सम्मानित हो चुकी हैं। उनका लेखन साहित्य की अनेक विधाओं में है। उनके लेखन में निरंतरता है और इस कारण उनकी एक पत्रकार जैसी खोजी दृष्टि समाज में घटित सभी प्रकार की घटनाओं को अपने लेखन का विषय बना लेती है। उनकी अब तक लगभग 21 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें अनेक गीत संग्रह,तीन खण्ड काव्य, उपन्यास,बालगीत,बाल उपन्यास , सूफी टप्पे ,कहानी संग्रह 

व  लघु कहानियों का संग्रह हैं।

इस वर्ष उनकी नव प्रकाशित लघु कहानियों का संग्रह  " फार्मूला -44 "मेरे हाथ में है। सर्व प्रथम कहानी संग्रह का शीर्षक ही पाठक को आकर्षित करता है पढ़ने के लिए।इस संग्रह में 41 कहानियाँ हैं जिनके विषय अपने आस-पास घटित सामान्य घटनाएं हैं जो प्रभावित करती हैं। कुछ कहानियों में संदेश है तो कुछ में साहित्य जगत में आपसी होड़ व आपाधापी का सजीव चित्रण है।

   ' मेरा किया मेरे साथ 'कहानी बहुत लघुकाय होते हुए भी एक संदेश देती है तो 'इलाज 'समाज में ऐसा भी होता है यह दिखाती है। 'अथ श्री अन्याय निवारण कथा 'न्याय व्यवस्था पर सच के माध्यम से तीव्र कटाक्ष है। ' ओछा  ' और ' घटिया 'का कथ्य लगभग एक सा ही है कि व्यक्ति अपनी ओछी सोच से भी कितना बौना हो जाता है।साहित्य जगत में सम्मान और पुरस्कार प्राप्ति के लिए भी कैसे एक दूसरे की टांग खिंचाई होती है,यह भी सच्चाई से साक्षात्कार है।

 'अभिनन्दन 'कहानी में पर्दे के पीछे का सच है।'ऋषभ ' इलेस्ट्रेडेड बाई पुष्प लता ' कहानी एक कुशाग्र बुद्धि के पांच वर्षीय बालक पर आधारित है जो काफ़ी लम्बी है, जो दादी के साथ खेलते खेलते खिलौनों के माध्यम से कितने प्रकार के दृश्य प्रस्तुत कर देता है जो उसकी त्वरित कल्पना शीलता और रचनात्मकता को प्रकट करता है। 'अभिमन्यु ' कहानी बहुत संक्षिप्त होते हुए भी प्रभावित करती है। ' द्रोपदियाँ 'में कहीं- कहीं स्वयं ही निर्मित पारिवारिक व्यवस्था है जो सम्पत्ति के बंटवारे के कारण की जाती है, अपने कथ्य में साम्य के कारण यह कहानी महाभारत की द्रोपदी का स्मरण कराती है।

     कुछ कहानियाँ अधिक विस्तार लिए हुए हैं तो उसके पीछे कदाचित लेखिका का उद्देश्य उनकी कथा वस्तु में प्रसंग वश आए संदर्भों का सूक्ष्मता से उद्घाटन करना हो सकता है। ' वरदान या अभिशाप ' कहानी में घर के बुजुर्गों के प्रति स्वार्थ वश किए गए व्यवहार का मार्मिक चित्रण है।

     कुल मिलाकर " फार्मूला -44 " कहानी संग्रह अपने कथ्य, रोचकता, उत्सुकता, प्रस्तुतिकरण आदि सभी प्रकार से उम्दा  पठनीय है।इन्द्रधनुषी छटा लिए हुए हैं डाक्टर पुष्प लता की लघु कथाएं।

इसका साहित्य जगत में, विशेष रूप से कथा जगत में भरपूर स्वागत होगा ऐसा मेरा मानना है। इसके लिए डाक्टर पुष्पलता बधाई की पात्र हैं। भविष्य में भी उनके साहित्यिक उत्कर्ष की मंगल कामना के साथ,,,,


समीक्षा,,,लघु कथा संग्रह,, फार्मूला  -44  ,,, लेखिका : डाक्टर पुष्पलता अधिवक्ता

समीक्षक -विजया गुप्ता, मुजफ्फरनगर।

फोन नं 9457689457

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