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P.V. NARASIMHA RAO: प्रधानमंत्री, जिसने भारत बचाया

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एक पीएम, जिसने भारत बचाया ! के. विक्रम राव    पी वी नरसिम्हा राव की आज (28 जून) जन्मशती है। गमनीय है कि पाँच वर्ष तक अल्पमतवाली कांग्रेस सरकार को चलानेवाले नरसिम्हा राव ने दस जनपथ के इशारे पर थिरकने से इनकार कर दिया था| हालांकि सरदार मनमोहन सिंह सोनिया गांधी की उँगलियों पर दस वर्ष तक भांगड़ा करते रहे| ऐसे इतिहास-पुरुष के जन्मोत्सव से पार्टी मुखिया राहुल गांधी को कोई सरोकार भी नहीं है| विडम्बना तो यह थी कि उनके सगे काका (संजय गांधी) जो कभी भी किसी भी राजपद पर नहीं रहे, की समाधि राजघाट परिसर में बनी| केवल पांच महीने रहे प्रधान मंत्री, जो लोकसभा में बैठे ही नहीं, (चरण सिंह) के लिये किसान घाट बन गया| सात माह राजीव–कांग्रेस की बैसाखी पर प्रधान मंत्री पद कब्जियाये ठाकुर चंद्रशेखर सिंह का भी एकता स्थल पर अंतिम संस्कार किया गया| मगर सम्पूर्ण पांच साल की अवधि तक प्रधानमंत्री रहे पीवी नरसिम्हा राव का शव सोनिया गांधी ने सीधे हैदराबाद रवाना करा दिया था| दिल्ली में उनके नाम कोई स्मारक नहीं, कोई गली नहीं|        कल्पना कीजिए कि ताशकन्द में अकाल मृत्यु (1966)...

mirror of society : समाज का आईना है "फीका लड्डू"

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समाज का आईना है "फीका लड्डू"  वरिष्ठ साहित्यकारों ने की डॉ पुष्पलता की पुस्तक  फीका लड्डू की समीक्षा"  समीक्षक एवं संपादक साहित्यकार डॉ अलका वशिष्ठ ने कहा ,  तीन बार पढ़ चुकी हूँ कहानी, बहुत सारे भाव विचार और प्रश्न उमड़ रहे हैं। यह दाम्पत्य जीवन की कड़वी सच्चाई है। आकर्षण दैहिक हो या मानसिक यदि एकतरफा हो तो बिखराव बना रहता है। ना जाने कितने दम्पति इस त्रासद अवस्था को झेल रहे हैं।  समाज का आईना है ये कहानी।  कहावत भी है शादी ऐसा लड्डू है,जो खाए वो पछताए,ना खाए वो भी । इस कहानी ने दिमाग में हलचल मचा दी है।  हिंदुस्तान  के सम्पादक सूर्यकांत द्विवेदी  ने कहा बहुत ही सुंदर कहानी है। अद्यतन पढ़ता चला गया। बाकमाल। बड़ा पेड़ पौधे को नहीं पनपने देता। जीवन के अंतर्द्वंद्व को बहुत सुंदरता से आपने लिखा है।  यशपाल सिंह  संपादक   "जनवाणी"ने कहा यथार्थ उतारा है कागजों पर ।  वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक डॉ राम गोपाल भारतीय ने कहा ,कथाकार डॉ पुष्पलता की कहानी फीका लड्डू गृहस्थ जीवन में पल- पल बदलते  काल्पनिक और यथार्थपूर्ण मनोभावों क...

Pressure on Press : प्रेस पर प्रेशर कितना ?, तब और अब !

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प्रेस पर प्रेशर कितना ? तब और अब ! के. विक्रम राव           कई दफा सुना। बहुत बार पढ़ा भी। अब मितली सी होने लगती है। वितृष्णा और जुगुप्सा भी। कथित जनवादी, प्रगतिशालि, अर्थात वामपंथी और सोनिया—कांग्रेसी दोहराते रहते है, चीखते भी हैं कि आज आपातकाल से भी बदतर स्थिति हो गयी है। अत: तार्किक होगा कि खूंखार टीवी एंकर, खोजी खबरिये और जुझारु—मीडियाकर्मियों की तब (25 जून 1975 से 21 मार्च 1977) और आज की कार्यशैली की तनिक तुलना करें।          मसलन आपातकाल जैसी लोमहर्षक वारदातें यदि आज होतीं, तो वर्तमान मीडिया क्या सत्तावानों के, पुलिसवालों के, राजनेताओं के, समाज के कर्णधारों के परखमें और पुर्जें नहीं उड़ा देते? अत्याचारियों की धज्जियां ढूंढे नहीं मिलती। तो इन पुराने हैवानी हादसों पर गौर करें। दो घटनाओं का उल्लेख करें। आपातकाल में इलाहाबाद विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डा. रघुवंश को नजरबंद कर जेल में सड़ाया गया। उनपर इल्जाम लगा था कि वे खंभे पर चढ़कर संचार के तार काट रहे थे। डा. रघुवंश जन्मजात लुंज थे। वे बाल्यावस्था से ही अपने पैरों की उंगलियों के बल लि...

China's PM vs Mayar : चीन के कारण हुआ पीएम बनाम मेयर

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चीन के कारण हुआ पीएम बनाम मेयर के. विक्रम राव         बु डापेस्ट के महापौर तथा उनके सियासी प्रतिद्वंदी हंगरी गणराज्य के प्रधानमंत्री के बीच राजधानी के सड़कों पर खुली जंग आजकल छिड़ी हुयी है। वजह है कि कम्युनिस्ट चीन ने राजमार्ग पर एक विशाल भूखण्ड खरीद लिया है। वहां पर शंघाई के फूदान विश्वविद्यालय का अन्तर्राष्ट्रीय केन्द्र चीन स्थापित करना चाहता है। प्रतिपक्ष के 45—वर्षीय सोशलिस्ट मेयर गर्गली कारास्कोनी तथा सत्तारुढ़ दक्षिणपंथी फिडसेन पार्टी (नागरिक मोर्चा) के साठ—वर्षीय प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन की कलह से राजमार्ग पर जनसैलाब द्वारा प्रदर्शन हो रहा है। सोशलिस्टों का आरोप है कि इस पूर्व यूरोपीय गणराज्य में कम्युनिस्ट चीन शिक्षा—प्रचार की आड़ में जमीन्दार बनने की साजिश में है। अर्थात मेयर की मातृभूमि का मुनाफे हेतु सौदा करने पर वह आमादा हैं         सोशलिस्ट महापौर स्वीकारते हैं कि भूमि पर नियंत्रण भले ही केन्द्रीय शासन का है। प्रधानमंत्री तथा उनके चीनवाले सौदागर—सुहृदों को हैरान—परेशान करने की कारगर तदबीर मेयर ने खोज ही लिया है। इससे हंगरी शासन से कह...

Chirag's Mother Reena Paswan : ब्राह्मण नहीं रविदासी सिख की बेटी हैं रीना पासवान

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  चिराग को अब गैर बिहारी घोषित करने की कोशिश मुबहिसा : आर.के. मौर्य दिवंगत दलित नेता रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी को कब्जाने के बाद उनके छोटे भाई पशुपति पारस अब उनकी दूसरी पत्नी श्रीमती रीना पासवान और उनके बेटे चिराग पासवान को गैर बिहारी घोषित करके उनका बिहार और पासवान परिवार से कोई आत्मिक लगाव न होने की बात फैलाने की कोशिश में लग गए हैं। इस मुहिम में रामविलास पासवान की पहली पत्नी श्रीमती राजकुमारी पासवान और उनकी दोनों बेटियों उषा और आशा व दामादों, बहनों समेत उन सभी रिश्तेदारों को भी जोड़ना शुरू कर दिया है, जो किन्हीं न किन्हीं कारणों से पासवान की दूसरी पत्नी श्रीमती रीना पासवान और उनकी दोनों संतान चिराग पासवान व बिटिया लवली से चिढ़ते हैं। इनकी मंशा अब चिराग और उनकी मां रीना पासवान को पूरी तरह गैर बिहारी बताकर बिहार से बेदखल करने की है।  पासवान के रहते कभी उनके भाई या अन्य परिजन रीना पासवान और उनके बेटे चिराग व बेटी के प्रति नफरत होते हुए भी उनका कुछ नहीं बिगाड़ पाए, लेकिन अब...

Inidra Gandhi & Bahuguna : इंदिरा हारीं थीं शेरे गढ़वाल से !!

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इंदिरा हारीं थीं शेरे गढ़वाल से !! के. विक्रम राव         हे मवती नन्दन बहुगुणा का जीता हुआ गढ़वाल संसदीय उपचुनाव आज ही के दिन (21 जून 1981) पलट दिया गया था। ठीक चार दशक हुए। हालांकि उसी दौर में अमेठी से राजीव गांधी निर्वाचित घोषित हो गये थे। दोनों उपचुनावों में इन्दिरा गांधी का असर दिखा था। उनके सत्ता में लौटे साल भर ही हुआ था। उत्तर प्रदेश (तब अविभाजित था) के इन दोनों मतदानों पर दुनिया की नजर टिकी थी। हवाई दुर्घटना में संजय गांधी की मौत से अमेठी की सीट रिक्त हो गयी थी। सरकारी एयरलाइन्स के पाइलट पद को छोड़ कर राजीव गांधी एक दिन पूर्व ही कांग्रेस में भर्ती हो गये थे। प्रत्याशी बन गये थे।         हालांकि इन्दिरा गांधी के लिये ये दोनों चुनाव जीतना अत्यावश्यक था। अपने वंश के नये उत्तराधिकारी को नामित करना था। अपने घोर शत्रु को गढ़वाल में परास्त करना था। बहुगुणाजी कांग्रेस से बाहर हो गये थे। उनका प्रतिद्वंदी थे चन्दमोहन सिंह नेगी। दोनों ''भांजों'' (राजीव और संजय) ने बहुगुणाजी को पार्टी में लाकर प्रधान सचिव नियुक्त कराया था, तो अपमानित भी उतनी ही शीघ्...

Suprime court ; असहमति की सीमा, प्रतिरोध के प्रकार

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 असहमति की सीमा, प्रतिरोध के प्रकार के. विक्रम राव          पूर्वी दिल्ली के दंगों (फरवरी 2020) वाले मुकदमें के अभियुक्तों पर उच्चतम न्यायालय का कल (18 जून 2021) का आदेश कहीं अधिक निर्णयात्मक हो सकता था। अभियुक्तों की जमानत निरस्त तथा हाईकोर्ट के आदेश को ही रद्द किया जा सकता था। ये आरोपी जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के तीन दंगाई छात्र हैं जिनकी मंशा और मकसद पर गौर होना चाहिये था। दंगा का समय था जब अमेरिकी राष्ट्रपति राजकीय यात्रा पर दिल्ली आये थे। दुनियाभर के संवाददाता उपस्थित थे। अर्थात स्थानीय खबर पूरे भूलोक में प्रसारित होती और हुयी भी। भारत की छवि खराब करने की सुविचारित षड़यंत्र था। इन दंगों में 53 नागरिक मार डाले गये थे। करीब 700 घायल हुये थे।         दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायमूर्तिद्वय सिद्धार्थ मृदुल और अनूप जे. भंभानी ने अभियुक्तों की साधारण जमानतवाली याचिका पर विस्तृत 100 पृष्ठवाला फैसला लिखा। इसे उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्तिद्वय हेमंत गुप्ता तथा बी. रामसुब्रहमण्यम ने अचंभाभरा तथा बहुत लम्बा बताया। उन्होंने कहा कि इस आदेश ...

Chirag Vs Paras : पासवान के चहेते अब पारस के खेमे में, चिराग मिले स्पीकर से

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 पासवान के चहेते अब पारस के चहेते बने, चिराग मिले स्पीकर बिड़ला से दिवंगत दलित नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के चहेतों को अपनी ओर खींचने के लिए पशुपति पारस ने अपनी कार्यकारिणी की पहली सूची में खूब जगह दी है। उनका यह प्रयास भी चिराग पासवान को मैदान में अकेले छोड़ देने का है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि चिराग पासवान पूरी तरह से खालिक और एपी बाजपेई पर निर्भर हो चुके हैं, जबकि रामविलास पासवान किसी पर निर्भर नहीं थे। वह  देशभर में अपने समर्थक कार्यकर्ताओं से सीधे जुड़े थे और सभी को यथा योग्य संगठन में सम्मान देकर साथ लेकर चलने में विश्वास रखते थे। यह खालिक के पार्टी में बढ़े वर्चस्व का ही परिणाम है कि पासवान के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले तमाम पार्टी के छोटे बड़े कार्यकर्ता पदाधिकारी पारस की ओर खींचे जा रहे हैं। आज पारस की जारी सूची से तो यही लगता है कि रामविलास पासवान के खास रहे लोगों को उन्होंने अपनी ओर खींचने के लिए कार्यकारिणी में खूब तरजीह दी है। लोजपा पारस गुट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पशुपति कुमार पारस ने पार्टी की सभी इकाइयों को भंग कर दिया। ...

Sahitya Bhushan : साहित्य भूषण पुरस्कार प्राप्ति कथा

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अथ श्री  साहित्य भूषण पुरस्कार प्राप्ति कथा "रूखी -सूखी खाय ले ठंडा पानी पी, देख पराई चूपड़ी मत ललचा यूँ  जी " एक लिक्खाड़ कवि  को एक दिन किसी मित्र ने पुस्तक के लिए उत्तर प्रदेश संस्थान की विज्ञप्ति भेज दी।  पढ़कर उसकी बांछे खिल गई ।वह तो साहित्य भूषण के लिए भी अप्लाई कर सकता है।उसने आस पास नजर दौड़ाई कोई परिचित ऐसा नहीं था जिसे सहित्य भूषण मिला हो  ।प्रकाशक ने रही सही हिम्मत यह कहकर तोड़ दी कि पुरस्कार यूँ ही नहीं मिलते इनके लिए  केवल लिक्खाड़ होना ही  नहीं  ऊपर जुगाड़ होना भी  जरूरी है। उसने एक पुरस्कार पा चुके व्यक्ति से बात की थी उसने बताया था कि उसने अपने रिश्तेदार को दिलवाया था ।उसने यह भी बताया था कि वह तो मुख्यमंत्री के साथ बैठकर खाना खाता है। नेट पर उसका लिटरेचर ढूंढा तो उसे केवल सड़क छाप अश्लील साहित्य नुमा एक सूखी पत्नी की देह से अरुचि और एक मोटी भद्दी स्त्री के प्रति आकर्षण की वासना भरी कहानी मिली   ।उसने छी थू ये साहित्य है कहा मगर प्रत्यक्ष में तारीफ की ।बाकी भी लिखा होगा उसे मिला नहीं। वह चाह रहा था  वह उसकी संस्तुति कर...

TIBBAT & India : मुक्त तिब्बत ही भारत का ध्येय हो !

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मुक्त तिब्बत ही भारत का ध्येय हो! के. विक्रम राव         तिब्बत के पुनीत बौद्धआस्था केन्द्र जोरबांग मठ के मुख्य उपासक लामा ल्हाकपा ने विदेशी संवाददाताओं की एक टीम से ल्हासा में वार्ता (15 जून 2021) के दौरान बताया कि ''धर्म गुरु दलाई लामा अब मान्य धर्मगुरु नहीं रहे।'' इस पर अमेरिकी संवाद समिति एसोसियेटेड प्रेस (एपी) के संवाददाता ने पूछा : '' तो फिर कौन गुरु तिब्बत में मान्य है?'' वह मठाधीश बोला, ''शी जिनपिंग।'' अर्थात कम्युनिस्ट चीन के जीवन—पर्यन्त नामित राष्ट्रपति जो चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के सवा नौ करोड़ सदस्यों (भाजपा से कम) के अधिनायक हैं। गत दिनों में पश्चिम संवाद समितियों के प्रतिनिधियों के एक दल को तिब्बत का ''विकास'' दर्शाने ल्हासा ले जाया गया था।          चीन की सरकार का मकसद साफ है कि बुद्ध के इस पवित्रतम केन्द्र में अनीश्वरवाद अब पनपायें। यूं चीन ऐलान भी कर चुका है कि 15वें दलाई लामा को कम्युनिस्ट चीन ही नामित करेगा, चयन की पारम्परिक विधि खत्म होगी। इन संवाददाताओं के रपट से स्पष्ट हो गया है कि भिन्न नस्ल की जनत...

LJP : पारस बने लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, चिराग गुट ने नकारा

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 पारस बने लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, चिराग गुट ने नकारा प टनाः पूर्व सांसद सूरजभान के आवास पर हुई लोक जनशक्ति पार्टी (पारस गुट) की बैठक में पूर्व अनुमानति पशुपति कुमार पारस को राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है, जिसको चिराग पासवान गुट के नेताओं ने नकार दिया है। पार्टी नेताओं को कहना है कि पांचों सांसदों को पार्टी से निष्कासित किया जा चुका है, उनका लोजपा से अब कोई संबंध नहीं है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सह से पार्टी को कमजोर करने के ल‌िए पशुपत‌ि पारस को आगे करके यह पार्टी संविधान विरोधी कार्यवाही की गई है, जिसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है। पूर्व सांसद एवं चुनाव प्रभारी सूरजभान सिंह के पटना में कंकड़बाग टीवी टॉवर स्थित आवास पर पारस गुट की बैठक आयोजित की गई, जिसमें पहले पशुपति पारस ने नामांकन दाखिल किया। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में पशुपति पारस के नाम पर सांसदों ने एकमत से सहमति जताई। पार्टी कार्यालय में चुनावी प्रक्रिया नहीं होने से भी सवाल उठ रहे हैं, इस पर पारस गुट का कहना है कि कोरोना को देखते हुए कार्यकारी अध्यक्ष के आवास पर बैठक बुलाई गई। पार्टी कार्...

LJP : राजू तिवारी बने बिहार लोजपा के अध्यक्ष

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 राजू तिवारी बने बिहार लोजपा के अध्यक्ष चिराग पासवान और चाचा पशुपति पारस के बीच पार्टी के मालिकाना हक को लेकर विवाद छिड़ा है। पांच सांसदों को अपने पाले में करके पशुपति पारस ने पार्टी की कमान अपने हाथों में लेने का मूड बनाया हुआ है। विवादों के बीच चिराग पासवान ने राजू तिवारी को बनाया बिहार LJP का अध्यक्ष घोषित कर दिया है। लजेपी में टूट के बाद जारी सियासी घमासान के बीच चिराग पासवान ने बड़ा फैसला लिया है. चिराग ने पार्टी नेता राजू तिवारी को बिहार एलजेपी की जिम्मेदारी सौंपी है. चिराग पासवान ने पत्र जारी कर इस बात की जानकारी दी है. बतौर एलजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने पत्र जारी कर कहा, " राजू तिवारी, मुझे आपको लोक जनशक्ति पार्टी का बिहार इकाई का प्रदेश अध्यक्ष मनोनीत करते हुए अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है. मुझे विश्वास है कि आपके कुशल नेतृत्व द्वारा बिहार इकाई में लोक जनशक्ति पार्टी सुदृढ़ होगी." राजू तिवारी ; जिनके सहारे चाचा से निपटने की फिराक में चिराग बिहार में लोजपा के भीतर घमासान जारी है। चिराग पासवान और उनके चाचा पशुपति कुमार पारस के बीच खींचतान बढ़ती जा रही है। इस ब...

Chirag Paswan Vs Paras : चिराग की मोदी का हनुमान बनाया रहने की कोशिश

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चिराग की अभी भी मोदी का हनुमान बने रहने की कोशिश लोजपा को भाजपा द्वारा तोड़े जाने पर भी नहीं खुली आंख लोजपा को तोड़ने में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भाजपा की भूमिका जब पूरी तरह से जगजाहिर हो चुकी है, तब भी लोजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान अपने को मोदी के हनुमान ही बने रहने की कोशिश में लगे हैं। पता नहीं उनको कौन इस बात की सलाह दे रहा है कि मोदी या भाजपा किसी भी तरह उनका साथ दे सकते हैं और इस संकट के दौर से उनको पूरे सम्मान के साथ बाहर निकाल सकते हैं।  चिराग पासवान ने मोदी का हनुमान बनकर बिहार में है विधानसभा चुनाव के दौरान तो अपनी शर्मनाक हार का सामना किया ही है लेकिन यहां भी लेकिन अब पार्टी दो फाड़ होने पर भी उनको मोदी की कोई मदद या सहारा नहीं मिलेगा, चूंकि  इसमें यदि थोड़ी भी राजनीतिक गुंजाइश होती तो शायद लोकसभा अध्यक्ष द्वारा पशुपति पारस समेत पांच सांसदों की चिट्ठी पर पशुपति पारस को सदन में लोजपा का नेता मानने में इतनी जल्दी नहीं दिखाई होती ? सभी जानते हैं बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान चिराग पासवान ने खुद को हनुमान और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को राम कहा थ...

LJP : चिराग पासवान ने पारस समेत बागियों को किया निष्कासित

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 किसके हाथ में लोजपा की कमान, चिराग या पारस ?  लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) में चाचा-भतीजे की लड़ाई जारी है। चाचा पशुपति पारस ने पार्टी पर कब्जे की लड़ाई में बाजी मारी तो चिराग पासवान ने सभी बागियों को बाहर करने का फरमान जारी कर दिया। लोक जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) में  दिल्ली से पटना तक चाचा-भतीजा के समर्थक सड़कों पर हैं. एलजेपी के अंदर जारी इस रस्साकस्सी पर संविधान एक्सपर्ट सुभाष कश्यप ने मीडिया से बातचीत में कहा कि मैं पार्टी पर टिप्पणी नहीं करना चाहता, केवल कानूनी मुद्दे पर बात करूंगा, किसके पास पार्टी का नियंत्रण है और किसके पास किसी को निष्कासित करने का अधिकार है, यह पार्टी के संविधान पर निर्भर करता है, पार्टी के अधिकांश सदस्य ही पार्टी के नियंत्रण पर फैसला करेंगे। संविधान एक्सपर्ट सुभाष कश्यप के मुताबिक एलजेपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले सांसद/विधायक निष्कासन के बाद भी सदन में पार्टी के सांसद/विधायक के रूप में बने रह सकते हैं, पार्टी का नियंत्रण किसके पास है, यह तय करने के लिए उन्हें अदालत जाना पड़ सकता है, चुनाव आयोग को यह तय करना होगा कि पार्टी का चुनाव चिन्ह किसे मि...

Cricket : क्रिकेटर मांकड का सम्मान

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करिश्माई क्रिकेटर स्व. मांकड नवाजे गए !! के. विक्रम राव         यादों की परतें पलटिये। पटल पर क्रिकेट की घटनाओं को आरेखित कीजिये, फिल्मरोल के सदृश। वहां दिखेगा एक ठिगना, गोलमटोल बॉलर। बस दस डग दौड़ कर वह गेंद उछालता है। बैट्समैन हिट लगाने बढ़ा तो चूकेगा, स्टम्प आउट होगा। और कही मारा तो कैच आउट! तो ऐसे लुभावने गेंदबाज थे महान कप्तान वीनू मांकड। इनके नाम पर गत रविवार (13 जून) को इंग्लैण्ड के विस्डन्स हाल आफ फेम (कीर्ति कक्ष) में एक भव्य समारोह हुआ। उन्हें मान का स्थान दिया गया। प्रत्येक खिलाड़ी के जीवन की यह चरम हसरत होती है। जीते जी नहीं तो, मरणोपरांत ही सही ऐसा गौरव मिले।           मांकड की जन्मस्थली जामनगर के महाराजा रंजीत सिंह (उनके नाम से रणजी ट्रॉफी है) ही प्रथम भारतीय खिलाड़ी थे, जो सन 1900 में इस सम्मान को पा चुके थे। सचिन तेन्दुलकर को मिलाकर सिर्फ छह अन्य गत 130 वर्षों (1890 से) में सम्मानित हुये है। हालांकि मेरी यह पोस्ट पचास पार वालों के लिये अधिक बोधगम्य होगी। वर्ना संदर्भ की किताबें पढ़ें, क्योंकि भारत का पश्चिम—गुजराती (सौराष...

ISRAEL : मुसलमान और यहूदी की साझा सरकार

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मुसलमान और यहूदी की साझा सरकार के. विक्रम राव   त निक कल्पना कीजिये कि काशी और मथुरा में औरंगजेबी मस्जिदों को हटाकर पंथनिरपेक्षता हेतु शिवाला और कृष्ण मंदिर बनावाने की मुहिम कांग्रेस की सोनिया गांधी चलाये!! बहुसंख्यकों की आस्था का इस्लामी आक्रामकों द्वारा ऐतिहासिक दमन कांग्रेस अध्यक्ष खत्म करायें। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के पुरोधा जनाब जफरियाब जिलानी साहब सेक्युलर सिद्धांतों के हित में मुस्लमानों के लिये जनसंख्या नियंत्रण कानून बनवाने, तीन तलाक और शरियत के अन्य प्रावधानों के स्थान पर समान संहिता की मांग खुद बुलंद करने लगे तो?         कुछ ऐसा ही अभियान कल से यहूदी राष्ट्र इस्राइल में ''संयुक्त अरब सूची'' के 48—वर्षीय नेता जनाब मोहम्मद मंसूर अब्बास ने चलाने के संकेत दिये हैं। इतिहास में पहली बार इस कट्टर अरब मुस्लिम नेता ने अपने तीन निर्वाचित सांसदों के साथ अन्य यहूदी—पार्टियों से गले लगकर मिलीजुली सरकार बना ली है। पुराने दुश्मन बेंजामिन नेतनयाहू को 12 वर्षों बाद अपदस्थ करना ही इस वक्त इन अरब मुस्लिमों के रहनुमा का एकमात्र लक्ष्य है। इस्लामी दस्तूरों से भी कहीं ऊप...