Mukti Bhatnagar : मुक्ति भटनागर थी मुंबई में आतंकी हमले की चश्मदीद

  • मुक्ति थी मुंबई में आतंकी हमले की चश्मदीद


मुंबई के होटल ताज में आतंकी हमले की गवाह डाॅ. मुक्ति भटनागर ने मीडिया से बयां की थी खौफनाक मंजर की कहानी।

मुंबई में 26/11 में हुए ताज होटल पर आतंकी हमले का गवाह मेरठ भी रहा था। जिस समय ताज होटल पर हमला हुआ उस समय मेरठ की डाॅ. मुक्ति भटनागर अपनी 90 वर्षीय मां, यूके से आई अपनी बहनों और मुंबई की अपनी दोस्तों साथ डिनर पर गई थीं। 
आज इस दुनिया को छोड़ गईं हैं।
डाॅ. मुक्ति ने तब मीडिया से आतंकी हमले के खौफनाक कहानी बयां की थी।  उन्होंने बताया था कि जिस समय हमला हुआ उस समय हम लोगों का डिनर आ चुका था। डिनर हाल में सब लोग हंसी-मजाक और गप-शप कर रहे थे। अचानक धमाका हुआ और कान सुन्न हो गए। इसी दौरान गोलियां चलने की आवाजें आने लगी। हाल में मौजूद सभी लोग बाहर की ओर भागे, लेकिन मुख्य गेट के पास गोलियां की आवाज सुनकर सब दबे पांव वापस लौट आए और जिसको जहां जगह मिली अपनी जान बचाने के लिए छुप गया। 
डाॅ. मुक्ति भी अपनी मां, बहनों और सहेलियों के साथ किचन की तरफ भागी और वहां पर जाकर छिप गईं। इसी दौरान किचन की ओर आतंकी आए, लेकिन सब लोगों के छिपे होने के कारण वे किसी को वहां न पाकर वापस दूसरी मंजिल पर चले गए।

  • आतंकी उर्दू भाषा में बात कर रहे थे

डाॅक्‍टर मुक्ति ने बताया था कि आतंकी उर्दू भाषा में बात कर रहे थे। दो लोगों के हाथ में गन थी और उनके कमर पर काले रंग के थैले टंगे हुए थे। उन्होंने मिलि‍ट्री के कलर के कपड़े पहने हुए थे।

  • किचन में रात दो बजे तक रहे

मुक्ति के अनुसार थोड़ी देर बाद होटल की लाइट काट दी गई। सभी के मोबाइल स्विच आॅफ हो गए थे। ताज होटल के आसपास का नेटवर्क जाम कर दिया गया था। हमले के दस मिनट के भीतर ही मुंबई पुलिस के जवानों ने होटल को पूरी तरह घेर लिया था। कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या किया जाए। रह-रहकर गोलियों की आवाजे एक साथ गूंजती थी। रात दो बजे जब कमांडो आए तब जाकर वे सभी लोग बाहर सुरक्षित निकल सके थे।

  • मुक्ति रही सुभारती आंदोलन की जनक

डॉ. मुक्ति भटनागर का जन्म 1957 में हुआ। उनका शुरू से ही जुनून था कि वह खुद वह अपने परिवार के साथ ऐसी देश सेवा करें, जिन्हें शायद ही भूला जा सके। सबसे ज्यादा उनका योगदान चिकित्सा शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति रहा। वह सुभारती आंदोलन की जनक भी रहीं। मेरठ तथा देहरादून के सुभारती विश्वविद्यालय की उनके निधन से सुभारती परिवार में मातम छा गया है।

  • बौद्ध रीति से होगा अंतिम संस्कार

सुभारती परिवार की तरफ से यह जानकारी दी गई है कि डॉक्टर मुक्ति भटनागर का अंतिम संस्कार सोमवार को सूरजकुंड स्थित श्मशान घाट पर बौद्ध रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा। यह भी अपील की गई है कोविड-19 को दृष्टिगत रखते हुए करीबी, परिचित और उनसे जुड़े लोग स्वयं अंतिम संस्कार में न आकर अपने स्थान से ही प्रार्थना करें। परिवार में उनके पति डॉक्टर अतुल कृष्ण भटनागर के अलावा उनकी बेटी डॉ. शल्या व अन्य सदस्य हैं।

  • कोविड में सुभारती ने बचाई जानें


सुभारती विश्वविद्यालय व सुभारती मेडिकल कॉलेज में कोरोना के काल में  बड़ा योगदान दिया है। वेस्ट यूपी ही नहीं बल्कि दूसरे राज्यों के मरीजों का भी यहां उपचार किया गया। सुभारती अस्पताल शुरुआत से ही कोविड सेंटर बनाया गया, जो अभी तक कोविड अस्पताल के रूप में कार्य कर रहा है। यहां मरीजों को एक नई जिंदगी सुभारती अस्पताल ने दी है।

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