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वीडियो : सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार की सभी हदें हो रहीं पार
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की जीत और भाजपा की शिकस्त को सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस वीडियो के जरिए दुष्प्रचारित किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इन दिनों हमेशा पूरे समाज को जाति व धर्म के नाम पर बांटने वाली ताकतों से सावधान रहने की जरूरत है। यह वीडियो वाइल्ड लाइफ से लेकर उसपर अपनी मानसिकता के मुताबिक कुछ शब्दों को लिखा गया है। लोगों को सोशल मीडिया पर ऐसी दुष्प्रचारित सामग्री से बहुत ही सचेत रहना चाहिए । इस तरह की हरकत कुछ राष्ट्र विरोधी ताकतें न केवल हमारे समाज को जाति और धर्म के आधार पर तोड़ने की कोशिश कर रहीं हैं, बल्कि हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था की जड़ों को भी कमजोर करने की साजिश कर रहीं हैं ।
नई दिल्ली : कश्मीर मुद्दे पर ब्रिटिश सांसद को एयरपोर्ट से लौटाया
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नई दिल्ली : बिन कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा का मुकाबला संभव नहीं
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किसी भी चुनाव में कांग्रेस की शिकस्त होते ही सभी गैर भाजपा दलों को यह लगने लगता है कि अब कांग्रेस गई और भाजपा के सामने विपक्षी दल की भूमिका में सभी क्षेत्रीय दल और उनके नेता अपने को देखने लगते हैं। पर, यह निर्विवाद बात सत्य है कि भाजपा का राष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला अभी तो संभव नहीं लगता है। यही कारण ही भाजपा बार-बार कांग्रेस मुक्त भारत की बात करती है। चूँकि भाजपा और आरएसएस जानती है कि एक बार कांग्रेस खत्म हो जाए तो फिर भाजपा को लंबे समय तक कोई नहीं डिगा पाएगा। हाल ही में दिल्ली जीतने वाली आप में भाजपा प्रायोजित मीडिया अरविंद केजरीवाल में हवा भरने की भरपूर कोशिश कर रहा है कि देशभर में अब केजरीवाल भाजपा के सामने विपक्ष के नेता की भूमिका में आ सकते हैं और वे प्रधानमंत्री पद के बड़े दावेदार बनकर उभर सकते हैं।
यूपी : मजदूरों ने मांगा हक, मिल मालिकों ने यूनियन का दफ्तर ही तोड़ डाला
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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली में शुगर मिल में अपने हकों के लिए भारतीय मजदूर संघ (एटक) लंबे समय से सघर्ष कर रही है। इस मिल में अन्य मजदूर संगठन जहां प्रबंधन के आगे नतमस्तक हैं, वहीं कम्यूनिस्ट विचारधारा से प्रेरित भारतीय मजदूर संघ (एटक) के कार्यकर्ता मजबूती से अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि समय-समय पर मिल प्रबंधन यूनियन के कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करने के लिए प्रताड़ित करता रहता है। 17 फरवरी सोमवार को मिल प्रबंधन ने यूनियन कार्यालय के लिए आवंटित भवन को ही ध्वस्त कर दिया है। इस मामले में यूनियन के मंत्री राजेन्द्र पंवार ने पुलिस कोतवाली में एक तहरीर देकर कार्रवाई की मांग भी की है।
सियासत के रंग : अब केजरीवाल को चाहिए पीएम का आशीर्वाद
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दि ल्ली में मुख्यमंत्री की तीसरी बार शपथ लेते हुए सियासत के भी रंग देखने को मिले। मुख्यमत्री अरविंद केजरीवाल हमेशा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को कोसते रहे और अमित शाह भी उनके निशाने पर रहे और पीएम मोदी और अमित शाह ने भी को कमी नहीं छोड़ी। यह सियासत में गिरगिट की तरह रंग बदलने की कलाबाजी ही कही जाएगी, जहां चुनाव में विजयी होते ही सब कुछ बदल जाता है। केजरीवाल ने पीएम से आशीर्वाद मांगा और यह साबित करने की कोशिश की, कि वह भाजपा के समर्थक नहीं हैं तो उनका कोई विरोध भी भाजपा और उसके नेताओं के साथ नहीं है। देखने में आ रहा है कि देशभर में हर क्षेत्रीय दल भाजपा के साथ दुम हिलाकर घूमने का कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। बस कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी नेता ही अभी तक अडिग मैदान में जमे हैं।
यूपी : ये क्या कह रहे हैं अखिलेश यादव (वीडियो)
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यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव इन दिनों बहुत ही गुस्से में नजर आ रहे हैं। कन्नौज से उनकी पत्नी डिंपल यादव लोकसभा चुनाव जब से हारी हैं। तब से कन्नौज यात्रा के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाते हैं। वह कभी सरकारी कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करते दिखते हैं तो कभी सीधे धमकी देने की भाषा बोलते दिख रहे हैं। इस व्यवहार से उनकी एक अपरिपक्व नेता की छवि बनती जा रही है।
मध्यप्रदेश : सिंधिया पिता की राह पर
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मध्यप्रदेश की सियासत में भूचाल आ रहा है। ज्योतिआर्दित्य सिंधिया ने मुख्यमंत्री कमलनाथ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इन दिनों वे प्रदेश में जगह-जगह सभाएं कर अपने वजूद के लिए लड़ते दिख रहे हैं। उनकी गतिविधियाँ देखकर लग रहा है कि वे भी 1992 में अपने पिता माधवराव सिंधिया की राह पर चलकर एकला चलना चाहते हैं। पहले मुख्यमंत्री की दौड़ में पिछड़ने के बाद लोकसभा चुनाव हारने पर जैसे भाग्य ही उनका साथ नहीं दे रहा है। राहुल गांधी चाहते हुए भी उनको मजबूत नहीं कर पाए हैं। सिंधिया के कुछ करीबी लोग कह रहे हैं कि सिंधिया मध्यप्रदेश में अपनी अलग राह बनाकर क्षेत्रीय दल बनाने की संभावनाओं पर काम कर कर रहे हैं। यदि एेसा होता है, तो इसे भी कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका माना जाएगा। संदेश एक बार फिर वही जाएगा कि कांग्रेस में संकटकालीन प्रबंधन का अभाव है।
दिल्ली : लोकसभा में लोजपा अध्यक्ष चिराग पासवान ने सीएए का समर्थन किया (वीडियो)
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दिल्ली : भाजपा भी कांग्रेस के नक्शेकदम पर
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भाजपा में हाईकमान पूजा का दौर कांग्रेस की तरह आ गया है। कांग्रेस में नेताओं को जीत का श्रेय गांधी परिवार को देने की होड़ लग जाती है, जबकि हार की जिम्मेदारी लेकर नेताओं के बयान जारी होने की भी होड़ लग जाती है। अब भाजपा भी इसी रास्ते पर है। जीतने पर मोदी-शाह का वाह-वाह और हारने पर नेता एक दूसरे की और झांकना शुरू कर देते हैं। दिल्ली में भाजपा ने पूरा चुनाव मोदी के फेस पर लड़ा। पूरी ताकत झोंकने के बावजूद हार होने पर अब भाजपाई एक दूसरे को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि भले पूरी दिल्ली में पोस्टर हॉर्डिंग में केवल मोदी छाए रहे, पर वे तो केवल जीत के मालिक हैं। हार तो दिल्ली के नेताओं को ही ओढ़नी होगी।
दिल्ली : मीडिया केजरीवाल को भ्रमित करने की कोशिश में
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दिल्ली में आप सरकार तीसरी बार 16 फरवरी को शपथ लेगी, जिसकी कैबिनेट में ज्यादातर पुराने मंत्री ही शामिल होंगे। उनकी प्रचंड जीत पर मीडिया एक बार फिर अरविंद केजरीवाल को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है कि वह भाजपा का विकल्प हो सकते हैं। केजरीवाल को दिल्ली के मतदाताओं का मान रखते हुए उनकी अच्छे से सेवा करनी चाहिए। मीडिया के बहकावे में नहीं आना चाहिए। देश में अभी मोदी को शिकस्त देने के लिए सभी विपक्षी दलों को एक मंच पर लाने की कोशिश की जानी चाहिए।