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Government of village : गांव की सरकार, हुक्के की गुड़गुड़ाहट

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गांव की सरकार,  हुक्के की गुड़गुडाहट  पंचायत हुकुमत के लिए चुनाव की खेती में  हुक्का गुड़गुड़ाना शुरू हो गया है। बाबा-ताऊ-चाचा के कोरोना के कहर से हाथ-पाँव भी फूल रहे हैं । मोबाइल पर  मतदान की अपील ने कान पका दिए हैं।   उत्तर प्रदेश में पंचायती राज के लिए चुनाव की खेती शुरू होते ही सियासी बिसात बिछने लगी है। ग्रामीण आंचल में कोई भी अपने को कम आंकने को तैयार नहीं हैं। चौपालों पर हुक्का गुड़गुड़ाना  शुरू हो गया है। जहां भाई- भतीजे चुनावी दंगल के लिए वोटो की गिनती में मशगूल है, वहीं बाबा-चाचा-ताऊ के कोरोना के कहर से हाथ-पांव फूलते नज़र आ रहे हैं। साथ ही मोबाइल मतदान शुरू होने से मतदाताओं के कान भी पकने लगे हैं।         खैर कुछ भी हो, खाना मिलेगा-पीना मिलेगा भैया का सेहरा का है, सब कुछ मिलेगा। ग़र भूखे हैं जानवर तो सबको चारा मिलेगा, मुरझाया हुआ चेहरा भी खिलेगा। सबकी हर रूप से बल्ले-बल्ले। बहरहाल सबकी चर्चा तो निश्चित है ही। अब देखना है कि कौन अखाड़े में पटखनी देता है या यूँ ही लंगोट कसे रह जाता हैं।  हूं... कबीरा खड़ा बाजार में...

Dance in Darbar of king : नर्तकी का दोहा, सुधारा सबका जीवन

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नर्तकी का दोहा, सुधारा सबका जीवन एक पुरानी कथा जो आज भी बिल्कुल प्रासंगिक है। एक राजा को राज  करते काफी समय हो गया था। बाल भी सफ़ेद होने लगे थे। एक दिन उसने अपने दरबार में उत्सव रखा और अपने मित्र देश के राजाओं को भी सादर आमन्त्रित किया व अपने गुरुदेव को भी बुलाया।* *उत्सव को रोचक बनाने के लिए राज्य की सुप्रसिद्ध नर्तकी को भी बुलाया गया।* *राजा ने कुछ स्वर्ण मुद्रायें अपने गुरु जी को भी दी, ताकि नर्तकी के अच्छे गीत व नृत्य पर वे भी उसे पुरस्कृत कर सकें।* *सारी रात नृत्य चलता रहा। ब्रह्म मुहूर्त की बेला आई, नर्तकी ने देखा कि मेरा तबले वाला ऊँघ रहा है और तबले वाले को सावधान करना ज़रूरी है, वरना राजा का क्या भरोसा दंड दे दे।* *तो उसको जगाने के लिए नर्तकी ने एक दोहा पढ़ा -* ...✍ *"घणी गई थोड़ी रही,*  *या में पल पल जाय।*  *एक पलक के कारणे,*  *युं ना कलंक लगाय।"* ...✍ *अब इस दोहे का अलग-अलग व्यक्तियों ने अपने अनुरुप अर्थ निकाला।*  *तबले वाला सतर्क होकर बजाने लगा।*  ...✍ *जब यह दोहा गुरु जी ने सुना, तो गुरुजी ने सारी मोहरें उस नर्तकी को अर्पण कर दी।* ...✍ *दोहा सुन...

Dr. GVG krishnamurti : डॉक्टर कृष्णमूर्ति का निधन

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डा. कृष्णमूर्ति का निधन           पूर्व चुनाव आयुक्त, मेरे फुफेरे भाई, डा. जीवीजी कृष्णमूर्ति कल कौशांबी (गाजियाबाद) में दिवंगत हो गये। वे 86 वर्ष के थे। निर्वाचन आयोग प्रमुख टी.एन.शेषन के वे सहयोगी रहे। आंध्र प्रदेश के प्रकाशम जिले के चीराला नगर में डा. कृष्णमूर्ति नियोगी विप्र कुटुम्ब में जन्मे थे। भारतीय विधि सेवा के आला अधिकारी रहे।            प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के डा. कृष्णमूर्ति  सलाहकार थे। खासकर झारखण्ड के सांसदों के दलबदलू प्रकरण में। जब पराजित कांग्रेसी प्रत्याशी नीलम संजीव रेड्डि ने इंदिरा गांधी के नामित वीवी गिरी के राष्ट्रपति चुनाव (1969) के विरुद्ध याचिका दायर की थी तो डा. कृष्णमूर्ति ने उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के कटघरे में स्वयं उपस्थित रहने की राय दी थी। हालांकि राज्यपाल और राष्ट्रपति को अदालती समन से संवैधानिक छूट मिलती है।  शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे को शिवसेना के संगठनात्मक निर्वाचन कराने का निर्देश डा. कृष्णमूर्ति ने दिया तो ठाकरे का उत्तर था कि ''शिवसेना में पदाधिकारी आजीवन रहते हैं। मेरे आद...

Keral CPI : माकपा को चुनौती दूसरी संतप्ता से

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 माकपा को चुनौती दूसरी संतप्ता से !!         केरल मार्क्सवादी कम्युनिस्टों द्वारा उसके पति की हत्या से विधवा हुयी केके रमा भी अब विधानसभा का चुनाव लड़ रहीं हैं। सोनिया कांग्रेस—नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा रमा का पूर्ण समर्थन कर रहा है। वडकर (कोजिकोड जिला) से माकपा के प्रतिकार में रमा अपना विरोध मतपेटियों द्वारा व्यक्त करेंगी। मतदान अप्रैल 6 को है।         रमा की गाथा बड़ी त्रासदी और विडंबना से भरी है। उसके स्वर्गीय पति टीजी चन्द्रशेखरन माकपा के जानेमाने नेता थे। स्टूडेन्ट फेडरेशन आफ इंडिया (एसएफआई) के क्रियाशील अगुवा रहे थे। माकपा के वरिष्ठों में थे। मगर माकपा मुख्यमंत्री पिनरायी वियजन के आलोचक थे। एक दिन (4 मई 2012) को वह ओचिंत्यन गांव से किसी विवाह समारोह में शिरकत कर मोटरबाइक पर घर लौट रहे थे, तो करीब पन्द्रह लोगों ने उन्हें काट डाला, टुकड़े—टुकड़े कर दिये। मुकदमा चला तो बारह हत्यारों को आजीवन कारावास हुआ। इनमें चार लोग माकपा के वरिष्ठ नेता थे। इस हत्या पर टिप्पणी करते पूर्व माकपा मुख्यमंत्री और राज्य के वरिष्ठतम कम्युनिस्ट नेता वीएस अच...

Dr. Ambedkar ; डॉक्टर अंबेडकर : पूरे विश्व के गौरव

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 डॉक्टर अंबेडकर : पूरे विश्व के गौरव जिस व्यक्ति का इंग्लैंड की विश्व प्रसिद्ध ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में फोटो लगा है वहां लिखा है हमें गर्व है कि ऐसा छात्र हमारे यूनिवर्सिटी से पढ़कर गया ।कोलम्बिया यूनिवर्सिटी में हाल ही मैं तीन सौ साल पूरे होने पर एक सर्वे किया गया कि इतने वर्षों में इस यूनिवर्सिटी  का सबसे होशियार सबसे प्रतिभाशाली छात्र  कौन रहा ।उस सर्वे में छ नाम सामने आये नंबर एक पर जिस व्यक्ति का नाम था उसकी यूनिवर्सिटी के गेट पर मूर्ति लगाई गयी जिसका अनावरण राष्ट्रपति बराक ओबामा ने किया ।उस व्यक्ति ने 20 दलित छात्रों के विदेश में पढ़ने के लिए ब्रिटिश हुकूमत से अनुरोध किया  था। के आर नारायण पूर्व राष्ट्रपति  उसी कोटे में विदेश में पढ़े और भारत के राष्ट्रपति बने ।उस व्यक्ति ने महिलाओं को बराबरी का दर्जा दिलाया श्रमिकों के हितों की रक्षा की महिलाओं के हकों के लिए कानून मंत्री के पद से इस्तीफ़ा दिया ।उस जूतों में बैठकर अपनी पढाई करने वाले, तमाम जीवन अपने देश में जाति के कारण अपमान झेलने वाले  ,शिक्षित बनो संगठित रहो संघर्ष करो का मूल मन्त्र देने वाले, अपनी ब...

Umakant lakhera elected : उमाकांत लखेरा जीते, पत्रकारों में खुशी

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उमाकांत लखेरा जीते, पत्रकारों में खुशी वरिष्ठ पत्रकार उमाकांत लखेरा ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में जीत हासिल की। उनकी जीत पर वरिष्ठ पत्रकार एवं राज्यसभा में  नेता प्रतिपक्ष मलिकार्जुन खरगे के राजनीतिक सलाहकार अरविंद कुमार सिंह ने खुशी जाहिर करते हुए इसे एक सच्चे पत्रकार की जीत बताया है।

Prerna (Video): मुस्कुराओ और खुश रहिए

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50 years of watergate conspiracy : वाटरगेट साजिश के पांच दशक

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 वाटरगेट साजिश के पांच दशक           वाटरेगट ? राजधानी वाशिंगटन में पोटेमेक नदी के निकटवाला स्थल। स्मृति पटल को पोछिये। दमक कर याद आ जायेगा। ठीक पचास साल पुरानी (रविवार, 18 जून 1972 की) खबर है। तब सर्वशक्तिमान अमेरिका के महाबलशाली रिचर्ड मिलहाउस निक्सन पर विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के कार्यालय में सेंधमारी के कारण महाभियोग चला था। निक्सन ने ल​ज्जा के मारे त्यागपत्र दे दिया था। जलील हुये। खलनायकी का इतिहास रचा। उस दौर में हीरो थे हमपेशेवर दो अदना रिपोर्टर—एक उन्नीस साल का तो दूसरा बीस का। तेज तर्रार थे, उभरती हुयी जवानी थी, इसीलिये निडर थे। फिर काहे का, किससे डर? उनके साहस से खोजी पत्रकारिता विश्व में कीर्ति के एवरेस्ट पर चढ़ गयी थी। मीडिया संस्थानों में भर्ती के नये रिकार्ड बन रहे थे। युवजन में सैनिक के बाद श्रमजीवी पत्रकार बनने की आकांक्षा कुलाचे भर रही थी। राष्ट्रपति को गिराने वाले इस युवाद्वय ने युगांतरकारी घटना को अंजाम दिया था। दुनिया के हम जैसे रिपोर्टरों के लिये वे सदा यादगार हैं। वाटरगेट साजिश को निर्भयता से पर्दाफाश करने वाले वाशिंगटन पोस्ट के पत्र...

Samajwadi Babu Bhagwati ji : एक निखालिस समाजवादी का गाना

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 एक नि खालिस समाजवादी का जाना            लोहियावाद के स्तम्भ बाबू भगवती सिंह का आज (4 अप्रैल 2021) लखनऊ में निधन हो गया। निखालिस समाजवादी थे। मृत्यु पर भी परहित ही किया। देहदान कर दिया ताकि उनके अवयवों और अंगों से अपंगों का भला हो सके। संयोग है कि गत माह ही (13 मार्च 2021) को बख्शी का तालाब में उनके निवास पर मिलने गया था। सहायक अजय सिंह भदौरिया ने भेंट करायी थी।          भगवती बाबू के जन्मदिवस (26 अगस्त 2001) पर आयोजित उत्सव पर मेरा लेख प्रसारित हुआ था। मेरी पुस्तक ''मानेंगे नहीं, मारेंगे नहीं'' (प्रकाशक : अनामिका नई दिल्ली) से उद्धृत लेख नीचे प्रस्तुत है:—            *मेरे साथ भगवतीजी*              ''पांच दशक से अधिक हो गये जब बाबू भगवती सिंह जी से पहली बार मेरी भेंट हुई थी। डा. राममनोहर लोहिया के नेतृत्व में गठित (1956) सोशलिस्ट पार्टी के मुख्यालय में भगवती बाबू प्रभारी थे। लखनऊ के पानदरीबा-स्थित लीला निवास में तब पार्टी कार्यालय होता था। उन्हीं दिनों प्रजास...

Indian men & women : दांपत्य की चक्की में फंसे भारतीय स्त्री पुरुष

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 "दाम्पत्य की चक्की  में फंसे भारतीय  स्त्री पुरुष " पु रुष ऐसे भी हैं, जो स्त्री से बात करते हुए घबराते हैं, जो जैसी भी  मिल गई उसने जो दे दिया खा लिया। बस उसी के बच्चों  के  होकर रह जाते हैं, मित्र भी बनाते हैं तो हमेशा मर्यादा में ही रहते हैं। कुछ ऐसे हैं जो बदमाशियां तो सारी कर लेते हैं, मगर बीवी को भनक नहीं लगने देते। उसका मूर्ख बनाकर रखते हैं, वे बड़े गर्व से कहती हैं कि हमारे ये तो बड़े सीधे हैं, ऐसे नहीं हैं। उन्हें पता नहीं होता, ये तो उस्ताद हैं, वही मूर्ख है।   पुरुषों की ये तीसरी  नस्ल है, जो शादी से पहले भी इधर उधर कुछ गड़बड़ कर चुकी होती है तो उन्हें ये  आदत होती है ।फिलहाल मेरे बहुत नजदीक परिचय में  तीन स्त्रियाँ विषम परिस्थितियों से जूझ रही हैं। कारण हैं  उनके  पति  के विवाहेत्तर संबंध। एक तो कॉल गर्ल वाला है, एक का दोस्त की बीवी से रिश्ता है। दोस्त की बीमारी में उसकी मदद करने गया, उसे छोड़ बीवी की मदद ज्यादा जरूरी लगी। एक विधवा या तलाकशुदा से दूसरी शादी के चक्कर में है। दोस्त की बीवी वाला 67 वर...

Hastinapur & Sardhana : हस्तिनापुर के दिन बहुरेंगे, सरधना का इतिहास भी होगा मजबूत

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  हस्तिनापुर के दिन बहुरेंगे, सरधना का इतिहास भी होगा मजबूत   महाभारत कालीन हस्तिनापुर को पर्यटन स्थल के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के इरादे प्रबल होते ही नगर सहित आसपास के लोगों की धार्मिक आस्था बढ़ने के आसार हो गए हैं । भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू के अथक प्रयास से हस्तिनापुर में रेशम उद्योग की स्थापना की गई और एक साथ सैकड़ों  हवन व यज्ञ कराए गए, किंतु पांडव पत्नी कुंती पुत्रों की धर्मपत्नी पांचाल नरेश की पुत्री अग्निसेनी द्रोपदी श्रापित हस्तिनापुर को श्राप से मुक्ति के अभाव में उभार नहीं सकें।  जिसके बाद से हस्तिनापुर निरंतर अपने उद्धार की बाट जोह रहा हैं ।   प्रदेश सरकार की एक बार फिर हस्तिनापुर को उभारने की मंशा तेज हो गई है, जिसके लिए गंगा घाट के साथ पर्यटक स्थल बनाए जाने के रूप में मंसूबा तैयार किया जा रहा है ।   जहां एक ओर हस्तिनापुर के दिंन बहुरेंगे, वहीं इटली समकक्ष बेगम समरू की राजधानी वर्तमान में तहसील  सरधना चर्च नगरी भी महाभारत कालीन कुछ अंशों  के कारण महाभारत सर्किट योजना में चमकता नजर आएगा।  बताया जाता ह...

Chief Justice ; अप्रिय विवादों से परे बेहतर फैसलों की उम्मीद

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 अप्रिय विवादों से परे बेहतर फैसलों की उम्मीद छात्र नेता और श्रमजीवी पत्रकार रह चुके 64 वर्षीय नूतलपाटि वेंकट रमण भारत के 48वें प्रधान न्यायाधीश नामित हो गए हैं। अगले माह (24 अप्रैल, 2021) यह तेलुगुभाषी विधिवेत्ता पद संभालेंगे। इनका ताजातरीन फैसला बड़ा जनवादी था। कश्मीर घाटी में इंटरनेट पर लगी पाबंदी को समाप्त करना। नागरिक स्वतंत्रता के प्रति इनकी पक्षधरता मई 1975 से ही मजबूत होती गई। वह जब 18 साल के थे, अविभाजित आंध्र प्रदेश के कृष्णा जिले के अपने गांव पोन्नवरम में एक जनसभा को संबोधित करने के बाद घर लौटे थे और पिता ने उन्हें तत्काल मामा के शहर रवाना कर दिया था। एक अतिरिक्त जोड़ी कपड़े ले जाने को कहा। दस रुपये दिए और बस में बैठा दिया। उसी शाम प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत पर आपातकाल थोपा था। जेल भराई चालू हो गई थी। किसान पिता को भनक लग गई थी कि सत्ता-विरोधी और लोकतंत्र-समर्थक पुत्र को पुलिस शीघ्र ही कैद में डाल देगी। युवा वेंकट रमण को इस बात का गिला था कि यात्रा के लिए मिले दस रुपये कम पड़ गए थे। खैर, कानून की डिग्री लेकर जीविका के लिए दो साल बहुप्रसारित तेलुगु दैनिक ईनाडु  की...

Journalist becomes the Chief Justice of the country : पत्रकार बना देश का प्रधान न्यायाधीश

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  पत्रकार बना देश का प्रधान न्यायाधीश !                       एन वी रमण        छात्र नेता और श्रमजीवी पत्रकार रहा एक किसान का बेटा चौंसठ वर्षीय नूतलपाटि वेंकट रमण भारत का 48वां प्रधान न्यायाधीश नामित हो गया है। अगले माह (24 अप्रैल 2021) यह तेलुगुभाषी विधिवेत्ता सर्वोच्च न्यायालय में नया पद संभालेंगे। इनका ताजातरीन निर्णय बड़ा जनवादी था। कश्मीर घाटी में इन्टरनेट पर से पाबंदियों को समाप्त करना। कारण बताया कि संवाददाता पर दबाव नहीं थोपना चाहिये। नागरिक स्वतंत्रता की इनकी पक्षधरता मई 1975 से ही दृढ़तर होती गयी। तब यह 18—वर्षीय युवा अविभाजित आंध्र—प्रदेश के कृष्णा जिला के अपने गांव पोन्नवरम में एक जनसभा को संबोधित करने के बाद घर आया।  पिता ने उसे तत्काल मामा के शहर रवाना कर दिया। एक अतिरिक्त जोड़ा कपड़ा ले जाने को कहा। दस रुपये दिये। बस में बैठाया। उसी शाम प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत पर आपातकाल थोप दिया था। जेल भरायी चालू हो गई थी। किसान पिता को भनक लग गयी थी कि सत्ता—विरोधी और लोकतंत्र—समर्थक पुत्र को...

Calcium for Sleeping (Video) : नींद के लिए कैल्शियम मात्रा पूरी करें

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  नींद के लिए कैल्शियम मात्रा पूरी करें

West Bengal :; जंग- ए- बर्रे बंगाल

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 जंग—ए—बर्रे बंगाल ! *के. विक्रम राव*         चोटिल ममता बनर्जी बोलीं : ''घायल शेरनी ज्यादा घातक होती है।'' अर्थात वे भाजपा को धमका रहीं हैं कि राज्य विधानसभा चुनाव में खराब नतीजों के लिये वे लोग तैयार रहें। कल (मार्च 15) वे झाल्दा (पुरुलिया) रैली में बोली: ''अगले कुछ दिनों में मेरे पैर के घाव तो ठीक हो ही जायेंगे। पर अब आप सोचिये कि बंगाल में आप लोग अपनी टांगों पर चल पायेंगे?'' (दि हिन्दू दैनिक, 16 मार्च, पृष्ट—10, कालम—एक से चार)। उनके चुनावी उदगार थे : ''नरेन्द्र मोदी निकम्मे हैं। देश नहीं चला सकतें''  अमित शाह पर वे बोलीं : ''यदि गृहमंत्री प्रार्थना करते तो मैं अपने पार्टीजन को उनकी सभा में भेज देती। वह फीकी न रहती।'' ममता बनर्जी बोलीं कि विरोधियों को विश्वास था कि घायल होकर वे चुनाव अभियान से दूर हो जायेंगी। ''मगर वे अब समझ लें कि आखिरी सांस तक, लहू के अंतिम कतरे तक मैं लडूंगी। कदापि नहीं झुकूंगी। भले ही टूट जाऊं।'' तो यह हुयी गर्जना !                 पर ममता दीदी द्वारा दर्द से कराहने पर अमित शाह बोले...

Gandhi'S Dandi March : दांडी मार्च : जब अंग्रेजों को नमक मिर्चेदार लगा था

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 दाण्डी मार्च की सालगिरह जब ब्रिटिश को नमक मिर्चेदार लगा था !! *के. विक्रम राव*           ठीक पचास वर्ष हुये आज से, (12 मार्च 2021)। मेरे पत्रकारी व्रत (अब वृत्ति) का प्रथम दशक था। अहमदाबाद के आश्रम रोड (नवरंगपुरा) पर हमारा दफ्तर (टाइम्स आफ इंडिया) रहा, अभी भी है। साबरमती नदी तट पीछे और गांधी आश्रम दूसरी छोरपर पड़ता है।         गुजरात में मेरी पहली खास ऐतिहासिक रिपोर्टिंग का वह मौका था। बापू की दाण्डी मार्च। (12 मार्च 1930)की चालीसवीं जयंती थी। ब्रिटिश फिल्म निर्माता रिचर्ड एटेनबरो ने अपनी कृति ''गांधी'' ने इस सत्याग्रह की घटना का अत्यंत मार्मिक चित्रण किया है। यह फिल्म 1982 में प्रदर्शित हुयी थी।         तभी बस चन्द माह पूर्व (1968) मुंबई मुख्यालय से नये संस्करण हेतु मेरा तबादला अहमदाबाद कार्यालय किया गया था। मेरा भाग्य था कि वह गांधी शताब्दी वर्ष था। पत्रकारिता का नया दशक शुरु करने का मुझे अवसर मिला था। ठीक दो वर्ष पूर्व (फरवरी 1928) चालीस किलोमीटर दूर बारडोली में वल्लभभाई पटेल का किसान सत्याग्रह विपुल सफलता लिये ख्...

Nari Shakti: एक सच, जिससे पुरुष अनजान

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एक सच, जिससे पुरुष अनजान डॉ. पुष्प लता  एक सच जो पुरुष नहीं जानता जब स्त्री बच्चे को जन्म देती है तो उसकी देह लगभग निर्जीव हो जाती है वह बैठने की हालत में नॉर्मल में भी नहीं होती ऑपरेशन में तो और भी मुश्किल  उसी वक्त उसके ऊपर एक शिशु की जिम्मेदारी उसे उसे बैठकर ही दूध पिलाना होता है  वरना उसके कान में जा सकता है।वह भी हर वक्त क्योंकि शिशु एक घण्टे में दूध पीता है एक आधा घण्टा डकार दिलाने में वरना उसकी सांस की नली में दूध जा सकता है। उसकी बड़ी सुई के छेद जितनी नाक दबकर  दम घुट सकता है क्योंकि मुँह से सांस वह दूध पीते  हुए नहीं ले सकता । प्रकृति ने माँ का दूध ऐसा बनाया वह हर वक्त भी पिये नुकसान नहीं करता।आदमी का बच्चा सबसे कमजोर होता है ।वह दो घूँट पिए सो गया ऐसे चलता है।वह लेटने को होती है वह दोबारा चीखने लगता है।अधिकतर शिशु असुरक्षित महसूस करते हैं मुँह में दूध लेकर  ही सोते  हैं बिस्तर पर लेटाते  ही चीखने लगते हैं । वह माँ से दूध से जुड़कर सुरक्षित महसूस करते हैं मर्जी में आया पिया मर्जी में आया सो गया ।मुँह में लॉक  लगा लेता  है जिससे अल...

Women's day: आठ हस्तियों को मिला महिला शक्ति सम्मान-2021

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 महिला शक्ति सम्मान-2021 गाजियाबाद  उत्तरपदेश की प्रसिद्ध संस्था  "प्रणवाक्षर  साहित्यिक, समाजिक, सांस्कृतिक संघ "ने महिला दिवस पर आठ विशेष  स्त्री शक्तियों को सम्मानित किया । संस्था की  लगभग तीस वर्ष पुरानी सक्रिय    विंग "संयुक्त ग्रामीण विकास समिति" गांवों में सामाजिक सेवा के कार्यक्रम करती रहती  है। कोरोना में भी , समय- समय पर गरीबों  को भोजन ,मास्क, साबुन ,सेनेटाइजर ,कैप ,राशन आदि  वितरित करवाया , आज तक कभी कोई सरकारी लाभ सहयोग  नहीं लिया यह सब वह स्वयं ही ऑर्गनाइज करती है । क्योंकि कोरोना में  दर्शक आने में कतराते  हैं इसलिए  महिला दिवस को आठ विशेष  स्त्री शक्तियों  को ऑनलाइन  सम्मानित  किया है  ।साहित्यकार  डॉ वर्षा चौबे  ,डॉ प्रीति खरे  भोपाल से वरिष्ठ साहित्यकार हैं ।उन्हें अनेक सरकारी गैर सरकारी सम्मानों से सम्मानित किया गया है ।शैल अग्रवाल इंग्लैंड से वरिष्ठ साहित्यकार हैं ,सुषमा गजापुरे ,    "साहित्य सुषमा" और "बचपन "की संपादक हैं  नवभारत की कॉलमि...

‍BATLA HOUSE : बाटला हाउस का दर्द

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बाटला हाउस का दर्द                                                (लाइब्रेरी फोटो) के. विक्रम राव          बाटला हाउस केस (2008) में अगले सोमवार (15 मार्च 2021) को दिल्ली के अतिरिक्त न्यायाधीश माननीय संदीप यादव संभवत: सरकारी वकील मियां एटी अंसारी की मांग मानकर हत्यारे मोहम्मद आरिज खान को फांसी की सजा सुना दें। आखिर इसी आजमगढ़वासी सुन्नी कातिल ने दिल्ली पुलिस इंस्पेक्टर (अलमोड़ा में जन्मे) मोहनचन्द्र शर्मा की निर्मम हत्या की थी। मगर इस वीभत्स सियासी प्रकरण का पटाक्षेप मात्र इतने से नहीं हो जायेगा। असली दोषियों को जन—अदालत के कटघरे में खड़ा करना होगा। इनमें शामिल हैं तमाम राजनेता (राजनेत्री भी), इस्लामी तंजीमें, मानवाधिकार के कथित डुग्गी पीटनवालें,  गंगाजमुनी ढकोसलेबाज, मुसलमान वोट बैंक के ठेकेदार तथा अन्य लोग जो शहीद इंस्पेक्टर शर्मा की विधवा माया शर्मा को मुआवजा देने की आलोचना करते रहें।         इंस्पेक्टर शर्मा की पत्न...

Book review : फॉर्मूला 44 की लघु कथाएं

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 " विविध विषयों को समेटे हुए बहुरंगी पुष्प गुच्छ है फार्मूला 44  की लघु कथाएं ।"     डाक्टर पुष्पलता अधिवक्ता हिंदी साहित्य के क्षेत्र में एक सुपरिचित नाम हैं।वे एक प्रसिद्ध साहित्यकार हैं और अनेक  सरकारी- गैर सरकारी उच्च स्तरीय सम्मानों से सम्मानित हो चुकी हैं। उनका लेखन साहित्य की अनेक विधाओं में है। उनके लेखन में निरंतरता है और इस कारण उनकी एक पत्रकार जैसी खोजी दृष्टि समाज में घटित सभी प्रकार की घटनाओं को अपने लेखन का विषय बना लेती है। उनकी अब तक लगभग 21 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें अनेक गीत संग्रह,तीन खण्ड काव्य, उपन्यास,बालगीत,बाल उपन्यास , सूफी टप्पे ,कहानी संग्रह  व  लघु कहानियों का संग्रह हैं। इस वर्ष उनकी नव प्रकाशित लघु कहानियों का संग्रह  " फार्मूला -44 "मेरे हाथ में है। सर्व प्रथम कहानी संग्रह का शीर्षक ही पाठक को आकर्षित करता है पढ़ने के लिए।इस संग्रह में 41 कहानियाँ हैं जिनके विषय अपने आस-पास घटित सामान्य घटनाएं हैं जो प्रभावित करती हैं। कुछ कहानियों में संदेश है तो कुछ में साहित्य जगत में आपसी होड़ व आपाधापी का सजीव चित्रण ह...