दिल्ली : यस बैंक संकट में, मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर उठे सवाल

स  बैंक के डूबने पर आरबीआई की पाबंदियों के बाद शेयर बाजार के निवेशक लगातार इसे 'नो" कह रहे हैं।  पांच मार्च को जहां बैंक के शेयर 27 पर्सेंट लुढ़के थे, वहीं छह मार्च की  मॉर्निंग सेशन में ही शेयर 80 पर्सेंट से ज्यादा टूट गया। बैंक के शेयर 82 पर्सेंट की गिरावट के साथ 52 हफ्तों के लो के करीब पहुंच गए। इसको लेकर राजनीतिक गलियारे में मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर भी एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। विपक्षी मोदी सरकार पर हमलावर हो गए हैं।
बीएसई पर बैंक के शेयरों में जहां 82 पर्सेंट तक की गिरावट दिखी, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर भी शेयर लगातार 60 पर्सेंट से ज्यादा नीचे दिखाई दिए। पांच मार्च को आरबीआई ने बैंक पर पाबंदी लगा दी, अब इसके ग्राहक 50 हजार  रुपये से ज्यादा निकासी नहीं कर पाएंगे। डूबते बैंक को बचाने में दिलचस्पी तो जाहिर की है,  लेकिन निवेशकों में खुशी नहीं लौटी है। इसका मर्जर किया जाता है या टेकओवर, फैसला अब 30 दिनों के भीतर लेगा। हालांकि आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि फैसला लेने में 30 दिन का वक्त नहीं लगेगा, काम जल्दी ही हो जाएगा।
बीएसई पर यस बैंक के शेयर आज 33.20 के स्तर पर खुले थे और साढ़े 11 बजे तक के समय यह 33.20 रुपये का स्तर ही इसका हाई था। 52 हफ्तों की बात करें तो शेयर 285.90 का हाई देख चुका है और 5.55 का लो। शेयर के मार्केट कैप की बात करें तो सितंबर 2018 में जो 80 हजार करोड़ के आसपास था वह अब घटकर 2,741.76 पर आ गया है।  यस बैंक की लिस्टिंग जुलाई 2005 में हुई थी।
यस बैंक की तबाही की कहानी
16 साल पहले शुरू हुआ यस बैंक डूब रहा है, उसे बचाने के लिए एसबीआई के हाथ बढ़ाने की बातें सामने आ रही हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसे गर्त में पहुंचाने की कहानी घर से ही शुरू हुई है। अशोक कपूर की मौत के बाद कैसे इसकी शुरुआत हुई।
कभी सबका चहेता रहा यस बैंक अब डूबने के कगार पर है। ऐसा बैंक जिसे औसत से ज्यादा ब्याज देने के लिए जाना जाता था। इसके बेहद खराब दिन चल रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि उसको बचाने की महीनों से कोशिश की जा रही है। बैंक के शेयर लगातार लुढ़कते जा रहे हैं, आज के सेशन में भई यह 50 पर्सेंट नीचे ट्रेड कर रहा है। एसबीआई अब उसे बचाने के लिए आगे आया है, लेकिन बैंकों की दुनिया में यह चमकता सितारा गर्त में कैसे पहुंचा।  इस कहानी की शुरुआत राणा कपूर के परिवार के सामंती माहौल और आपसी कलह से होती है।
मुसीबतों से गुजर रहे यस बैंक को भारतीय स्टेट बैंक का सहारा मिल सकता है। इस बात का दावा किया है ब्लूमबर्ग ने, जिसके बाद पांंच मार्च को यस बैंक के शेयर में उछाल आई, जबकि भारतीय स्टेट बैंक के शेयरों पर उल्टा असर हुआ और गिरावट दर्ज की गई। खबर ये है कि भारतीय स्टेट बैंक अब आर्थिक संकट से जूझ रहे यस बैंक में पैसे लगाएगा और कुछ हिस्सेदारी खरीदेगा।
अब सवाल ये भी है कि आखिर इस सूचना के बाद भारतीय स्टेट बैंक के शेयर गिरे क्यों? क्या लोगों को भारतीय स्टेट बैंक पर भरोसा नहीं है कि वह यस बैंक की गिरती हालत को सुधार पाएगा? हालांकि, छह मार्च के शुरुआती कारोबार में यस बैंक और भारतीय स्टेट बैंक दोनों के ही शेयरों में गिरावट दिखी है। यहां तक कि पूरा शेयर बाजार ही पांच मार्च को धराशाई हो गया और 1300 से भी अधिक अंकों की गिरावट दर्ज की गई।

2018-19 में मुनाफा दिखाया, लेकिन घाटा हुआ
अगर भारतीय स्टेट बैंक के 2018-19 के आंकड़ों के देखा जाए तो पता चलता है कि बैंक को 862 करोड़ रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ था। हालांकि, इससे पहले दो साल तक बैंक को लगातार नुकसान हुआ था।  इससे पहले  बैंक को 2017-18 में 6,547 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था और 2016-17 बैंक को 1805 करोड़ रुपए का घाटा हुआ था।

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