कोरोना : महामारी धर्म या जाति नहीं देखती, जो भी उसके रास्ते में आएगा वही उसका शिकार होगा

                     

                       मुबाहिसा : राजेन्द्र मौर्य                                  इन दिनों पूरी दुनिया चीन से शुरू हुई महामारी कोरोना या कोविड-19 से जंग लड़ रही है। प्राकृतिक आपदा भूकंप, तुफान आदि की तरह ही इस महामारी ने भी राज्य, देश की सीमाओं को लांघ दिया है। जाति और धर्म की दीवार को तोड़कर सभी के यहां महामारी दस्तक दे रही है। सभी लोग अपने तरीके से महामारी से स्वयं को बचाने में जुटे हैं। यह साफ है कि महामारी को जहां बचाव और सावधानी से हराया जा सकता है वहीं, समय से इलाज भी महामारी को मात दे सकता है। यह बात साबित भी हो चुकी है कि असावधानी से तमाम लोगों की जान जा रही है वहीं, समय पर इलाज से तमाम पीड़ितों की जान बचाई भी जा रही है। लेकिन यह क्या,  हमारे देश में इस महामारी को भी धर्म के नाम पर बांटने का दुष्प्रचार किया जा रहा है। मान सकते हैं कि निजामुद्दीन मरकज पर धार्मिक आयोजन के दौरान हुई असावधानी ने देश में संक्रमित लोगों की संख्या को बढ़ा दिया है। लेकिन क्या 22 मार्च को जनता कर्फ्यू से पहले                                             (वीडियो: किसी एक को दोषी ठहराना गलत)                                                                                हमारे देश में कोरोना को लेकर कोई गंभीर था ? क्या किसी भी भीड़ वाले आयोजन पर कोई प्रतिबंध था? यदि एेसा होता तो जनवरी में पहला कोरोना पॉजिटिव केस मिलते ही कोई भी भीड़ वाला आयोजन नहीं होने दिया जाता। इससे न अहमदाबाद में  "नमस्ते ट्रंप" होता और न ही होली पर लोग गले मिलते। न ही हर शहर में शादी समारोहों के आयोजन होते ! लेकिन, हमारे देश का यही दुर्भाग्य है कि हम गलतियों से सबक लेकर उसको त्वरित गति से सुधारने की बजाय एक-दूसरे को कोसना और अपनी स्वार्थसिद्धि के लिए दोषारोपण शुरू कर देते हैं। यही अब हो रहा है, हम अपनी लापरवाही और अब तक की नाकामी को छिपाने के लिए कहीं जमातियों को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं तो कहीं समाज को महामारी से एकजुट होकर लड़ने की बजाय बांटने का काम कर रहे हैं। बेहतर होगा कि हम समाज को इस महामारी के नाम पर बांटने की बजाय एकजुट करके इस जंग को जीतने का काम करें। चूंकि महामारी देश, धर्म या जाति की पहचान करके हमला नहीं करती है। महामारी के रास्ते में जो भी आता है, वह ही उसका शिकार हो जाता है।                                                                                                                                                             

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