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काला धन लाने को एसआईटी गठित ‌किए जाने का मोदी सरकार का फैसला सराहनीय है। उम्मीद की जानी चाहिए क‌ि विदेशों में जमा और देश में छिपा काला धन सरकार निकालने में कामयाब होगी।
विवादित मुद्दों से बचें मोदी मोदी सरकार में प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्यमंत्री जितेंद्र सिंह का जम्मू-कश्मीर में लागू संविधान के अनुच्छेद 370 पर देश में बहस कराने का बयान जल्दबाजी में विवादित मुद्दों को उछालने वाला है, जो कतई सही नहीं कहा जा सकताहै। यह सभी मानते हैं कि  राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ के मुख्य एजेंडे में अनुच्छेद 370, अयोध्या में विवादित स्थल पर राम मंदिर का निर्माण, समान नागरिक संहिता हैं। नरेंद्र मोदी जी को चाहिए कि इन विवादित मुद्दों से बचकर जनता के बीच दिए गए विकास के मुद्दे पर पूरी शिद्दत से काम करें। ये मुद्दे उनको मुख्य उद्देश्य से भटका सकते हैं। देश की जनता को उनसे काफी उम्मीदें है, ऐसे में मोदी जी को इस तरह के मुद्दों को हवा देने से बचना चाहिए। 
चिराग पासवान को लख-लख बधाइयां लोक जनशक्ति पार्टी को पिछले पांच वर्षों में एक के बाद एक हार देखने को मिली, लेकिन इस बार माननीय रामविलास पासवान के सुपुत्र श्री चिराग पासवान के  भाजपा के साथ एनडीए का हिस्सा बनने के निर्णय ने पार्टी को नई ताकत दी है, इसके लिए उन्हें लख-लख बधाइयां। मैं पासवान जी से उनके दिल्ली पहुंचने पर मिला और साथ ही चिराग को भी बधाई दी।  मैं आदरणीय पासवान जी को अपना राजनीतिक गुरु मानता हूं और पिछले 25 वर्ष से बराबर उनके साथ जुड़ा हूं। पार्टी में राष्ट्रीय सचिव होने के नाते जो भी जिम्मेदारी मिलती है, उसको पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाने की कोशिश करता हूं। इन पांच वर्षों में पार्टी के कमजोर होने से कार्यकर्ता भी उदासीन हो रहे थे, लेकिन इस बार मिली जीत ने उनमें नया जोश भर दिया है। पार्टी सात सीटों पर चुनाव लड़ी और उनमें छह पर जीत हासिल की। सातवीं सीट भी काफी कम अंतर से हारे हैं। यह एक ऐतिहासिक सफलता है। 12 जनपथ, नई दिल्ली यानि आदरणीय रामविलास पासवान जी का आवास और ...
उम्मीदों पर खरे उतरेंगे मोदी मैंने संसद के केंद्रीय कक्ष में एनडीए के चुने गए नेता और अगले दिनों में प्रधानमंत्री बनने वाले नरेंद्र मोदी का भाषण सुना। पूरे चुनाव में जहां मुझे उनका भाषण पूरी तरह राजनीतिक लगा, वहीं उनका भाषण गैरराजनीतिक दिल से दिया गया मार्मिक लगा। उनका इस दौरान भावुक होकर अपनी पार्टी के प्रति निष्ठा का इजहार भी एक संस्कारित व्यक्तित्व का परिचय कराता दिखा।  जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के तौर पर अपनी सरकार का दर्शन पेश करते हुए कहा कि सबको साथ लेकर सबका विकास करने के मकसद के साथ उनकी सरकार गरीबों के लिए जिएगी।गरीबों की सुनेगी और गरीबों को समर्पित होगी, तो उससे अब तक की उनकी जगजाहिर छवि के विपरित एक सधा हुआ नेता सामने दिखाई दिया। मोदी ने जब कहा कि आखिरकार सरकार किस के लिए है। सरकार वही है, जो गरीबों के लिए सोचे। जो गरीबों की सुने। जो गरीबों के लिए जिए और  उन्होंने जोर देकर कहा कि मेरी सरकार देश के गरीबों को समर्पित है। देश के कोटि-कोटि युवको...
कुछ वो झुकें,कुछ हम आगे बढ़ें!   प्रमुख दलित चिंतक श्री चंद्रभान प्रसाद जी का मैंने एक समाचार पत्र में लेख पढ़ा, जिसमें उन्होंने दिल्ली से सटे गाजियाबाद जिले में ट्रॉनिका सिटी औद्योगिक क्षेत्र में स्कूली बैग बनाने वाली एक फैक्ट्री का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां सोलह कर्मचारियों में से बारह महिलाएं थीं, जिनमें से ज्यादातर सिलाई मशीन चलाती थीं। महिलाओं की जातिगत पृष्ठभूमि के बारे में पूछने पर पता चला कि उन बारह महिलाओं में से तीन ब्राह्मण थीं। उनमें से एक हरियाणा के महेंद्रगढ़, दूसरी बिहार के गोपालगंज और तीसरी दिल्ली के आजादपुर से थीं। नौ गैर-ब्राह्मण महिला कर्मचारियों में से दो उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की राजपूत थीं और एक बिहार के जमुई की बनिया जाति की थीं। यानी पचास फीसदी महिला कर्मचारी उच्च जाति से थीं। बाकी छह में से चार उत्तर प्रदेश और बिहार की पिछड़ी जाति से थीं और बाकी दो में से एक मुस्लिम और दूसरी दिल्ली की ईसाई थीं। श्री चंद्रभान प्रसाद जी ने एक और उदाहरण देकर बताया कि डेढ़ वर्ष पहले एक लोकप्रिय टीवी पत्रकार ने दिल्ली के सुरक्षा...
उत्तर प्रदेश में बीएल जोशी जी को दुबारा राज्यपाल बनने पर हार्दिक बधाई।   चिकित्सकों को अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए, लेकिन उनको नेताओं की नाराजगी लोगों के जीवन से खिलवाड़ करके प्रकट नहीं करनी चाहिए।
   पासवान ने एनडीए में शामिल होकर कोई गलती नहीं की वर्ष 2002 के गुजरात दंगे को लेकर 12 साल पूर्व राजग से अलग होने वाले लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान ने कहा कि एनडीए में शामिल होकर उन्होंने कोई गलती नहीं की क्योंकि कांग्रेस और आरजेडी के साथ गठबंधन को लेकर अनिश्चितता के बीच उन्हें जिस तरह से अपमानित और किनारे कर दिया. इसके बाद अपनी पार्टी के हित को ध्यान में रखकर उन्हें यह फैसला करना पड़ा.पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पासवान ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत आदर्श भावना में बहकर धर्मनिरपेक्षता और पुराने गठबंधन (आरजेडी और लोजपा का) के नाम पर कांग्रेस और आरजेडी के साथ समझौते के लिए समय को बर्बाद किया जबकि लोजपा संसदीय बोर्ड का कहना था कि उन्हें बिना समय गंवाये यूपीए या एनडीए में जाने को लेकर निर्णय ले लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि उन्हें यह अंदाजा हो गया था कि इसी तरह गठबंधन के मामले को खींचकर चुनाव की घोषणा तक ये दोनों दल ले जाएंगे और अंत में लोजपा को दो-तीन सीट देने की पेशकश कर उससे कहते कि उन सीटों पर चुनाव लड़ना है तो ...
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कहानी : मजदूर की विरासत

कहानी---- मजदूर की विरासत आर.के मौर्य दि ल्ली से सटे जनपद गाजियाबाद के एक गांव वैली में शाम के समय एक कृषक मजदूर बलवंत के घर में उसकी पत्नी रामरती प्रसव पीड़ा से कराह रही थी। बलवंत झोपड़ी के बाहर काफी तनाव में इधर-उधर घूम रहा था। बलवंत के पिता रामसिंह के माथे पर भी चिंता की लकीरें साफ दिख रही थीं। यह चिंता घर में संतानोत्पत्ति से अधिक इसके लिए होने वाले खर्च को लेकर थी। घर में एक रुपया भी नगदी नहीं थी। दाई बच्चा पैदा होेने पर पैसे मांगेगी तो कहां से देंगे, इसको लेकर रामसिंह ने बलवंत से कहा कि बेटा जाकर घर में रखे बर्तन बेचकर या फिर गिरवी रखकर कुछ पैसे ले आओ। बलवंत घर के बर्तन एक बोरे में लेकर गया और साहूकार के यहां से उनकेबदले 600 रुपये ले आया। झौपड़ी के अंदर से दाई काफी मायूसी में आई, उसने पुत्र पैदा होने के साथ ही रामरती के मरने की सूचना भी दी, जिसपर बलवंत बिलख पड़ा, जैसे उसपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। बलवंत अपने पिता रामसिंह से लिपटकर रोते-रोते बेहोश हो गया। प्रसव खर्च को आए पैसे रामरती के अंतिम संस्कार में काम आए। रामरती की मौत के बाद बच्चे को पालने की जिम्मेदारी बलवंत की म...
राजनीति में वंशवाद का नारा बेमायने        --राजेन्द्र मौर्य---- देश के राष्ट्रपति रहे हैं ज्ञानी जैलसिंह। उनके पौत्र इंद्रजीत सिंह मेरे अच्छे मित्रों में हैं। राष्ट्रपति पद से हट जाने के बाद एक बार मैं ज्ञानी जी के पास बैठा था। मैंने उनसे पूछा कि क्या बात है, कि देश में अब हर चुनाव में गांधी-नेहरू परिवार को गैर कांग्रेसी दल राजनीति से बेदखल करने की बात करते हैं !,  इसपर ज्ञानीजी ने बहुत ही सदा हुआ जवाब मुझे दिया कि ऐसा करने से किसी को कौन रोक रहा है, यह तो लोकतंत्र है जनता जब चाहे जिसको राजनीति से बाहर कर सकती है। लोग उनको वोट देना बंद कर दें, तो यह परिवार अपने आप बाहर हो जाएगा। इन दिनों लोकसभा चुनाव 2014 की तैयारी शुरू हो गई है। सभी दलों ने अपने-अपने तरीके से चुनीवी अभियान की शुरूआत कर दी है। चुनावी अभियान में एक बार फिर भाजपा अपने नए प्रत्याशी नरेंद्र मोदी को लेकर मैदान में उतरी है। नरेंद्र मोदी ने भारत को वंशवाद से मुक्ति के लिए कांग्रेस को हराने का आह्वान किया है, लेकिन उनको...
अब अन्ना की समझ में आ गया होगा कि अरविंद केजरीवाल ने लोकपाल को लेकर आंदोलन में उनको कायदे से इस्तेमाल किया है।
दिल्ली में केजरीवाल की आप को मिल रही सफलता ने भाजपा और कांग्रेस को आईना दिखाया है कि विकल्प अगर मिले तो, कहीं भी यह चमत्कार हो सकता है, जो प्रजातंत्र को मजबूती देगा। 
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अलविदा मंडेला अजीब इत्तेफाक है कि नेल्सन मंडेला ने अंतिम सांस भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर ली है। भले ही जाहिर तौर पर नेल्सन मंडेला को महात्मा गांधी के विचारों के अधिक नजदीक माना जाता हो, लेकिन  वर्ग भेदभाव का उनका संघर्ष बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर के संघर्ष से अधिक मेल खाता है। मंडेला ने दक्षिण अफ्रीका में गौरे-काले के बीच भेदभाव और वर्ग संघर्ष में अगुवाई की और अपने जीवन के जहां 27 वर्ष जेल में गुजारे वहीं जीवन भर काले रंग वाले लोगों को सम्मान दिलाने के लिए तमाम कुर्बानी दी, जिसका सकारात्मक परिणाम ही माना जाएगा कि उनके संघर्ष से निकली आजादी और नए विचारों की लौ ने अमेरिका में बराक ओबामा जैसे काले रंग वाले व्यक्ति को भी रोशनी देने का काम किया। अमेरिका के राष्ट्रपति के रूप में बराक ओबामा ने साबित किया कि रंग या किसी भी वर्ग भेदभाव से किसी भी व्यक्तित्व को अपनी कार्य क्षमता साबित करने से नहीं रोका जा सकता है। किसी को भी बिना भेदभा...
आरुषि के मां-पिता की दलीलों को सुना जाना चाहिए ! आरुषि मर्डर मिस्ट्री में उसके मां-बाप को उम्रकैद की सजा सुना दी गई। इस बाबत राजेश तलवार के भाई दिनेश तलवार के तर्क मैने टीवी पर सुने, जिसको सुनकर मुझे लगता है कि कहीं न कहीं राजेश तलवार और नुपूर तलवार को इस मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट का विरोध करना ही महंगा पड़ गया है। मुझे एक बार का वाक्या याद आता है कि उत्तर प्रदेश में ही एक व्यापारी की हत्या हो गई थी। ‌उस हत्या के खुलासे और हत्यारों को पकड़ने के लिए व्यापारी का एक दोस्त काफी पैरवी कर रहा था। जब पुलिस हत्या का खुलासा करने में नाकाम हो रही थी और मृतक व्यापारी के दोस्त की पैरवी से परेशान थी तो पुलिस ने इस केस का खुलासा करते हुए निर्दोष दोस्त को ही कातिल बनाकर जेल भेज दिया। नतीजा यह हुआ कि उसको उम्रकैद हो गई और व्यापारी का परिवार नगर छोड़कर कई दूर दूसरे शहर में जाकर बस गया। उम्रकैद की सजा के करीब 10 वर्ष जेल में गुजारने के बाद शहर में चर्चा हुई कि हत्या तो...
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MERI BETI AVANTIKA MAURYA KE SATH USKE SHATHI
देश के गृह मन्त्री श्री सुशील  कुमार शिन्दे के लिए आप की चुनावी सभा में अपशब्दो की हर स्तर पर निंदा की जानी चाहिए चुनाव आयोग को आरोपियो के खिलाफ कार्यवाही करनी चाहिए
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थाई राजा की श्रद्धा को नमन  भगवान बुद्ध के महोबधि मंदिर की गुंबद को सोने से मढ़ाई के लिए मैं थाईलैंड के राजा को बधाई देता हूं। यह आस्था और श्रद्धा का मामला है उनकी भगवान बुद्ध के प्रति आस्था और श्रद्धा को मैं नमन करता हूं। हालांकि आस्था और श्रद्धा पर कोई सवाल नहीं उठाना चाहिए, लेकिन फिर भी इतना स्वर्ण या मुद्रा को मंदिर की गुंबद की मढ़ाई के लिए व्यय करना भगवान बुद्ध के विचार के अनुरूप कतई नहीं माना जा सकता है। भगवान बुद्ध ने तो यह सब त्यागा है और मूर्ति हो या इस तरह पूजा पाठ के नाम पर आडंबर को गलत माना है।  परंतु यह भी कटू सत्य है कि मानव स्वभाव अपनी आस्था और श्रद्धा को प्रकट करना होता है और भगवान या किसी महापुरुष के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए मूर्ति, प्रतिमा या फिर उनके नाम पर ‌कोई स्थल का निर्माण करना सबसे सुलभ जरिया है।  मैं थाईलैंड के राजा की श्रद्धा को नमन करते हुए बौद्धों से अपील करूंगा कि वे भगवान बु्द्ध के संदेश को पूरे देश में तेजी से फैलाने का काम करें।
मायावती का दलित विरोधी ढोल बसपा की अध्यक्ष मायावती जी जब भी मीडिया से बात करती हैं, उनकी शुरूआत में दलित विरोधी ढोल पीटना एक आदत बन गई है। उन्होंने कहा कि मान्यवर कांशीराम के प्रेरणा स्थल के बंगले और उनके भाई तथा उनकी संपत्ति को लेकर  जारी खबर पूरी तरह दलित विरोधी मानसिकता का प्रमाण है। कुछ हद तक उनका यह आरोप सच हो सकता है, लेकिन क्या उनको यह नहीं बताना चाहिए कि सत्ता में आने से पहले तक साधारण परिवार कैसे अरबोपति बन गया है? उनके और उनके परिजनों के नाम यह अकूत संपत्ति कहां से आ गई है? अब वह कांग्रेस को कोस रही हैं, तो फिर पिछले  9 वर्षों से कांग्रेस की सरकार को समर्थन देने का काम क्यों कर रही हैं? या फिर भोले-भाले दलितों को गुमराह करने के लिए ही उनको डॉ. अंबेडकर या फिर अब मान्यवर कांशीराम की याद आती है। वह 2007 में उत्तर प्रदेश के सभी वर्गों के सहयोग से पूर्ण बहुमत की मुख्यमंत्री बनी तो उनको लगा कि अब वह देश की प्रधानमंत्री बन जाएंगी, जिसके लिए उन्होंने और उनके कुछ खास चहेतों ने 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान खूब मुंगेरी लाल ...
राहुल गांधी ने ठीक कहा मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों पर पाक खुफिया एजेंसी आईएसआई की नजर संबंधी बयान मुजफ्फरनगर दंगे को लेकर छप रही तमाम खबरों के आधार पर दिया गया ङै। इस तरह की रिपोर्ट मुजफ्फरनगर के समाचार पत्रों में छप चुकी है। यह बात पूरी तरह सही है कि उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी के सखा अमित शाह दंगों के जरिए ही नरेंद्र मोदी की सफलता का सपना देख रहे हैं, जो कभी पूरा नहीं होगा।