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The Madras High court has made some Sweeping Directions about the media

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The Madras High Court has made some Sweeping Directions about the media. Some of them are like the cure worse than the diseaseThere is, however, some reality that Criminals, Land Sharks, Smugglers, Communal Elements, Foreign Agents and even Murderess are hands in gloves with Mafia journalists This circular is being sent to all to elicit their opinions on it so that a compilation of it could be sent to the Union government for consideration for necessary changes in the Working Journalist Act, Press Council Act and the Trade Union Act.  The Madras High Court has asked the Government of Tamil Nadu to set up a Press Council within three months so as to check the flood of fake journalists, circulation of false news and bogus associations of journalists. The Apex Court and various High Courts have expressed deep concern over the irresponsible behaviour of some people, who work on behalf of some forces in spreading the false news.  This order was passed by the High Court in ‘S. Sekar...

UP Hathrash The king was without a crown Raja Mahendra Pratap Singh

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  राजा था​ बिना ताज का ! सपूत था सच्चा देश का!! के. विक्रम राव  भा रत की आजादी के इस अमृत महोत्सव वर्ष में भारत की सत्ता पर यदि नेहरु—परिवार जमा रहता तो? उन असंख्य जनों में जो सैकड़ों स्वाधीनता सेनानी है अभी तक गुमनामी में ही खोये रहते। गहन शोध कर राष्ट्रभक्तों ने जनसंचार माध्यमों द्वारा रोज सैकड़ों शहीदों को पेश किया। हर भारतीय गौरव महसूस करता है। उन पर चर्चा हो रही है। अत: मथुरा के इस महान विद्रोही राजा महेन्द्र प्रताप सिंह की याद को चाह कर भी सरकारें मिटा नहीं पायीं। इसीलिये हाथरस (गुरसान) नरेश घनश्याम सिंह के आत्मज आर्य पेशवा राजा महेन्द्र प्रताप सिंह की स्मृति जीवित है। भले ही अंग्रेजों द्वारा पकड़कर जेल में नहीं रखे जा सके। वे वैश्विक मंच पर जंगे आजादी की मशाल को प्रज्जवलित करते रहे। बापू, नेताजी सुभाष, वीर सावरकर, रास बिहारी बोस की भांति महेन्द्र प्रताप इस प्राचीन राष्ट्र में जालिम ब्रिटिश शासकों द्वारा किये जा रहे अमानुषिक अत्याचारों को सर्वत्र उजागर करते रहे।         एक निजी परिदृश्य द्वितीय लोकसभा से है। मेरे सांसद—संपादक पिता की वजह से हर ​ग्रीष्...

Khel Haidrabadi, what will happen In UP Election 2022

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 खेल हैदराबादी! क्या चलेगा इस बार यूपी में ? के. विक्रम राव             चन्द महीने बाद यूपी की 18वीं विधानसभा के चुनाव में इतिहास फिर भूगोल से टकरायेगा। सात दशक पूर्व यूपी के जिन्नावादी मुस्लिम लीग ने निजामशाही हैदराबाद को आजाद गणराज्य बनने में मदद की थी। यदि हो जाता तो, काजीपेट के लिये बीजा लेना पड़ता! कश्मीर में यही अवधीमुल्ले काफी हद तक कामयाब रहे थे। घाटी के मतांतरित निरीह पण्डितों की संतानों को महाराजा के खिलाफ मुल्ले उकसा चुके थे। भला हो भारतीय सेना का कि उसने वादी बचा ली। आज क्या घाटी में ऐसी विपदा टल पायेगी? संदर्भ मियां असदुद्दीन ओवैसी से है जो अवध प्रांत पर गत महीनों में कई बार चढ़ाई कर चुकें हैं।          आज का दिन (17 सितम्बर 2021) भी यादगार है। इसी दिन सात दशक पूर्व हैदराबाद को भारतीय सेना (जनरल जयंत चौधरी की कमांडरी में) निजाम को उखाड़कर तारीख की गर्त में ढकेला गया था। यूपी को तय करना होगा कि वह सेक्युलर बना रहेगा अथवा जमात के वोट से साम्प्रदायिक शासन लायेगा? अर्थात् तेलुगुभाषी हैदराबाद का असर यूपी पर कितना प...

26/11 what mumbai diaries/Expose irresponsible electronic media/ Live reporting of TV became helpful to terrorists

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  मुंबई डायरीज 26/11 : गैर जिम्मेदार इलेक्ट्रानिक मीडिया को किया बेनकाब टीवी की लाइव रिपोर्टिंग बनी आतंकियों की मददगार मुबाहिसा ः आर.के. मौर्य भा रत में 26 नवंबर 2011… मुंबई के लिए, महाराष्ट्र के लिए ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक ऐसी रात थी, जिसमें टेलीविजन पर इंसानियत को गोलियों से छलनी होते हुए देखा, बम विस्फोट में भाईचारे के चीथड़े उड़ते देखे। देश की अखंडता को चुनौती देते हुए आतंकवादियों के हाथों सैकड़ों मासूम लोगों को मरते देखा।  उस रात और उसके बाद के करीब 60 घंटों तक दुनिया ने देखा कि पाकिस्तान जैसा मामूली देश, हिंदुस्तान से नफरत करने के नाम पर उनकी सेना और आतंकवादियों के ज़रिये कैसे मुंबई जैसे महानगर पर हमला करता है और वहशत का एक ऐसा अश्लील नृत्य होता है, जिसे देखकर पत्थरदिल लोग भी पिघल कर रो पड़े थे। इसी पूरे मंजर को दिखाते हुए नौ सितंबर को प्रदर्शित हुई वेब सीरीज "मुंबई डायरीज 26/ 11" में निर्देशक निखिल अडवाणी और निखि...

Dr.Sudha Rani honoured with Radhakrishnan International Award 2021 राधाकृष्णन इंटरनेशनल अवार्ड

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 डॉ0 सुधा रानी सिंह को मिला  डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटरनेशनल  अवार्ड ऑफ ऑनर - 2021                          शिक्षा के क्षेत्र में  राष्ट्रीय शिक्षा नीति - 2020 के प्रभावी  क्रियान्वयन और  वर्चुअल  एजुकेशन में उल्लेखनीय योगदान देने के लिए  शिक्षा  क्षेत्र की अग्रणी  एवं ख्यातिलब्ध  एजुकेसिओ वर्ल्ड  द्वारा डॉ0 सुधा रानी सिंह, डी0 लिट्0, एसोसिएट प्रोफेसर एवं हिंदी विभागाध्यक्ष, शहीद मंगल पांडे  गवर्नमेंट गर्ल्स पीजी कॉलेज, माधवपुरम, मेरठ  को डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन इंटरनेशनल अवार्ड ऑफ़ ऑनर  2021 के लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड एवं बेस्ट एसोसिएट प्रोफेसर ऑफ द ईयर- 2021 दो  श्रेणियों में चयनित कर सम्मानित किया गया।डॉ0 सिंह इटावा जनपद की तहसील सैफई के अंतर्गत ग्राम उसरई  की मूल  निवासिनी हैं  तथा रिटायर्ड जेल सुपरिंटेंडेंट विजय सिंह कठेरिया की पत्नी हैं । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मालदीव सरकार के मा0 शिक्षा राज्य मंत्री डॉ0 अब्दुल्ला र...

Mayawati will not contest Mukhtar Ansari from BSP in UP

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 मायावती मुख्तार अंसारी को बसपा से चुनाव नहीं लड़ाएंगी  यूपी: बसपा सुप्रीमो मायावती ने बाहुबली विधायक  मुख्तार अंसारी को इस बार चुनाव नहीं लड़ाने का ऐलान किया है। उनके स्थान पर मऊ से बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भीम राजभर चुनाव लड़ेंगे। मायावती ने ट्वीट कर कहा है कि पार्टी ने फैसला लिया है कि विधानसभा चुनाव में किसी बाहुबली या माफिया को चुनाव में लड़ाया जाए इसलिए यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी के प्रभारी भी उम्मीदवारों का चयन करते समय इसका ध्यान रखें।  ताकि सरकार बनने के बाद ऐसे लोगों पर कार्रवाई करने में कोई दिक्कत न हो।   उधर, सियासी गलियारों में दूसरी चर्चा है। दरअसल अभी कुछ दिन पहले ही मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिगबतुल्लाह अंसारी ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया था। उनके बेटे ने भी सपा का दामन थामा था। यही कारण है कि बसपा सुप्रीमो मायावती मुख्तार अंसारी से बेहद नाराज हैं। यह भी माना जा रहा है कि मुख्तार अंसारी भी अब बसपा छोड़कर सपा में जाने वाले थे उनके इस ऐलान से पहले ही मायावती ने अपने पुराने अंदाज में पहले ही...

13 Teachers honoured with Radhakrishnan award in UP

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 13 शिक्षक राधाकृष्णन अवार्ड से सम्मानित प्रणवाक्षर साहित्यिक, सांस्कृतिक, सामाजिक संघ गाजियाबाद उत्तर प्रदेश  द्वारा  शिक्षक दिवस पर देश की 13 शिक्षिकाओं को भारतरत्न सर्वपल्ली डॉ राधाकृष्णनन  अवार्ड से नवाजा  गया। सम्मान समारोह में संघ की अध्यक्ष प्रमुख साहित्यकार  डॉ. पुष्पलता (मुजफ्फरनगर) द्वारा मध्य प्रदेश भोपाल से महिला लेखक संघ की अध्यक्ष साहित्यकार  एवं पूर्व प्रवक्ता   अनिता सक्सेना, पूर्व प्रवक्ता एवं साहित्यकार  डॉ क्षमा पांडेय, हिमाचल  प्रदेश मंडी से प्रवक्ता  नीता सिंह, फरीदाबाद गुड़गांव से   प्रवक्ता डॉ नीतू सिंह, मुजफ्फरनगर से   प्रवक्ता डॉ वर्चसा सैनी, साहित्यकार   एवं पूर्व  शिक्षिका विजया गुप्ता, साहित्यकार एवं पूर्व शिक्षिका मीरा भटनागर,  मेरठ उत्तर प्रदेश  से प्रवक्ता साहित्यकार -आलोचक  डॉ अलका वशिष्ठ, गुड़गांव हरियाणा से प्रवक्ता एवं लेखिका लता यादव, रतलाम मध्य प्रदेश से  शिक्षिका एवं लेखिका आरती राठौर,  टोरेंटो से साहित्यकार शिक्षक कृष्णा शर्मा, बरला...

statue of Chirag Paswan`s Father Ram Vilas Paswan, Bihar, Dalit

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दिवंगत रामविलास पासवान का नाम विवादित न बनाएं ! चिराग ने 12 जनपथ में लगाई रामविलास पासवान की प्रतिमा मुबाहिसा : आर.के. मौर्य   लो क जनशक्ति पार्टी (एलजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान ने अपने पिता राम विलास पासवान के नाम से आवंटित सरकारी बंगला 12 जनपथ मेंदिवंगत पिता राम विलास पासवान की प्रतिमा लगवा दी है। इस बंगले को खाली करने के लिए सरकार की ओर से नोटिस जारी किया हुआ है। इस बंगले में राम विलास पासवान ने करीब तीन दशक अपने परिवार के साथ बिताए थे। अब यह बंगला  केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को आवंटित किया जा चुका है। चिराग पासवान इस बंगले को खाली नहीं करने की जिद पर अड़े हैं। हालांकि चिराग की यह जिद रामविलास पासवान के आजीवन राजनीतिक सिद्धांतों के विपरित है। रामविलास पासवान  पूरे जीवन राजनीति में शुचिता का पालन करते रहे। 2009 में जब वह चुनाव हार गए तो कुछ माह तक सांसद नहीं रहते हुए उन्होंने इस बंगले का मार्किट रेट से भुगतान किया था। बाद में वह राज्यसभा सदस्य चुन लिए गए थे।        दिवंगत पासवान की जो प्रतिमा लगाई है, उसमें छाती तक...

‍Babar-Panipat-Mugal-Samarkand-Babri-Masjid-the-Empire

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 बाबर वास्तव में हीरो था या लुटेरा ? मुबाहिसाः आर.के. मौर्य  भा रत में इन दिनों एक वेब सीरीज "द एंपायर" चर्चा में है, जिसमें भारत में मुगल साम्राज्य के संस्थापक आक्रमणकारी बाबर का एक अलग रूप दिखाकर कुछ महामंडन करने की कोशिश करने का आरोप लग रहा है। बाबर वास्तविकता में हीरो था या लुटेरा आक्रमणकारी, इसको लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ी हुई है। इतिहास के पन्नों पर भी बाबर की वास्तविकता को लेकर सटीक दावा नहीं किया जा सकता है, चूंकि इतिहासकारों ने कहीं न कहीं छलकपट करके अपने व्यक्तिगत विचारों का घालमेल करके सत्यता को छिपाने का काम किया है? वेब सीरीज में भी यह साफ दिखता है। सीरीज के पहले सीजन के आठों एपीसोड में कहीं भी उनके द्वारा कसबों, जनपदों को लूटने के दौरान की गई क्रूरता नहीं दिखाई गई है, जबकि माना जाता है कि काबूल का शासक बनने से पहले वह निरंतर लूटमार करते हुए अपने साथ हजारों की संख्या में शामिल सैनिकों का भरण पोषण करता रहा। डिजनी प्लस हॉटस्टार सोशल मीडिया पर विवादों में फंसता दिख रहा है. दरअसल, मुगलों के इतिहास पर बने डिजनी के एक्सक्लूसिव सीरीज द एम्पायर (The Empire web seri...

Video: कथा में अनोखा आशीर्वाद

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Sister's pain (Song Video)

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ढीली पड़ती रिश्तों की डोर से दुखी बहन की वेदना बयान करता गीत।

Happy independence day (Video)

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Happy Independence day : Memorial flag hosting (Video)

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Punjab : नवजोत उभरे, कैप्टन पस्त पड़े

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 प्रदेश अध्यक्ष बनते ही नवजोत सिद्धू की ताकत बढ़ी पं जाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार से इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक हाशिए पर दिख रहे नवजोत सिंह सिद्धू जैसे ही पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बनाए गए तो उनकी ताकत उभरी है। उन्होंने अपनी इस ताकत को दिखाने के लिए अमृतसर में श्री दरबार साहिब में 62 विधायकों के साथ माथा टेका। जिससे साफ है की कैप्टन अमरेंद्र सिंह उनके सामने पस्त हो गए हैं। 83 विधायकों वाली कांग्रेस में 62 सिद्धू के साथ होने का मतलब साफ है कि कैप्टन अमरेंद्र निरंतर कमजोर हो रहे हैं  और सिद्धू  की ताकत निरंतर बढ़ रही है। सुनील जाखड़ भी दिखे साथ नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी का प्रधान बनाए जाने के बाद बुधवार को अमृतसर में शक्ति प्रदर्शन किया। कांग्रेस के 83 में से 62 विधायकों के साथ उन्होंने श्री दरबार साहिब में माथा टेका। उनके साथ पूर्व पंजाब कांग्रेस प्रधान सुनील जाखड़ भी मौजूद रहे। श्री दरबार साहिब में नतमस्तक होने के बाद वह जलियांवाला बाग और श्री दुर्गियाणा मंदिर भी पहुंचे और माथा टेका। यह पूरी कसरत नए पंजाब कांग्रेस अध्‍यक्ष सिद्धू का 'पाव...

Eid Ul Adha : ईद पर गमजदा रहे कई मुसलमान

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 ईद पर गमजदा रहे कई मुसलमान !! के. विक्रम राव           अ रब, पठान, मलमो तथा अन्य सुन्नी—बहुल फिरकों के मुल्कों में ईद—उल—अजाह मनाया तो गया, मगर इस त्याग, प्रेम और बलिदान के प्रतीक पावन पर्व पर आगजनी, खूरेंजी, बमधमाका और सहअकीदतमंदों पर हिंसा बेतहाशा हुयी। काबुल के राष्ट्रपति भवन पर नमाज अता करते हुए सदरे जम्हूरिया अशरफ घनी तथा पैगंबर के कई अनुयायियों पर तालिबानियों ने राकेट और गोले दागे। ईस्लामी स्टेट आफ ईराक एण्ड सीरिया के आतंकियों ने अपनी ''अमाक'' संवाद समिति द्वारा प्रसारित किया था कि इन गद्दारों पर हमला जायज है। अमाक एजेंसी का नामकरण किया पत्रकार बारा काडेक उर्फ रायन मशाल ने। वह अमेरिकी बमबारी में मारा जा चुका है। संवाद समिति का नाम भी महत्वपूर्ण है। दक्षिण तुर्की के अमूक घाटी के मजहबी स्थल से जुड़ा है। वहीं इन इस्लामी गणराज्यों से शिया, इबादी, अहमदिया, आगा खान के शिष्यों आदि के संहार का निर्देश जारी होता है। इसी के खलीफा अबु बकर अल बगदादी यदाकदा जलवा अफरोज हुआ करते थे। इन्हें बाद में अमेरिकी सैनिकों ने मार डाला।        ईद के ...

News Peper : चांद सा हो मुख पृष्ठ भी !

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चांद सा हो मुख पृष्ठ भी ! के. विक्रम राव      मा नव के मुखड़े की भांति अखबार का प्रथम पृष्ठ उसका परिचायक होता है। अत: हम श्रमजीवी पत्रकारों की अनवरत कशमकश रहती है कि दिलचस्प रीति से आकर्षक समाचार द्वारा पाठक के चितवन को खींच लें और पढ़ने पर बाध्य कर दें। अर्थात ऐसा हो फ्रंटपेज। अब इसके लिए जरूरी है कि उस अवसर की खबर भी तो जोरदार हों !  इसी कारण से रिपोर्टर और सबएडिटर अमूमन नकारात्मकता वाली बात को खोजता है क्योंकि वही खबर बनती है। मगर ऐसा सदैव नहीं होता है।   मसलन आज ही का दिन (20 जुलाई 1969) था, जब भूमंडल डुलानेवाली इतनी बड़ी घटना हुई, जो न इसके पहले कभी हुई थी, न इसके बाद आज तक हुई है। स्थल था विश्व के बाहर, अंतरिक्ष में। दूर शशिलोक पर अमेरिकी पायलेट नील आर्मस्ट्रांग ने चांद पर पैर रखा था।      दुनिया से वह जीते जी परलोक में चला गया था। भले ही उसकी इस हरकत के परिणाम से शायर और कवियों में, प्रेमी युगलों में ​काफी नीरसता व्यापी थी। नैराश्य भी। अप्राप्य अब हासिल हो रहा था।  वह रविवार बड़ा यादगार रहा। सर्वोत्तम खबरिया रात थी। वह रि...

AFGANISTAN : अफगानिस्तान में क्या फिर लौटेगा तालिबानी आतंक ?

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अफगानिस्तान :  क्या फिर लौटेगा तालिबानी आतंक ? के. विक्रम राव प श्चिमी हिमालय में हिन्दकुश पर्वत  शृंखला पर बसा अफगानिस्तान आज भारत के लिए दहशत फैला रहा है। लुटेरे अहमदशाह दुर्रानी ने 1757 के दौर में हिन्दुस्तान के लिए आतंक पैदा किया था। आज तालिबानी अफगानिस्तान से फिर पश्चिमी सीमावर्ती भारत के सामने खतरा नजर आ रह है। आखिर ऐसा क्यों हुआ और अब क्या मुमकिन है? ये प्रश्न आज भारत को परेशान कर रहे हैं। अगर अफगानिस्तान पर फिर से तालिबान का नियंत्रण हो जाता है, जिसकी आशंका अमेरिकी सेनाओं की वापसी के बाद व्यक्त की जा रही है तो भारत के लिए यह स्थिति कितनी विषम होगी, इसकी फिलहाल कल्पना भी नहीं की जा सकती। किसके लिए क्या खतरा ? 1. भारत के लिए...      भारत ने इस इस्लामी क्षेत्र में ग्यारह हजार करोड़ डालर का निवेश कर रखा है। उसे अब ये तालिबानी हथिया लेंगे। इनमें हजार करोड़ डालर की लागत से निर्मित भव्य संसद भवन भी है। इसका लोकार्पण नरेन्द्र मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती पर 25 दिसंबर 2015 को किया था। इसके अध्यक्ष जनाब मीर रहमान रहमानी का निर्वाचन क्ष...