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Har Har Mahadev (video): महा शिरात्रि

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Today Cartoon : केवल हंसने के लिए

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Democracy : लोकतंत्र जागृति की आवश्यकता क्यों ?

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"लोकतंत्र जागृति की आवश्यकता क्यों ?  राजेन्द्र पंवार सम्मानित लोकतन्त्र सैनानियों !  आजादी के उपरांत, सत्ता के लालच में 1975 में तत्कालीन सरकार के आपातकाल लगाने से ये (आलोकतांत्रिक) स्थिति देश में फिर से बनने के कारण आप लोगों को  लोकतन्त्र की रक्षा के लिए 19 से 21 माह तक की जेल काटनी पड़ी। आज भी देश में ऐसी किसी भी सत्ता के लोभियों की सरकार से देश को सचेत रहने की अवश्यकता है। एक बार फिर कहते हैं, कि किसी भी अपराध या आलोकतांत्रिक बात के खिलाफ मुंह खोलना शुरू करें, तब देखना कि शामली जिले का लोकतन्त्र सैनानियों का ये सम्मेलन भले ही आज नक्कारखाने में तूति की आवाज लगे, कल एक नया रंग और परिवर्तन लाएगा।  लेकिन जब तक रहोगे मौन, साथियो तुम्हारी सुनेगा कौन ?     दुनियाँ के सबसे बड़े लोकतन्त्र में लोकतन्त्र जागृति दिवस मनाया जा रहा है। ये इस बात का  द्यौतक है कि हमारी इस व्यवस्था में कहीं कुछ कमी है। आज देश और दुनियां एक महान परिवर्तन के काल से गुजर रही है। एक और स्वार्थ के शैतान ने इंसान को बुरी तरह अपने पंजों में जकड़ लिया है, दूसरे उसने अपने सुख साधनों और व...

Turki: तुर्की अब इस्लामी हो गया

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तुर्की अब इस्लामी हो गया  के. विक्रम राव मुस्लिम मुल्कों के गुट का एक अकेला सेक्युलर राष्ट्र तुर्की अगले जुम्मे (24 जुलाई 2020) से इस्लामी राष्ट्र में पुनः ढल जाएगा| करीब 85 वर्ष बाद इस्ताम्बुल में धर्मनिरपेक्षता के जनप्रिय प्रतीक, पंद्रह शताब्दी वाले हाजिया सोफिया म्यूजियम से अजान गूंजेगी| “मोहम्मदुल रसूल अल्लाह” कहलवाया जाएगा| कट्टर मजहबी राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन भी नमाज में शामिल होंगे| उधर, चार सौ किलोमीटर दूर राजधानी अंकारा के अनितकबीर स्मारक में दफ़न महान धर्मनिरपेक्ष, राष्ट्रपिता (अतातुर्क) मुस्तफा कमाल पाशा अपनी कब्र में व्याकुल हो रहे होंगे कि स्वराष्ट्र को कैसा प्रगतिवादी बनाया था। आज उग्रवादियों ने उसे कैसा कदीमी बना डाला।  99 प्रतिशत मुसलिम आबादी वाले तुर्की में हिजाब और बुरका पर पाबंदी है। अब हट जाएगी। करीब सात साल पहले इस्तांबुल की ग्यारह-सदस्यीय संविधान पीठ ने एक संसदीय कानून को अवैध करार दिया था, क्योंकि वह तुर्की के सेक्युलर संविधान के प्रतिकूल था। तब विश्वास नहीं होता था कि मुसलिम-बहुल तुर्की भारत से कहीं बेहतर सेक्युलर राष्ट्र है। अंकारा में संविधान पीठ ने...

Plantation : अनिल मौर्य का सम्मान

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मजबूत भविष्य बनाएगा, पौधा भी संतान कहलाएगा      (पर्यावरण-धर्म की दराज़ से )      देश का मजबूत भविष्य पेड़ों में सुरक्षित हैं, इससे इंकार नहीं किया जा सकता हैं। एक पौधा भी घर में संतान का ही कार्य करता हैं। बदले में सिर्फ उसे रोपने वाले माता-पिता से भोजन के रूप में केवल पानी, धूप, खाद की चाह रहती है । इसके बाद वह परिवार के लोगों को "ऑक्सीजन" भेंट कर उनके जीवन को सुरक्षित रख कर अपने संतान होने का बखुबी फर्ज निभाता है। साथ ही हवा के झोंके में लहलहा कर सबको खुशी का इज़हार कराता हैं तथा वायु शुद्ध कर सबको स्वास्थ रखने का संतान के रूप में जिम्मा उठाता है।  इसकी गंभीरता को लेकर "प्रेरणा स्रोत" के रूप में जिलाधिकारी मेरठ के प्रधान सहायक और उत्तर कलक्ट्रेट कर्मचारी संघ मेरठ मण्डल के मंत्री अनिल मौर्य को पर्यावरण संरक्षण की जागरूकता में लगी "पर्यावरण-धर्म समिति" के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र पांचाल के द्वारा "प्रेरणा-स्रोत भूषण" से सम्मानित किया गया।  इसके साथ-साथ पेड़-पौधों की महत्ता का गुणगान कराकर अनिल मौर्य ने इस सम्मान से नवाजे जाने पर समिति का आभार व...

Hindi: हिंदी का दर्द चीन्हें!

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हिंदी का दर्द चीन्हें ! के. विक्रम राव भोर से मैं यह मालूम करने में जुटा हूँ कि उत्तर प्रदेश में आज कितने हिंदी प्रेमी आई०सी०यू० (गहन चिकित्सा केंद्र) में भर्ती हुए हैं?  कितने वेंटिलेटर पर रखे गए ?  कितनों को हृदयाघात अथवा पक्षाघात हो गया है ?  या कितने इहलोक छोड़ने वाले हैं ?  यद्यपि अभी तक एक की भी खबर नहीं है|  आज की ताजा खबर यह है कि यूपी बोर्ड के आठ लाख (8 लाख) परीक्षार्थी हिंदी में फेल (अनुत्तीर्ण) हो गए|  मैं अनन्य हिंदी भक्त हूँ, इसी नाते मैं अपना ईसीजी तो करा रहा हूँ |  छात्रकाल में हम नारे लगाते रहे हैं : “गाँधी-लोहिया की अभिलाषा, देश में चले देशी भाषा|” हालाँकि हमारा यह राज्य समस्त जम्बूद्वीप में हिंदी का मर्मस्थल है| गोपट्टी तो राष्ट्रभाषा का विख्यात मरकज है| इसकी बहनें भोजपुर से होती बृज तक वाया अवधी बसी हैं| अब प्रश्न उठेगा ही कि हिंदी विस्तार के नाम पर कितने लगातार मालामाल होते रहे हैं ?  इन तिजारतियों के रहते इतनी तादाद में बच्चे क्यों लुढ़के ?  किसी के पास तो उत्तर हो| किसी के गले तो फंदा पड़े !  मेरे ये सब प्रश्न विशेषकर ...

Song (Video):। संगीत के बहार

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Justice & injustice : न्याय अन्याय

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न्याय अथवा अन्याय ?  केवल दृष्टिकोण की विषमता है....   के. विक्रम राव मानवाधिकारवादियों, लोकतंत्र-प्रेमियों, जनवादी योद्धाओं और विविध धनोपासक एनजीओ का समूह निश्चित ही विकास दुबे की ‘हत्या’ को वीभत्स पुलिसिया अपराध करार देगा। सर्वोच्च न्यायालय में जांच हेतु याचिका दायर हो चुकी है। विपक्ष तो कमर कसकर धमाल करेगा ही|  वे सब कागनेत्र से ही इस परिदृश्य को देखेंगे| मानवतावादियों के दहशत के कारण यह दिवंगत द्विज, दो वेदपाठी (द्विवेदी), यज्ञोपवीतधारी ब्राह्मण, पण्डित विकास दुबे पुलिस के मुठभेड़ के बजाय उसकी गिरफ्त में रहता तो ?  वह पहले केवल हिरासत (पुलिस तथा न्यायिक जेल) का निवासी बनता। फिर अभियोग पत्र (चार्जशीट) पुलिस खरामा-खरामा साठ दिनों में भी तैयार न कर पाती, तो जमानत लेकर, सीना तानकर छुट्टा घूमता, जैसा गत तीन दशकों से वह करता रहा है। रासुका भी लगता तो एक सीमित अवधि तक ही। भाजपाई विधायक कुलदीप सिंह सेंगर भी सालों तक मुक्त नागरिक जैसा था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ समय पूर्व...

Journalism : पत्रकारिता का एक ऐसा भी आयाम है !

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पत्रकारिता का एक ऐसा भी आयाम है ! के. विक्रम राव एक दौर था जब “संपादक के नाम पत्र” का महत्व समाचार पत्रों में अग्रलेखों के ठीक बाद हुआ करता था| चर्चित पत्र अंतिम होता, तो श्रेष्ट पत्र पर पारितोष की परम्परा भी थी| ज़माना बदला| अब विज्ञापनदाता ही भारी भरकम संवाददाताओं को कोहनी मार देते हैं| तो अदना पाठक की क्या विसात? उसका कालम-स्पेस तो सिकुड़ेगा ही| ऐसे मंजर में परसों (4 जुलाई 2020) मुंबई के मलाड में 90-वर्षीय एंथोनी पाराकल का निधन पीड़ादायक है| अर्धशती तक समाचारपत्रों में पांच हजार के करीब पत्र लिखकर वे “लिमका बुक ऑफ़ रिकार्ड्स” में उल्लिखित हो चुके हैं| असंख्य जनसमस्याओं के प्रति अधिकारियों का ध्यानाकर्षित कर उनका हल करा चुके हैं| एंथोनी का तखल्लुस ही “सर्वोदयम” पड़ गया था| एक रेल कर्मी के तौर पर झाँसी स्टेशन से पाराकल ने जीवन प्रारंभ किया था| पश्चिम रेल में मुंबई आये| वहीँ के हो लिए| उनके एक मर्मस्पर्शी पत्र से उच्च रेल अधिकारियों ने मलाड उपनगरीय प्लेटफ़ॉर्म को ऊँचा बना दिया| पहले यात्रियों को छोटे प्लेटफ़ॉर्म और पटरी के बीच खुले स्थान से दुर्घटनाओं का भय रहता था| प्रधान मंत्रियों तक ने एंथ...

Railway Employee Langur (Video) : रेलवेकर्मी लंगूर

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India-China Border : लाल चीन में जनवाद पर खतरा

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लाल चीन में जनवाद पर खतरा के. विक्रम राव उत्तरी बीजिंग के प्रतिष्ठित शिंगहुआ विश्वविद्यालय में कल (6 जुलाई 2020) भोर में, पौ  फटने के पहले ही, चीनी जनवादी पुलिस के आठ सिपाहियों ने साठ-वर्षीय प्रोफेसर शु झान्ग्रून को उनके शयनकक्ष से हिरासत में ले लिया| अनजान स्थान पर कैद में हैं| न्यायशास्त्र और विधिविज्ञान के निष्णात इस वयोवृद्ध प्राचार्य पर अभियोग है कि वे वेश्यायों से संसर्ग कर रहे थे| इस पर उनकी पत्नी ने बताया कि बहुधा सत्ता के बौद्धिक आलोचकों पर यौन अपराध ही मढ़े जाते हैं| उनकी मान मर्यादा आसानी से मटियामेट हो जाती है| कल दोपहर को अकादमिक परिसर में खबर फैलते ही आक्रोशित प्रतिक्रियायें हुईं  कि अब “चीन के विश्वविद्यालयों  चुप्पी, सांठ-गाँठ और रूढ़िपालन ही जीवन शैली होगी|” सूत्र भी सुनाये गए: “हम सब लोगों की उदार सोच के इस प्रतीक (प्रोफ़ेसर झान्ग्रून) के उसूलों को ज्यादा दृढ़ बनाना कि  : कहो सहजता से, जो बोलना चाहिए|” विश्वविद्यालय के अन्य प्राचार्यों, खासकर जेंग शियोनान, का चीन शासन पर आरोप है कि शी जिनपिंग के सरकारी तथा कम्युनिस्ट पार्टी के निर्णयों की आलोचना करते प...

Guru Purnima

On Road substitute of petroleum Transport: (Video): सड़क पर गधा गाड़ी

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India & China Border : चहचहाना जब कहकहा बना !

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चहचहाना जब कहकहा बना ! के. विक्रम राव आखिर राहुल गाँधी ने नरेंद्र मोदी पर अपने ट्वीट में क्या तंज कसा? मूलतः उन्होंने व्यक्तिवाचक संज्ञा “सरेन्डर” उच्चारित करना चाहा था| वह विकृत होकर अपभ्रंश “सुरेन्दर” उच्चरित हो गया| इसके मायने हैं ध्वन्यात्मक (कंठ और तालु से उपजा) अव्यक्त (अनुच्चरित, अस्पष्ट) शब्द| (काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा प्रकाशित “हिंदी शब्द सागर”, भाग नौ, पृष्ठ 4690)| यह तात्पर्य सर्वथा प्रामाणिक है क्योंकि कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष रहे पण्डित कमलापति त्रिपाठी इस शब्कोश के संपादक थे| यदि आंग्ल भाषा में प्रयुक्त राहुल का ट्वीट मान भी लें तो उसके प्रकरणार्थ होंगे “सरेन्डर” (आत्म समर्पण : चीन के समक्ष)| शायद एक हर्फ़ “R” छूट गया हो| अतः वह “Surender” बन गया! इस अति सूक्ष्म वर्ण विन्यास में हिज्जे उलट-पलट गए| नतीजन वर्तनी ने अनर्थ कर दिया हो| नरेंद्र (मोदी) अर्थात (इंसानों का पालक) और “सुरेन्द्र” मायने “देवताओं का राजा|” इस कारण समूची व्यक्तिवाचक संज्ञा अवांगमुख (औंधी) हो गई| इस पर उत्फुल्ल भाजपायी उछल पड़े| कह डाला कि राहुल गाँधी ने प्रधान मंत्री को प्रमोट कर दिया| लोक के ...

Dukkham-Sukkham : लगा ये तो मेरी कहानी शुरू हो गई

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दुक्खम सुक्खम : लगा ये तो मेरी कहानी शुरू हो गई डा. पुष्पलता  अनेक बार "दुक्खम -सुक्खम" पढ़ने की इच्छा हुई क्योंकि जिस कृति को व्यास पुरस्कार मिला वह निश्चित ही अद्भुत होगी इसकी उम्मीद थी ।गूगल पर सर्च की नहीं मिली तो ममता  कालिया दी से ही पूछा । पता चला प्रतिलिपि डॉट कॉम पर है ।पढ़ना शुरू किया तो लगा ये तो मेरी कहानी शुरू हो गई है।  लड़की के जन्म पर उपेक्षा और लड़के के जन्म पर खुशी ।फिर कथा  जैसे जैसे आगे बढ़ती रही रोचकता बढ़ती रही । लेखिका  भिन्न- भिन्न स्त्री -पुरुषों  के  जीवन ,चरित्र- प्रकृति  का हर पहलू , उसके मन के भीतरी कोने में दबा दी गईं परतें ,  सौम्यता, विनम्रता, सरलता, सहजता से उघाड़ती  दिखाती और तह लगाकर रखती गई । दुलार से दुत्कार तक और कैद से उड़ान तक ,ख्वाब से हक़ीक़त तक ,इच्छा से अनिच्छा तक, मोह से विरक्ति तक ,विरक्ति से फिर मोह तक , भाव से भावशून्यता तक ,गुलामी से आजादी तक ,कविता से अकविता तक ,निवेश से ब्याज तक ,उपेक्षा से पश्चात्ताप तक ,परवरिश से उड़ान तक कुछ भी तो नहीं छूटा जो कथा में समाहित न हुआ हो ।स्त्री ,पुरुष ,शिशु ,युवा ,...

Dr. Pushplata honored : मुजफ्फरनगर की डा. पुष्पलता को मिला वाग्योग नारी प्रतिभा सम्मान

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वाग्योग चेतना पीठम वाराणसी ने अपने प्रतिष्ठित 'वाग्योग नारी प्रतिभा सम्मान वर्ष 2019  से 2020' की घोषणा की, जिसमें मुजफ्फरनगर की प्रमुख साहित्यकार डॉक्टर पुष्पलता को मुख्य रूप से सम्मानित किया गया है। वाग्योग चेतना पीठम वाराणसी महामहोपाध्याय भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी 'वागीश शास्त्री' जी के जन्मदिन पर प्रदान किये जाने वाले *वाग्योग नारी प्रतिभा सम्मान* 2019-2020' से सम्मानित होने  वाली विभिन्न क्षेत्रों की अन्य विदुषियों में डॉ सरोज गुप्ता सागर, डॉ रचना शर्मा वाराणसी, डॉ चंद्रकांता राय वाराणसी, श्रीमती कीर्ति अडारकर मुंबई,  डॉ रितु गर्ग , वाराणसी, श्रीमती नीलू मिश्रा वाराणसी, श्रीमती अंकिता खत्री, वाराणसी, डॉ विभा जोशी वाराणसी,  कु मालविका तिवारी वाराणसी,  श्रीमती आरती राठौर रतलाम भी शामिल हैं। उक्त जानकारी वाग्योग चेतना पीठम् वाराणसी के सचिव आशपति शास्त्री ने दी है।

Narendra Modi answer to Gandhi Family : नरेंद्र मोदी जवाब दें

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नरेन्द्र मोदी जवाब दें ! के. विक्रम राव विपक्षी कांग्रेस के तीन मनोनीत अगुवाओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा है कि सीमा पर क्या चल रहा है ? देश को बताएं। सोनिया गांधी का सवाल है कि कितनी और कबसे चीन भारत भूमि कब्जाए है ? राहुल गांधी ने सचेत किया कि: “मोदी जी अब छुपिए नहीं| मौन खत्म कीजिए, बहुत हो चुका है। बताइए सीमा पर क्या हुआ है?” प्रियंका गांधी वाड्रा ने मां-भाई की भावनाओं को ही अलग शैली में दुहराया। विषय था कि विस्तारवादी चीन का गत सप्ताह लद्दाख पर हुआ हमला। बीस भारतीय सैनिक शहीद हुए।  अमरीकी उपग्रह की तस्वीरों के अनुसार चीन के 43 मरे और लाशें हेलिकॉप्टर से ले जाई गईं।  मोदी को विस्तार से जवाब देना चाहिए, क्योंकि बात ऐतिहासिक है, भविष्य की सूचक भी है। वक्तव्य में राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपने अहमदाबाद आवास में झूला झुलाने से लेकर हाल ही की भेंट तक का उल्लेख भी हो।  एशिया के दो महाबली पड़ोसियों द्वारा युगों से संजोए गए रिश्तों को सब जानते हैं। मगर कम्युनिस्ट चीन और लोकतान्त्रिक भारत के नए दौर की घटनाओं की तुलनात्मक प्रगति इन तीनों कांग्रेसियों को जानना जरूरी है। ...

Good Sports Spirit : बड़ी नीक होती है खेल भावना

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बड़ी नीक होती है खेल भावना के. विक्रम राव यकीन नहीं होता,  पर यह वाकया है सच क्योंकि खेल की भावना से जुड़ा है, इसीलिए शायद एक पुरानी घटना बरबस याद आ गई।  बरलाडा (स्पेन) में विश्व दौड़ (रेस) प्रतिस्पर्धा (जनवरी 2013) हो रही थी। अंतिम दौर में केवल दो धावक बचे थे। स्पेन का चौबीस-वर्षीय इवान फर्नांडिस और केन्या (अफ्रीका) का तेईस-वर्षीय एबेल किप्रोप मुताई। ढइया (रिब्बन) छूने के करीब मुताई पहुँच गया था,  तभी उसकी स्पृहा मंद पड़ गई।  वह समझा मंजिल पार कर गया और रुक गया। ठीक पीछे स्पेन का तेज धावक ईवान था। दो ढाई फिट ही पीछे। ईवान को आभास हो गया कि मुताई को स्मृति-लोप हो रहा है। वह चीख कर बोला, “दौड़ो, बढ़ो आगे” पर मुताई स्पेनिश नहीं जानता था। किंकर्तव्यविमूढ़ सा रह गया।  तभी ईवान का दिमाग कौंधा।उसने मुताई के पीठ पर हथेली जोर से लगाई। धक्का दिया और मुताई रिब्बन तोड़कर चरम बिंदु पार कर गया। विजयी घोषित हुआ।  पेवेलियन में रिपोर्टरों ने ईवान से प्रश्नों की झड़ी लगा दी। “क्यों ऐसी हरकत की?” ईवान का उत्तर था: “मेरा मानना है कि स्पर्धा के अलावा भी जीवन में बहुत कुछ है।  जैसे...

India & China : भारत ने बताया चीन को जिम्मेदार

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विदश मंत्री एस जयशंकर ने चीन को बताया जिम्मेदार जयशंकर ने चीन के विदेश मंत्री से कहा,  गलवान में जो हुआ, आपकी सेना ने यह सब सोच-समझकर किया ल द्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के लिए भारत ने सीधे तौर पर चीन को जिम्मेदार ठहराया है। इस मामले पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच फोन पर बात हुई। विदेश मंत्री ने कहा कि सीमा पर जो कुछ भी हुआ है, उसके लिए चीन जिम्मेदार है और यह कदम उसने सोच-समझकर उठाया था। गलवान घाटी में सोमवार रात भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 सैनिक शहीद हुए। चीन के भी 40 सैनिक मारे गए हैं। इनमें यूनिट का कमांडिंग अफसर भी शामिल है। यह अफसर उसी चीनी यूनिट का था, जिसने भारतीय जवानों के साथ हिंसक झड़प की। इसी गलवान घाटी में 1962 की जंग में 33 भारतीयों की जान गई थी। भारत ने कहा, दोनों पक्ष समझौतों का सम्मान करें और एकतरफा कार्रवाई ना करें विभिन्न मीडिया के खबरों के मुताबिक दोनों पक्ष जल्द से जल्द सीमा पर तनाव खत्म करना चाहते हैं। मसले का हल न्याय संगत तरीके से निकाला जाए। ...

COW & Yogi Ji : गोमाता और योगीजी

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गोमाता और योगीजी के. विक्रम राव महंत श्री योगी आदित्यनाथ ने अपना मातृ ऋण चुका दिया| उत्तर प्रदेश का पुराना गोवध बंदी वाला कानून तीव्रतर बनाकर सदियों से हिन्दुओं पर हो रहे भावनात्मक उत्पीड़न का अंत किया| अपने 48वें जन्मदिन (5 जून 1972) पर योगीजी ने यह नायाब तोहफ़ा प्रदेश को दिया| आखिर गाय चौपाया मात्र नहीं है| माता तुल्य है|   भाजपा के पिछले अवतार (भारतीय जनसंघ) में इसके पुरोधाओं ने गोवध बन्दी के संघर्ष से अपनी राजनीति शुरू की थी। तब जनसंघ के उदीयमान नेता अटल बिहारी वाजपेयी ने लखनऊ में सत्याग्रही के रोल में जननायक बनने की मुहिम छेड़ी थी। तब स्कूली छात्र के नाते मैंने अटल जी को लालबाग चैराहे पर पुलिस की गाड़ी पर सवार होते देखा था। उनका नारा था: “कटती गौंवे करे पुकार, बन्द करो यह अत्याचार|” फिर वे जेल में रहे। तब मुख्यमंत्री थे पर्वतीय विप्र पण्डित गोविन्द वल्लभ पन्त जिन्होंने इस गोवध बन्दी के प्रदर्शनकारियों को “गांधी-हत्या के लिए दोषी-समूह द्वारा प्रेरित आन्दोलन” कहकर कुचल दिया था। उसी दिन से जनसंघ उरूज पर चढ़ता गया|  लेकिन अटल जी के बारे में एक संशय मेरा बना रहा कि केंद्र में ...