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बढ़ती बेरोजगारी में कांग्रेस की "न्याय" योजना बड़ी राहत दे सकती है।
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मैं ऐसा चौकीदार कतई नहीं बनना चाहता हूं। #Election2019

JOURNALISM : गुलामी की ओर पत्रकारिता

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------------------------------ मुबाहिसा : आर.के. मौर्य ------------------------------ मीडिया घरानों की करोड़ों-करोड़ों की डील हो चुकी है। निष्पक्षता बिक चुकी है। पत्रकारिता गुलाम हो चुकी है। देख, सुन, पढ़कर यकीन मत करना। खुद तोल-मोलकर ही सच तय करना। इस व्यावसायिक युग में लोकतंत्र को भी बाजारीकरण का घुन लग गया है। "जो दिखता है, वो बिकता है" की मार्केटिंग रणनीति पर लोकतंत्र को पूंजीपतियों द्वारा कब्जा कर देश की सत्ता को हथियाने का काम किया जा रहा है। अब नहीं समझे तो फिर "ईस्ट इंडिया कंपनी" की तरह ही देश की सत्ता कुछ पूंजीपतियों के कब्जे में जाने से कोई नहीं रोक पाएगा। कंपनियों का काम जनसेवा नहीं मुनाफा कमाने के लिए जनता का खुला शोषण करना होता है। इसका प्रभाव देश में दिखने लगा है। जागो मतदाता जागो! जात-पात को मिटाओ, नफरत को ठिकाने लगाओ। लोकतंत्र को जिताओ, पूंजीपतियों को हराओ। मतदान जरूर करें! #Election2019 साभार: आर. के.मौर्य, वरिष्ठ पत्रकार
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आप क्या सोचते हैं ?

पत्रकार प्रशांत की शादी

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कानपुर : दूल्हा बने पत्रकार प्रशांत के साथ।

गैरजिम्मेदार मीडिया

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मुंबई में आतंकी हमले 26/11 में जो गलती हमारी मीडिया ने की थी, उसी की पुनरावृत्ति आज पाकिस्तान में घुसकर की गई सफल एयर स्ट्राइक-26/2 की कवरेज के नाम पर एयरफोर्स की रणनीतिक सूचनाओं को सूत्रों का हवाला देकर प्रसारित किया जा रहा है जो हमारे लिए नुकसानदायक और दुश्मनों के लिए लाभकारी हो सकता है। आखिर कब हमारे मीडिया के साथी जिम्मेदार और परिपक्व पत्रकार होने का परिचय दे पाएंगे। हमें समझना होगा, राष्ट्र के आगे सब गौण है।
हर एक की अब तो आवाज निकलनी चाहिए। बात नहीं अब तो पाक पर बमों की बारिश होनी चाहिए। जुमलों के भाषण बंद करो। रोक दो जलसे और जश्न मनाने। अब पहले पाकिस्तान का हिसाब साफ हो जाना चाहिए।।
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कानपुर: पुलवामा हमले में शहीदों को श्रद्धांजलि रक्तदान महादान।
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सूर्योदय होता है जहॉ  को चमकाने के लिए,  सूर्यास्त होता है सुबह और नई उम्मीद के लिए। बस शरीर अस्त हुआ है, ये तो नामवर है चमकता रहेगा सूर्य की मानिंद।। -राजेन्द्र मौर्य                    

मुबाहिसा : राजेन्द्र मौर्य : जी ग्रुप के सुभाष चंद्रा भी विजय माल्या की राह पर

मुबाहिसा : राजेन्द्र मौर्य राहुल के साथ प्रियंका गांधी  राहुल गांधी के राजनीति में सक्रिय होने के 15 वर्ष बाद प्रियंका गांधी की विधिवत एंट्री ऐसे अवसर पर हुई है जब सोनिया गांधी सक्रिय राजनीति से धीरे-धीरे अलग होती जा रही हैं। ऐसे में माना यही जा सकता है कि प्रियंका गांधी जहां राहुल गांधी की सहयोगी बनेंगी वहीं, वह अपनी मां सोनिया गांधी की रिक्तता को भरने का काम भी करेंगी। कुछ लोग उनको इंदिरा गांधी के रूप में देख रहे हैं। इसमें साफ तौर पर समझ लेना चाहिए कि इंदिरा गांधी एक इतिहास हो चुकी हैं। मौजूदा पीढ़ी पर इंदिरा गांधी की कोई छाप नहीं दिखती है। ऐसे में इंदिरा गांधी के नाम,  उनकी छवि को लेकर प्रियंका गांधी को कोई बहुत बड़ा लाभ मिलेगा, इसकी बहुत कम गुंजाइश दिखती हैं। हां, प्रियंका गांधी की जो अपनी मिलनसार कार्यशैली है उससे यदि उन्होेंने राहुल गांधी तरह ही अपने को आम जनमानस से जोड़कर काम किया तो उसका भरपूर लाभ उन्हें मिलेगा और भारत में महिलाओं में भी वह अपनी एक अच्छी पकड़ बनाने में कामयाब हो जाएंगी। वह कांग्रेस के लिए कितना वोट बटोरने में कामयाब होंगी, इसको लेकर...

गांव में मां का आंचल

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"गांव में मां का आंचल"           राजेन्द्र मौर्य गांव में घर का चौबारा, खुला आसमां खिली धूप, हर ओर खुशी, गम का न दूर तक कोई ठिकाना । चेहरों पर हंंसी की लालिमा, देखते ही उछल रहे बच्चे ।। मेहमान आया है, खुशियों का खजाना लाया है। देख मां अपने बेटे को खुशी के आंसू बहाने लगती है। क्या तुझको कभी मां-बाप की याद नहीं आती है।। हम तो दिन में हर क्षण तुझे याद करते हैं। तेरा कैसा दिल, जो मां-बाप को कभी याद नहीं करता है। बेटा बोला, फुर्सत नहीं, बस हर वक्त काम की फिक्र रहती है।। हर रोज सोचता हूं अब रोजाना करूंगा मां-बाप से बात। पूछूंगा उनका हालचाल, लेकिन काम से नहीं होती फुर्सत। सुबह सूरज उगता जरूर घर की छत से देखता हूं।। शाम को  घर की छत से सूरज छिपते देखे एक जमाना हो गया। गांव मां-बाप की छांव में यही तमन्ना लेकर आया हूं। जब तक हूं रोज सुबह-शाम घर के चौबारे से देखूंगा सूरज को। मां के हाथ से कच्चे चूल्हे पर बनी रोटी खाऊंगा ।  चाय पिऊंगा गुड़ क...

चुनावी बिसात पर मोदी सरकार से मात खा गया विपक्ष

आर्थिक आधार पर आरक्षण ः संविधान की आत्मा पर प्रहार मुबाहिसा : राजेन्द्र मौर्य बिना होमवर्क के नोटबंदी और जीएसटी के बाद अब आर्थिक आधार पर आरक्षण के लिए संविधान में संशोधन के बिल को पास कराने से साफ हो गया है कि पहले अटल बिहारी वाजपेयी और अब मोदी सरकार के जरिए आरएसएस अपने छुपे एजेंडे के तहत संविधान की आत्मा पर कुठाराघात करना चाहती है जिसकी शुरूआत अब हो चुकी है। संविधान में आर्थिक आधार पर आरक्षण की कोई गुंजाइश नहीं है। संविधान में उन वर्गों और समूहों के लिए बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर ने आरक्षण का प्रावधान किया था जो जातीय  आधार पर दबाए और कुचले गए। इन वर्गों को आरक्षण के जरिए समान दर्जा देने की कवायद आरक्षण है लेकिन अब आरएसएस ने संविधान की आत्मा को मारने की तैयारी कर ली है, जिसकी शुरूआत आर्थिक आधार पर  आरक्षण के जरिए हो चुकी है। इसमें  चुनावी बिसात पर मोदी सरकार ने बहुत ही सदी हुई चाल से पूरे विपक्ष को भी मात दे दी है। इसका नतीजा हालांकि कुछ अर्से बाद मोदी सरकार के अन्य फैसलों की तरह ही जुमलेबाजी साबित होना है चूंकि जहां मोदी सरकार ने पूरे विपक्ष...

लोकसभा चुनाव-2019 : भ्रम का जाल

लोकसभा चुनाव-2019 : भ्रम का जाल     मुबाहिसा : राजेन्द्र मौर्य          2 018 समाप्त होते-होते एक साफ संदेश दे गया है कि 2012 में गुजरात जीत के साथ विजय रथ पर सवार हुए नरेंद्र मोदी का जादू अब समाप्त हो रहा है। देश में वोटों का दो धाराओं भाजपा और गैर भाजपा में धुर्वीकरण हो रहा है। इसको साफ  तौर पर आरएसएस और भाजपा भी समझ रही है। सभी जानते हैं कि गैर भाजपा वोटों के धुर्वीकरण की ताकत के सामने भाजपा ठहर नहीं पाएगी। यह बात इस वर्ष के लोकसभा उपचुनावों के साथ ही हाल ही संपन्न हुए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनावों के दौरान भाजपा की शिकस्त ने साबित की है। एेसे में नरेंद्र मोदी तमाम कोशिश के बावजूद दो तरफा जूझ रहे हैं। एक, वह आरएसएस संचालित भाजपा के गुप्त एजेंडे को नहीं रोक पा रहे हैं, जिससे उनकी महत्वाकांक्षी विश्व मान्य छवि बनाने के प्रयासों को भी धक्का लग रहा है। साथ ही अमित शाह व कुछेक उपकृत मंत्री और नेताओं के अलावा भाजपा नेतृत्व में ही एक बड़ा वर्ग उनसे नाराज है, जो नाराजगी को शायद सही वक्त आने के इंतजार में दबा...

PAGDANDI KA GANDHI

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मुबाहिसा : राजेन्द्र मौर्य.       "पगडंडी का गांधी"          लो कतंत्र की यही ताकत है, जिसमें किसान, मजदूर, व्यापारी कोई भी वह साधारण से साधारण व्यक्ति देश का प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मंत्री बन सकता है, जिसे जनता चाहती है। और जनता जिसे नकार दे तो वह बड़े से बड़े पद से बेदखल कर दिया जाता है। 1977 में इंदिरा गांधी को बुरी तरह हराने समेत इतिहास ऐसे तमाम उदाहरणों से भरा पड़ा है। इन दिनों भाजपा के दो कामदारों ने भारत को कांग्रेसमुक्त का नारा दिया हुआ है। यह नारा दरअसल नेहरू-गांधी परिवार से मुक्ति का है, जिसे पहले भी कई बार दिया चुका है पर जिसे जनता चाहती है तो फिर उसका कोई भी कुछ नहीं बिगाड़ सकता है। पंडित जवाहरलाल नेहरू की मौत के बाद इंदिरा गांधी अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता से आगे बढ़ीं और उनके साथ ही संजय गांधी ने भी अपनी नेतृत्व क्षमता को साबित किया,  जहां वह 1977 में इंदिरा गांधी की हार के बड़े कारण बने वहीं 1980 में कांग्रेस की वापसी का भी काफी श्रेय उन्हीं को जाता है। मुझे वर्ष 1980 में अपनी बा...

हनुमानजी की जाति ?

मुबाहिसा : राजेन्द्र मौर्य                                     हनुमानजी की जाति बताना और उसपर सवाल उठाना कतई गलत है। आखिर कब राजनीति में जाति और धर्म का घालमेल बंद होगा। हम प्राणी हैं, इंसान ने अपनी सोच के मुताबिक जाति और धर्म में बांट दिया, जिसको राजनीति पोषित करने का काम कर रही है। इसके विपरीत मैं देखता हूं कि कई देशों के मूल धर्म समाप्ति की ओर हैं और उनके धर्मस्थल वीरान हो रहे हैं, लोग स्वेच्छा से दूसरे धर्म अपना रहे हैं। कई धर्म स्थलों के बिक जाने के भी उदाहरण सामने आ रहे हैं। पर इससे संबंधित देश की सरकार को कोई मतलब नहीं है। मैंने देखा एक देश में हमारे भारतीय गणपति भगवान की पालकी चर्च में लेकर गए तो वहां न केवल चर्च के पादरी ने स्वागत किया बल्कि मौजूद ईसाइयों ने भी पूजा-पाठ में शामिल होकर सभी को भोजन कराया। इससे कहीं भी दोनों धर्मों के लोगों की अपने धर्म के प्रति आस्था में कमी नहीं आती, बल्कि आपस में प्यार और सद्भाव बढ़ता है, जो एक-दूसरे के साथ रहने की ताकत बनता है। जब मैं अपने देश की सरका...
दलित नायक : बीपी मौर्य राजेन्द्र मौर्य अ लीगढ़ के खैर में एक साधारण परिवार में जन्म लेने वाले बुद्ध प्रिय मौर्य का मूल नाम भगवती प्रसाद था। बीएससी और फिर एलएलएम करने के बाद वे अलीगढ़ यूनिवर्सिटी में ही प्राध्यापक रहे। वैसे उनका जन्म 12 सितंबर 1928 को होना बताया जाता है, लेकिन बुद्ध प्रिय मौर्य सदैव कहा करते थे कि उनका जन्म ज्येष्ठ माह में तब हुआ था जब उनकी माता खेत में मजदूरी कर रही थीं। उस समय बैसाख माह की पूर्णिमा अर्थात बुद्ध पूर्णिमा थी। इसलिए वे अपना जन्मदिन बुद्ध पूर्णिमा के दिन ही मनाते थे। पहली बार उन्होंने 1962 में अलीगढ़ लोकसभा सीट से रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के बैनर तले चुनाव लड़ा। मुस्लिम बहुल्य सीट होने के बावजूद उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार को हराकर सीट हासिल की थी। उस चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार के पक्ष में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहलाल नेहरू ने सभा को संबोधित किया था। सांसद बनने के बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भूचाल ला दिया था। रिपब्लिकन...
भारत रत्न  पंडित  गोविंद बल्लभ पंत को उनकी जयंती पर विनम्र श्रद्धांजली।
🌱जब मैंने जन्म लिया,वहां 1नारी  थी जिसने मुझे थाम लिया......                                                                                      🍀मेरी माँ🍀 🌱बचपनमें जैसे जैसे मैं बड़ा होता गया 1 नारी वहां मेरा ध्यान रखने और मेरे साथ खेलने के लिए मौजूद थी.....   🍀मेरी बहन🍀                                              ...
जनलोकपाल की बात करने वाले अरविंद केजरीवाल अब अपनी पार्टी के लोकपाल और अपने नेताओं के सवालों को क्यों नजर अंदाज कर रहे हैं l
=आपसी विश्वास= संत कबीर रोज सत्संग किया करते थे। दूर-दूर से लोग उनकी बात सुनने आते थे। एक दिन सत्संग खत्म होने पर भी एक आदमी बैठा ही रहा। कबीर ने इसका कारण पूछा तो वह बोला, ‘मुझे आपसे कुछ पूछना है। मैं गृहस्थ हूं, घर में सभी लोगों से मेरा झगड़ा होता रहता है। मैं जानना चाहता हूं कि मेरे यहां गृह क्लेश क्यों होता है और वह कैसे दूर हो सकता है?’ कबीर थोड़ी देर चुप रहे, फिर उन्होंने अपनी पत्नी से कहा, ‘लालटेन जलाकर लाओ’। कबीर की पत्नी लालटेन जलाकर ले आई। वह आदमी भौंचक देखता रहा। सोचने लगा इतनी दोपहर में कबीर ने लालटेन क्यों मंगाई। थोड़ी देर बाद कबीर बोले, ‘कुछ मीठा दे जाना।’ इस बार उनकी पत्नी मीठे के बजाय नमकीन देकर चली गई। उस आदमी ने सोचा कि यह तो शायद पागलों का घर है। मीठा के बदले नमकीन, दिन में लालटेन। वह बोला, ‘कबीर जी मैं चलता हूं।’ कबीर ने पूछा, ‘आपको अपनी समस्या का समाधान मिला या अभी कुछ संशय बाकी है?’ वह व्यक्ति बोला, ‘मेरी समझ में कुछ नहीं आया।’ कबीर ने कहा, ‘जैसे मैंने लालटेन मंगवाई तो मेरी घरवाली कह सकती थी कि तुम क्या सठिया गए हो। इतनी दोपहर में लालटेन की क्या जरूरत। लेकिन न...