मुबाहिसा : राजेन्द्र मौर्य. "पगडंडी का गांधी" लो कतंत्र की यही ताकत है, जिसमें किसान, मजदूर, व्यापारी कोई भी वह साधारण से साधारण व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मंत्री बन सकता है, जिसे जनता चाहती है। और जनता जिसे नकार दे तो वह बड़े से बड़े पद से बेदखल कर दिया जाता है। 1977 में इंदिरा गांधी को बुरी तरह हराने समेत इतिहास ऐसे तमाम उदाहरणों से भरा पड़ा है। इन दिनों भाजपा के दो कामदारों ने भारत को कांग्रेसमुक्त का नारा दिया हुआ है। यह नारा दरअसल नेहरू-गांधी परिवार से मुक्ति का है, जिसे पहले भी कई बार दिया चुका है पर जिसे जनता चाहती है तो फिर उसका कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। पंडित जवाहरलाल नेहरू की मौत के बाद इंदिरा गांधी अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता से आगे बढ़ीं और उनके साथ ही संजय गांधी ने भी अपनी नेतृत्व क्षमता को साबित किया, जहां वह 1977 में इंदिरा गांधी की हार के बड़े कारण बने वहीं 1980 में कांग्रेस की वापसी का भी काफी श्रेय उन्हीं को जाता है। मुझे वर्ष 1980 में अपनी बा...
केजरीवाल के आगे कमल सूंघने से परहेज, हाथ को झटका दि ल्ली विधानसभा में मतगणना के बाद फिर आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार और अरविंद केजरीवाल का मुख्यमंत्री बनना तय है। आप 70 में से 62 सीटों पर बढ़त बनाई है। वहीं भाजपा को सिर्फ आठ सीटों पर बढ़त बनाई है। आप के संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी जीत के प्रति आश्वस्त होकर दिल्ली वासियों का आभार जताया है। दिल्ली में पूरी ताकत झोंकने बावजूद मोदी-शाह की जोड़ी कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई। कुछ राज्यों के चुनाव में जिस तरह क्षेत्रीय दलों को जनता तरजीह दे रही है, वह स्थानीय प्रशासन को चुस्त दुरुस्त करने की मंशा के साथ ही अधिकाधिक सहूलियत की उम्मीद करती है। दिल्ली में बिजली और पानी की उपलब्धता और सस्ता करने पर दिल्ली की जनता ने अरविंद केजरीवाल को पसंद किया है और तीसरी बार उनकी भारी जीत यही साबित करती है कि जनता कुछ भी कर सकती है। जनता को अब केवल नारों से बेवकूफ नहीं बनाया सकता है। सरकार उम्मीदों पर खरा उतरेगी तो बार-बार जीतेगी और नाउम्मीदी पर कांग्रेस की तरह शून्य पर भी...
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