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New Delhi Central Vista : जब मक्का में मस्जिदों को हाजियों की सुविधा के लिए तोड़ा गया

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 विकास में वक्फ का रोड़ा नागवार होगा!           जब मक्का में मस्जिदों को हाजियों की सुविधा के ल‌िए तोड़ा गया न्या यिक निर्णय (हाईकोर्ट : 1 जून 2021) के बाद राजधानी के ''सेन्ट्रल विस्ता'' योजना का निर्माण कार्य निर्बाध रूप से चलेगा। किंतु दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष और ओखला क्षेत्र से आम आदमी पार्टी के विधायक मियां मोहम्मद अमानतुल्ला खान ने (4 जून 2021) प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आग्रह किया कि इस नई राजधानी निर्माण क्षेत्र में आनेवाली मस्जिदों को बनी रहने दिया जाए। उन्होंने लिखा कि इंडिया गेट के पास के जलाशय के समीपवाली जाब्तागंज मस्जिद न तोड़ी जाए। इसी प्रकार कृषि भवन तथा राष्ट्रपति भवन की मस्जिद भी सुरक्षित रहें। उनकी लिस्ट में सुनहरी बाग रोड, रेड क्रास रोड की (संसद मार्ग), जामा मस्जिद (शाहजहांवाला नहीं) आदि भी शामिल हैं। ध्यान रहें कि ये सब वक्फ की संपत्ति नहीं हैं। एक दफा हरियाणा के चन्द जाट किसानों ने रायसीना हिल्स पर अपना दावा ठोका था। वे राष्ट्रपति को बेदखल कर खुद रहना चाहते थे (20 फरवरी 2017, दि हिन्दू )। इस जाट किसान महाबीर का कहना था क...

Modi & Hanuman ji : जब मोदी बने हनुमान

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 जब मोदी बने हनुमान... भारतमित्र, किन्तु अतीव जुगुप्सित ''मसीहा''        इसके पहले कि आप आगे पढ़कर इस राजनेता को पूर्णतया कुत्सित और सिर्फ घृणास्पद मान लें, उससे जुड़ी तीन नीक बातों का उल्लेख पहले कर दूं। जब नरेन्द्र मोदी ने ब्राजील गणराज्य के इस छाछठ—वर्षीय 38वें राष्ट्रपति तथा भारतमित्र जायूर मसीहा बोल्सोनारो को उनके बीस करोड़ नागरिकों हेतु कोविड—19 कोवैक्सीन खुराक भेजी थी तो उन्होंने आभार में कहा था कि : ''हनुमान संजीवनी लाये थे, रामानुज को बचाया था। वैसे ही कोविड—19 से निबटने हेतु मोदीजी ने हमें संजीवनी भेजी है (22 जनवरी 2021)।'' एक उपकार ब्राजील ने किया था कि भारत के वित्तीय उत्कर्ष के लिये चीन, रुस तथा दक्षिण अफ्रीका के साथ परस्पर सहयोग के तीन गठबंधन रचे। इसे ''ब्रिक्स, आईबीएस तथा बीएएसआईसी'' नाम दिया। इससे भारत को विकास के अपार अवसर मिले।        अगली ​और अन्तिम कृपा की है कि गत गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2020)  पर वे नयी दिल्ली में विशेष अतिथि थे। दक्षिण एशिया और लातिन अमेरिका के इन दोनों राष्ट्रों की डेढ़ अरब जनता के दो नुमाइन्दे साथ...

Arya Samaj & UNITED PUNJAB (3) : आर्य समाज ने महिलाओं को बराबर माना

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आर्य समाज ने महिलाओं को बराबर माना  स्वा मी दयानंद सरस्वती ने अपनी संपूर्ण कार्यों में सर्वोपरि महिलाओं की शिक्षा को रखा। अपने बाल्यकाल में ही अपनी अत्यंत प्रिय बहन का वियोग उन्होंने सहा था। उसकी मृत्यु के बाद वे कई दिन तक शोक ग्रस्त तथा उद्विग्न रहे। अपनी माता के कहने पर ही उस मूलशंकर ने शिवरात्रि के अवसर पर पूरी रात जाग कर शिव  प्राप्ति का संकल्प लिया था।         स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज की स्थापना के बाद तो महिलाओं के सशक्तिकरण ,उद्धार एवं उन्हें शिक्षित करने का अनुप म कार्य किया। उनसे पूर्व ब्राह्मण समाज में यह धारणा थी कि, *स्त्री शूद्रौ नाधीयातामिति श्रुते:* अर्थात स्त्री और शूद्र न पढ़ें यह श्रुति है । परंतु दयानंद ने इसके उत्तर में कहा कि सभी स्त्री-पुरुष अर्थात मनुष्य मात्र को पढ़ने का अधिकार है। उन्होंने उन पौराणिक ग्रंथों की भर्त्सना की  जिसमें महिलाओं सहित अन्य पिछड़े दलित वर्गों को शिक्षा के अधिकार से वंचित किया गया था। अपने पक्ष के समर्थन में वेद के इस मंत्र को, ' *यथेमां वाच कल्याणीमावदानी जनेभ्य:* ब्रह्मराजन्याभ्या शूद्राय चार...

BSP IN UP : यूपी: बसपा हाशिये की ओर

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   यूपी: बसपा हाशिये की ओर   यू पी में अगल वर्ष 2022 में विधानसभा चुनाव के लिए राजनीतिक गलियारे में नेताओं ने राजनीतिक पंडितों के जरिए अपना भविष्य बनाने के ल‌िए कुंडली देखना शुरू कर दिया है और आ रही ग्रहों की बाधाओं को दूर करने के ल‌िए उपाय करने की ओर बढ़ने लगे हैं। भाजपा इन दिनों किसी भी नुकसान से बचने के लिए कदम फूंक-फूंक कर उठा रही है, वहीं बसपा कील-कांटे निकालकर अपने को मजबूती के साथ खड़ा करने की कोशिश कर रही है। वह अलग बात है कि वह 19 विधायकों से सात पर पहुंच गई है और अपने कई निष्ठावान नेताओं और कार्यकर्तांओं को बाहर का रास्ता दिखा चुकी है। इस  मोर्चे में ब्राह्मणवादी नेता सतीश मिश्रा निरंतर मजबूत हो रहे हैं। लगता है, यह नेताजी ही किसी विशेष योजना के तहत इस पार्टी से दलितों, पिछड़ों तथा मुस्लिम नेताओं को बाहर निकलवाकर  न जाने किस वर्ग की पार्टी बनाना चाहते हैं। इससे यह भी लगता है कि यह पार्टी अपने मूल मिशन के बजाय केवल दो लक्ष्य बनाए हुए हैं पैसा और सत्ता। लोगों को लगता है कि बहनजी बोल्ड निर्णय लेती हैं, लेकिन वे निर्णय क्यों और कैसे और कितने पार्टी के...

Arya Samaj and Mahrishi Dayanand : वर्ण व्यवस्था और छुआछात पर चोट की महर्षि दयानंद ने

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  वर्ण व्यवस्था और छुआछूत पर चोट की महर्षि दयानंद ने म हर्षि दयानंद सरस्वती का सबसे ज्यादा प्रभाव संयुक्त पंजाब (पंजाब_पाकिस्तान, पंजाब-भारत, वर्तमान हरियाणा) के साथ-साथ पश्चिम उत्तर प्रदेश, दिल्ली तथा दक्षिणी राजस्थान में पड़ा। इसका कारण यह भी हो सकता है कि ये सभी इलाके कृषि प्रधान थे तथा इससे जुड़ी तमाम किसान जातियां एक दूसरे पर निर्भर थीं। मेहनती लोगों के पराक्रम ने भी महर्षि दयानंद के विचारों को उत्साहित किया।      स्वामी दयानंद सरस्वती जन्मना ब्राह्मण, वर्ण एवं जाति से थे।  इसके विपरीत वे अस्पृश्यता, भेदभाव तथा जन्मजात वर्ण व्यवस्था के विरुद्ध थे और जब वे अपने वक्तव्यों में कहते कि अस्पृश्यता वेद विरुद्ध है, महिलाओं को भी पुरुषों के समान बराबर के अधिकार हैं तथा किसी व्यक्ति के वर्ण को उसके जन्म से नहीं, उसके गुण, कर्म, स्वभाव से जाना जाएगा तो इस क्षेत्र की तमाम श्रमिक जातियां जिसमें विशेष तौर पर जाट, गुर्जर, रोड, राजपूत ,सैनी व दलित जातियां थी, वे उनके पीछे लामबंद होने लगीं।    जमींदारों ने भी...

George Fernandes : ...तो जार्ज फर्नांडिस की लाश तक नहीं मिलती

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 3 जून 2021 जार्ज की 91वीं वर्षगांठ पर ...तो जार्ज फर्नांडिस की लाश तक नहीं मिलती   आ ज (तीन जून 2021) बागी लोहियावादी जार्ज मैथ्यू फर्नाण्डिस 91 वर्ष के होते। जिस युवा समाजवादी द्वारा बंद के एक ऐलान पर सदागतिमान, करोड़ की आबादीवाली मुंबई सुन्न पड़ जाती थी। जिस मजदूर पुरोधा के एक संकेत पर देश में रेल का चक्का जाम हो जाता था। जिस सत्तर वर्षीय पलटन मंत्री ने विश्व की उच्चतम रणभूमि कारगिल की अठारह बार यात्रा कर मियां मोहम्मद परवेज मुर्शरफ को पटकनी दी थी। सरकारें बनाने-उलटने का दंभ भरनेवाले कार्पोरेट बांकों को उनके सम्मेलन में ही जिस उद्योग मंत्री ने तानाशाह (इमर्जेंसी में) के सामने हड़बड़ाते हुए चूहे की संज्ञा दी, वही पुरूष सुधबुध खोए दक्षिण दिल्ली के पंचशील पार्क में क्लांत जीवन बसर करते चिरनिद्रा में सो गया था। जार्ज को देशभर में फैले उनके मित्र आज नम आँखों से याद करते हैं। विशेषकर श्रमिक नेता विजय नारायण (काशीवासी) और साहित्यकार कमलेश शुक्ल दोनों मेरे साथ तिहाड़ जेल में बडौदा डायनामाइट केस में जार्ज के 24 सहअभियुक्तों में रहे। अपने बावन वर्षों के सामीप्य पर...

Sardar Bhagat Singh : तू न रोना कि तू है, भगत सिंह की माँ

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तू न रोना कि तू है, भगत सिंह की माँ (एक जून स्मृति दिवस)  स न् 1965 में शहीद ए आज़म सरदार भगत सिंह व उनके साथियों पर पहली बार एक फ़िल्म "शहीद" सिनेजगत में आई। यह वह दौर था जब देश की आज़ादी को बचाने व उसकी रक्षा करने का जज्बा पूरे जोरों पर था और उनमें था अग्रणी सरताज हीरो भगत सिंह। आर्य समाज के भजनीक शहरों, कस्बों व गांवों के चौराहों पर सरदर भगत सिंह के गीत, भजनों की लय पर ढोलकी, बाजे व चिमटों के संगीत पर सुनाया करते, जिनको सुनने के लिए सेंकड़ों  की भीड़ एकत्रित होती थी। मेरा परिवार  स्वतंत्रता संग्राम, कांग्रेस व आर्य समाज से जुड़ा हुआ था, इसलिए सभी को शाम ढलते ही जल्दी खाना बनाने व खाने के बाद इन कार्यक्रमों में जाने का जुनून होता था। सरदार भगत सिंह के परिवार की आर्य समाज से जुड़ाव गाथा सबसे ज्यादा प्रभावित करती कि किस प्रकार उनके दादा सरदार अर्जुन सिंह ने आर्य समाज के प्रवर्तक  स्वामी दयानंद सरस्वती से दीक्षा लेकर समाज सुधार का काम किया  था। उनके पिता सरदार किशन सिंह व चाचा सरदार अजीत सिंह ने देश की आज़ादी के लिए सजाए काटी। भगत सिंह की मां तथा बहनों की त...

SunderLal Bahuguna : गांधी मार्ग के पथिक थे सुंदरलाल बहुगुणा

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गांधी मार्ग के पथिक थे सुंदरलाल बहुगुणा श्री सुन्दर लाल बहुगुणा स्मृति व्याख्यान की एक रपट गां धीवादी स्वतंत्रता सेनानी, चिपको आंदोलन के प्रवर्तक तथा पर्यावरणविद् पद्मविभूषण श्री सुंदरलाल जी बहुगुणा की पावन स्मृति में नित्यनूतन वार्ता की ओर से एक स्मृति व्याख्यान का आयोजन दिनांक 30 मई को वेबिनार के जरिए किया गया। स्मृति व्याख्यान के प्रारंभ में अपने स्वागत वक्तव्य में नित्यनूतन के मुख्य संपादक राम मोहन राय ने पत्रिका का परिचय दिया एवं श्री सुंदरलाल बहुगुणा, उनकी पत्नी श्रीमती विमला देवी बहुगुणा के स्वर्गीय निर्मला देशपांडे के बीच गहरे अंतरंग संबंधों को रखा।   25 अक्टूबर 2020 को उन्हें भी इस महान दंपत्ति  के दर्शन करने का सौभाग्य उनके देहरादून स्थित निवास स्थान पर जाकर मिला। उन्होंने उनका एक इंटरव्यू भी लिया तथा उनसे भेंट के संस्मरण को एक आलेख में भी प्रकाशित किया। उन्होंने कहा कि वे सौभाग्यशाली हैं कि उन्हें  बहुगुणा दंपत्ति का आशीर्वाद व स्नेह मिला।     वेबिनार में श्री सुंदरलाल बहुगुणा के सुपुत्र तथा वरिष्ठ पत्रकार व समाल...

Lakshadweep : लक्षद्वीप पर बवंडर क्यों उठा ?

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लक्षद्वीप पर बवंडर क्यों उठा ?         नै सर्गिक द्वीपसमूह लक्षद्वीप को पड़ोसी केरल की मुस्लिम लीग ''दक्षिण का कश्मीर'' बनाने हेतु आतुर है। गत दिनों से यह प्राकृतिक सौंदर्यवाला भूभाग सुर्खियों में छाया है। केरल की सत्तासीन वामपंथी मोर्चा के ''टुकड़े—टुकड़े गैंग'' की नीति के कारण माकपा अपने शत्रुदल मुस्लिम लीग से यारी में हिचकती नहीं दिख रही है। यूं मुस्लिम लीग तो विपक्षी कांग्रेस—नीत संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा की घटक है। उसी की मदद से मुस्लिम—बहुल वायनाड से राहुल गांधी चार लाख वोटों से लोकसभा के लिये जीते थे। कम्युनिस्ट पार्टी के पीपी सुनीर को हराया था।          लक्षद्वीप छत्तीस टापुओं वाला, मात्र बत्तीस वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल का, पैंसठ हजार आबादी का समूह है। इस पिछड़े, उपेक्षित, मगर अत्यधिक सामरिक महत्व के जजीरों पर कम्युनिस्ट चीन और इस्लामी पाकिस्तान की गिद्धदृष्टि वर्षों से लगी है। मसलन अगस्त 1947 की घटना याद कर लें। मुस्लिम—बहुल लक्षद्वीप को कब्जियाने हेतु नवनिर्मित इस्लामी पाकिस्तान के प्रधानमंत्री मियां लियाकत अली खान ने अपनी नौसे...

Dr. Ambedkar : डॉक्टर अंबेडकर की 450 फीट की मूर्ति लगेगी

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डॉ. अंबेडकर  की 450 फीट ऊंची मूर्ति लगेगी

Old is gold (Song video) : कहीं दीप जले, कहीं दिल

 कहीं दीप जले, कहीं दिल

Pt. Jawaharlal Nehru: नेहरू के आखिरी कुछ दिन

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नेहरु के आखिरी कुछ दिन         अ पने निधन के ठीक पांच दिन पूर्व जवाहरलाल नेहरु ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी| लम्बे सार्वजानिक जीवन की अंतिम (22 मई 1964) थी| उस शुक्रवार को उनकी काबीना के सूचना, प्रसारण एवं संसदीय कार्य मंत्री डॉ. सत्यनारायण सिन्हा काफी आकुल थे| प्रधान मंत्री का स्वास्थ्य क्लांत था| फालिज का अंदेशा था| सभागार में जमा करीब दो सौ संवाददाता कई प्रश्न पूछने को उतावले थे| पहला प्रश्न कश्मीर पर था| प्रधान मंत्री ने ऐलान किया कि जेल से रिहा किये गए शेख मोहम्मद अब्दुल्ला “परसों इस्लामबाद जा रहे हैं| मार्शल मोहम्मद अयूब खान से वार्ता करेंगे|” फिर कुछ अन्य विषयों पर भी सवाल हुए| उनमें अंतिम था कि : “पण्डित जी, आपने रिटायरमेंट के बारे में क्या सोचा है?” उत्तर सधा हुआ था : “जब भी यह प्रश्न पूछा जाता है, मैं रिटायरमेंट की सोचने लगता हूँ !” अगला जुड़ा हुआ प्रश्न था: “आराम करने कहीं पहाड़ पर जा रहे हैं क्या ?” नेहरु का जवाब था: “कल देहरादून जाऊंगा|” मगर गढ़वाल हिमालय से वे शीघ्र दिल्ली लौट आये| फिर 27 मई की प्रातः 4:30 बजे उनके  ह्रदय की महाधमनी (Aorta) फट गई| कठिनाई...

Happy Budh Purnima

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 Happy Budh Purnima On this auspicious day, let us pray for love, peace and harmony for all the entire world.  May this day herald a new phase of happiness, contentment, good health and tranquillity for all of us.  Happy Buddha Purnima.... .

BUDH PURNIMA (#Video) : भगवान बुद्ध ने बताया दुख का कारण और उसका निवारण

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भगवान बुद्ध ने बताया दुख का कारण और उसका निवारण    बुद्ध पूर्णिमा : 26 मई 2021 दिन : बुद्धवार  मुख्य बातें बौद्ध धर्म के लोगों के लिए महत्वपूर्ण है बुद्ध पूर्णिमा का पर्व, जिसे वैशाख पूर्णिमा भी कहते हैं। बुद्ध पूर्णिमा यानी वैशाख पूर्णिमा पर हुआ था गौतम बुद्ध का जन्म, इसी दिन हुई ज्ञान प्राप्ति और इसी दिन हुआ महापरिनिर्वाण। हिंदुओं का मानना, भगवान विष्णु के नौवें अवतार माने जाते हैं बगवान गौतम बुद्ध. बौ द्ध धर्म के अनुयायियों के साथ ही पूरी दुनिया के लिए बुद्ध पूर्णिमा बेहद खास पर्व है। इस दिन भगवान गौतम बुद्ध का जन्म हुआ था। इसी दिन उनको ज्ञान प्राप्त हुआ और इसी दिन उनका महापरिनिर्वाण दिवस था। बुद्ध पूर्णिमा का पर्व बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बहुत महत्व रखता है। यह पर्व बौद्ध धर्म का प्रमुख त्योहार है। हर वर्ष बुद्ध पूर्णिमा वैशाख के महीने में मनाई जाती है। भगवान गौतम बुद्ध के महानिर्वाण के वजह से भी यह दिन इतिहास और आस्था के हिसाब से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में बौद्ध धर्म के अनुयायी ही नहीं सभी धर्मों के लोग श्रद्...

ARYA SAMAJ : संसार का उपकार करना आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य : दयानंद सरस्वती

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संसार का उपकार करना आर्य समाज का मुख्य उद्देश्य : दयानंद सरस्वती आर्य समाज की स्थापना महर्षि दयानंद सरस्वती ने सन 1875 में की थी। इसके लिए सर्वप्रथम उन्होंने इसके नियमों की रचना की और बाद में स्थानादि की व्यवस्था के प्रश्न को देखा। स्वामी जी ने आर्य समाज के नियमों की रचना लाहौर में अपने एक मुस्लिम मित्र के निवास स्थान पर रहकर की थी। पहले अनेक नियम थे। बाद में उन्हें व्यवस्थित करके 10 नियमों में संजोया गया। जिसके छठे नियम में उन्होंने लिखा, 'संसार का उपकार करना इस समाज का मुख्य उद्देश्य है।'आर्य समाज के दूसरे नियम में स्वामी जी ने कहा कि ईश्वर सच्चिदानंद स्वरूप निराकार    आर्य समाज की स्थापना महर्षि दयानंद सरस्वती ने सन 1875 में की थी। इसके लिए सर्वप्रथम उन्होंने इसके नियमों की रचना की और बाद में स्थानादि की व्यवस्था के प्रश्न को देखा। स्वामी जी ने आर्य समाज के नियमों की रचना लाहौर में अपने एक मुस्लिम मित्र के निवास स्थान पर रहकर की थी ।पहले अनेक नियम थे । बाद में उन्हें व्यवस्थित करके 10 नियमों में संजोया गया। जिसके छठे नियम में उन्होंने लिखा, 'संसार का उपकार करना इस समाज क...

Israel : भगत सिंह फिर जन्मे, मगर पड़ोस के घर में !

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 भगत सिंह फिर जन्मे, मगर पड़ोस के घर में !        देश बनता है राष्ट्रनायकों के उत्सर्ग से। संघर्षशील इस्राइल इस तथ्य का जीवंत प्रमाण है। आठ अरब देशों, सभी शत्रु, की 42 करोड़ आबादी का मुकाबला सात दशकों से 90 लाख जनसंख्यावाला इस्राइल अकेला कर रहा है। तीन युद्ध लड़ा और सभी जीता भी।         इस्राइल में हर 18 वर्ष से ऊपर का किशोर अनिवार्य तौर पर दो वर्षों तक सेना में​ शिक्षण पाता है। सिवाय दिव्यांग और धर्म कार्य में रत लोगों के। युवतियों के लिये भी सैन्य सेवा अनिवार्य है। प्रधानमंत्री बैंजामिन नेतनयाहू तो सेना में प्रशिक्षित रहे और युद्धरत भी। उनके दो बेटे हैं। बड़ा तीस—वर्षीय येयर नेतनयाहू फौजी सेवा कर, अब अंतर्राष्ट्रीय विषय पढ़ा रहा है। अब उसका अनुज छब्बीस—वर्षीय एवरिल भी सेना में भर्ती हुआ। वह सेना कम्बेट विंग (लड़ाकू बटालियन) में भर्ती हुआ। हालांकि प्रधानमंत्री के पुत्र को कम खतरनाक टुकड़ी में रखने की पेशकश हुयी थी। मगर ए​वरिल ने स्पष्ट किया कि वह अपने पिता तथा अग्रज की भांति सार्वजनिक जीवन में नहीं जायेगा। राजनीति से उसे घृणा है। वह इसे भ्रष...