मजमा फिर हिट.... आइए भाइयों-बहनों, आपका जाना-पहचाना मदारी अपने जमूरे के साथ आ गया। मजमा मेरा पसंद आए तो बजाना ताली, नहीं आए पसंद तो देना गाली। पर बात पते की बताता हूं, मजमा मेरा ऐसा, नामुमकिन को कर दे मुमकिन। बोलो कैसे! सुनो भाई एेसे, कपड़े से बना ये सांप का पुतला नेवले को चबा जाएगा। और तो और मेरे जमूरे के कहते ही, हर तमाशबीन की जेब नोटों से भर जाएगी। बताना जमूरे, वो सामने खड़ा तमाशबीन गंजा क्यों है? बता दूँ उस्ताद, यह हमारे मजमे से दूर था। अब इसके सिर पर बाल उगेंगे, और वो बोड़ा भाई पीछे खड़ा, उसके नए मोती जैसे चमकते दांत निकलेंगे। वो कैसे जमूरे बताओ सबको, उस्ताद आप हैं तो नामुमकिन भी मुमकिन है। अब बताओ, मजमे में कौन अपनी खाली जेब नोट से भरना चाहता है। गंजे सिर पर बाल उगाना चाहता है, दांत मोती जैसे चमकाना चाहता है। ...
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भाजपा का बड़ा घोटाला
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मैं तो रवीश जी की बात से पूरी तरह सहमत हूं और संविधानिक संस्थाओं से खुली और निष्पक्ष जांच की मांग करता हूं और आप ? ........................... भाजपा के देश भर में बने 600 से ज्यादा भव्य आफिसों पर मीडिया मौन क्यों है : रवीश कुमार Posted on March 30, 2019 by रवीश कुमार भारतीय जनता पार्टी की खासियत है कि वह कांग्रेस को तो भ्रष्ट बताती है पर अपनी ईमानदारी नहीं बताती। ऐसा कोई दावा नहीं करती। 2014 और इससे पहले कुछ किया भी हो, अब करने लायक भी नहीं है। दूसरी ओर, नोटबंदी के समय खबर छपी थी कि अलग-अलग शहरों में पार्टी ने जमीन खरीदी है – ज्यादातर मामलों में नकद देकर। उस खबर का कोई फॉलोअप नहीं हुआ और पार्टी ने कोई सफाई भी नहीं दी। गोदी मीडिया में चूंकि भाजपा के विरोधियों के भ्रष्ट होने के आरोप ही छपते हैं इसलिए भाजपा से ना कोई सवाल करता है, ना भाजपा मौका देती है और ना ही पूछे जाने पर जवाब देती है। आरटीआई कानून लाने वाली पार्टी को भाजपा ने भ्रष्ट घोषित कर रखा है और मीडिया की दुम मरोड़े बैठी पार्टी ने खुद की छवि ईमान...
JOURNALISM : गुलामी की ओर पत्रकारिता
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------------------------------ मुबाहिसा : आर.के. मौर्य ------------------------------ मीडिया घरानों की करोड़ों-करोड़ों की डील हो चुकी है। निष्पक्षता बिक चुकी है। पत्रकारिता गुलाम हो चुकी है। देख, सुन, पढ़कर यकीन मत करना। खुद तोल-मोलकर ही सच तय करना। इस व्यावसायिक युग में लोकतंत्र को भी बाजारीकरण का घुन लग गया है। "जो दिखता है, वो बिकता है" की मार्केटिंग रणनीति पर लोकतंत्र को पूंजीपतियों द्वारा कब्जा कर देश की सत्ता को हथियाने का काम किया जा रहा है। अब नहीं समझे तो फिर "ईस्ट इंडिया कंपनी" की तरह ही देश की सत्ता कुछ पूंजीपतियों के कब्जे में जाने से कोई नहीं रोक पाएगा। कंपनियों का काम जनसेवा नहीं मुनाफा कमाने के लिए जनता का खुला शोषण करना होता है। इसका प्रभाव देश में दिखने लगा है। जागो मतदाता जागो! जात-पात को मिटाओ, नफरत को ठिकाने लगाओ। लोकतंत्र को जिताओ, पूंजीपतियों को हराओ। मतदान जरूर करें! #Election2019 साभार: आर. के.मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार
गैरजिम्मेदार मीडिया
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मुंबई में आतंकी हमले 26/11 में जो गलती हमारी मीडिया ने की थी, उसी की पुनरावृत्ति आज पाकिस्तान में घुसकर की गई सफल एयर स्ट्राइक-26/2 की कवरेज के नाम पर एयरफोर्स की रणनीतिक सूचनाओं को सूत्रों का हवाला देकर प्रसारित किया जा रहा है जो हमारे लिए नुकसानदायक और दुश्मनों के लिए लाभकारी हो सकता है। आखिर कब हमारे मीडिया के साथी जिम्मेदार और परिपक्व पत्रकार होने का परिचय दे पाएंगे। हमें समझना होगा, राष्ट्र के आगे सब गौण है।