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Motivational Story : बच्चे को मिला एक रुपये में ईश्वर

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सिर्फ एक रुपया आठ साल का एक बच्चे ने 1 रूपये का सिक्का मुट्ठी में लेकर एक दुकान पर जाकर कहा, क्या आपकी दुकान में ईश्वर मिलेंगे ? दुकानदार ने यह बात सुनकर सिक्का नीचे फेंक दिया और बच्चे को निकाल दिया। बच्चा पास की दूसरी दुकान में जाकर 1 रूपये का सिक्का लेकर चुपचाप खड़ा रहा ! दुकानदार ने पूछा -- ए लड़के.. 1 रूपये में तुम क्या चाहते हो? मुझे ईश्वर चाहिए। आपकी दुकान में हैं? दूसरे दुकानदार ने भी भगा दिया। लेकिन, उस अबोध बालक ने हार नहीं मानी। एक दुकान से दूसरी दुकान, दूसरी से तीसरी, ऐसा करते करते कुल चालीस दुकानों के चक्कर काटने के बाद एक बूढ़े दुकानदार के पास पहुंचा। उस बूढ़े दुकानदार ने पूछा, तुम ईश्वर को क्यों खरीदना चाहते हो,  क्या करोगे ईश्वर लेकर ? पहली बार एक दुकानदार के मुंह से यह प्रश्न सुनकर बच्चे के चेहरे पर आशा की किरणें लहराईं৷ लगता है इसी दुकान पर ही ईश्वर मिलेंगे ! बच्चे ने बड़े उत्साह से उत्तर दिया, --इस दुनिया में मां के अलावा मेरा और कोई नहीं है। मेरी मां दिनभर काम करके मेरे लिए खाना लाती है। मेरी मां अब अस्पताल में हैं। अगर मेरी मां मर ...

IAS Rani Nagar(Video): इस्तीफा मंजूर नहीं होने पर और शोषण की आशंका

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आईएएस रानी नागर का इस्तीफा नामंजूर, यूपी कैडर करने की सिफारिश  एक जानकारी के मुताब‌िक भाजपा राज्यसभा सांसद सुरेन्द्र सिंह नागर और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल सिंह गुर्जर के दबाव के चलते हरियाणा सरकार ने आईएएस अधिकारी रानी नागर  का इस्तीफा नामंजूर कर दिया है। साथ ही रानी नागर का हरियाणा कैडर बदलकर यूपी कैडर किए जाने के लिए भी केंद्र सरकार को सिफारिश कर दी है। सुरेन्द्र नागर ने इस मामले में गत दिनों नागर ने कहा था कि रानी नागर को इंसाफ मिलेगा और उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया जाएगा। रानी नागर चाहती हैं अपना इस्तीफा स्वीकार कराना हरियाणा सरकार द्वारा इस्तीफा नामंजूर किए जाने के विपरित पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा सुप्रीमो मायवती के पैतृक गांव बादलपुर की बेटी रानी नागर का कहना है कि अगर मेरा इस्तीफा मंजूर नहीं होता है तो मेरा और शोषण होता रहेगा। उन्होंने अपना इस्तीफा स्वीकार नहीं होने के लिए आंदोलन और बिरादरी के जरिए हरियाणा सरकार पर दबाव बनाने वाले सभी लोगों से अनुरोध किया है कि वे इसके लिए कोई प्रयास न करें। रानी नागर का मानना है कि यदि उनका इस्तीफा स्व...

Spanish flu was more dangerous than Corona (Video) : स्पेनिश फ्लू कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक था

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कोरोना और स्पेनिश फ्लू के लक्षण समान,  1918 में हुई थीं करोड़ों मौतें दुनिया में 1918 में स्पेनिश फ्लू नाम की महामारी से 50 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हुए थे और करीब दो करोड़ से पांच करोड़ के बीच लोगों की जान चली गई थी और यह आंकड़े प्रथम विश्वयुद्ध में मारे गए सैनिकों व नागरिकों की कुल संख्या से बहुत ज्यादा हैं।  पूरी दुनिया में इस समय कोरोनावायरस महामारी की वजह से कोहराम मचा है और बड़ी-बड़ी सरकारें इसके सामने बेबस नजर आ रही हैं, लेकिन वर्ष 1918 में भी एक वायरस ने भयानक तबाही मचाई थी और इसकी भयावहता का अनुमान लगाना भी मुश्किल है। स्पेनिश फ्लू नाम की इस महामारी से दुनियाभर के 50 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हो गए थे और करीब दो से पांच करोड़ के बीच लोगों की जान चली गई थीं और यह आंकड़े प्रथम विश्वयुद्ध में मारे गए सैनिकों व नागरिकों की कुल संख्या से ज्यादा हैं। स्पेनिश फ्लू ने हालांकि दो वर्षों यानि 1920 तक कोहराम मचाया था, लेकिन अधिकतर मौतें 1918 के तीन क्रूर महीने में हुई थी। इतिहासकारों का अब मानना है कि स्पेनिश फ्लू के दूसरे दौर में हुई व्यापक ज...

Ramayan : रामायण में भोग नहीं, हर पात्र त्याग की मूर्ति है

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Ramayan : रामायण में भोग नहीं, त्याग है भरत जी नंदिग्राम में रहते हैं, शत्रुघ्न जी  उनके आदेश से राज्य संचालन करते हैं। एक रात की बात हैं,माता कौशिल्या जी को सोते में अपने महल की छत पर किसी के चलने की आहट सुनाई दी। नींद खुल गई । पूछा कौन हैं ?, मालूम पड़ा श्रुतिकीर्ति जी हैं। नीचे बुलाया गया। श्रुतिकीर्ति जी, जो सबसे छोटी हैं, आईं, चरणों में प्रणाम कर खड़ी रह गईं। माता कौशिल्या जी ने पूछा, श्रुति ! इतनी रात को अकेली छत पर क्या कर रही हो बिटिया ? क्या नींद नहीं आ रही ? शत्रुघ्न कहाँ है ? श्रुतिकीर्ति की आँखें भर आईं, माँ की छाती से चिपटी, गोद में सिमट गईं, बोलीं, माँ उन्हें तो देखे हुए तेरह वर्ष हो गए। उफ ! कौशल्या जी का ह्रदय काँप गया । तुरंत आवाज लगी, सेवक दौड़े आए । आधी रात ही पालकी तैयार हुई, आज शत्रुघ्न जी की खोज होगी, माँ चली। आपको मालूम है शत्रुघ्न जी कहाँ मिले ? अयोध्या जी के जिस दरवाजे के बाहर भरत जी नंदिग्राम में तपस्वी होकर रहते हैं, उसी दरवाजे के भीतर एक पत्थर की शिला हैं, उसी शिला पर, अपनी बाँह का तकिया बनाकर लेटे मिले । माँ सिराहन...

Mahabharat : तुम मेरी राखो लाज हरि

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Mahabharat : तुम मेरी राखो लाज हरि  कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र को विशाल सेनाओं के आवागमन की सुविधा के लिए तैयार किया जा रहा था,  इसमें हाथियों का इस्तेमाल पेड़ों को उखाड़ने और जमीन साफ करने के लिए किया जा रहा था । ऐसे ही एक पेड़ पर एक टटीरी (गौरैया) अपने पाँच बच्चों के साथ रहती थी, लेकिन बच्चे अभी अंडों के भीतर ही थे, अभी तक वे बाहर प्रकट नहीं हुए थे । जब उस पेड़ को उखाड़ा जा रहा था, तब उस टटीरी का घोंसला उसके अंडों सहित जमीन पर आकर गिर पड़ा । पर अण्डे टूटे नहीं, सुरक्षित रहे । कमजोर और भयभीत टटीरी मदद के लिए इधर-उधर देखती रही । तभी उसने भगवान श्रीकृष्ण को अर्जुन के साथ वहाँ आते देखा । वे महाभारत युद्ध से पहले युद्ध के मैदान का निरीक्षण करने के लिए वहाँ आए थे । टटीरी ने भगवान के रथ तक पहुँचने के लिए अपने पंख फड़फड़ाए और भगवान के पास पहुँचकर प्रार्थना की - 'हे प्रभु ! मेरे बच्चों की रक्षा कीजिए । कल युद्ध शुरू होने पर वे कुचले जाएंगे ।' सर्वव्यापी भगवान ने ईशारे में कहा - 'मैं तुम्हारी बात सुन रहा हूँ, लेकिन मैं प्रकृति के कानून में हस्तक्षेप नहीं...

Budh Poornima : बुद्धम् शरणम् गच्छामि

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Mahabharata (VIDEO): सूर्य पुत्र कर्ण को माता कुंती ने बनाया सूत पुत्र, हुआ कदम कदम पर अपमान

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Mahabharat : दुर्योधन से दोस्ती का अंतिम सांस तक निभाया कर्ण ने अपमानित किए जाने पर कर्ण को दुर्योधन ने भरी सभा में बनाया अंगदेश का राजा महाभारत में कर्ण को भले ही हर मोड़ पर पाप का साथ देने वाला योद्धा साबित करने की कोशिश की गई।  कर्ण की हर मौके पर बुराई ही दिखाई दी। फिर चाहे वह द्रौपदी चीर हरण हो या फिर हर अन्याय के फैसलों में अपने दोस्त दुर्योधन का साथ देना। कर्ण के जीवन को जब भी देखा जाता है तो उसमे बुराइयाँ ही दिखाई देती हैं। हालाँकि कर्ण के अंदर अच्छाइयों का अथाह भंडार था। कर्ण अर्जुन से भी बड़े तीरंदाज थे महाभारत में कर्ण का शुरूआती जीवन बहुत सारी कठिनाइयों से भरा रहा था, क्योंकि वह एक सूतपुत्र माने जाते थे। चूंकि अनाथ कर्ण का पालन पोषण एक रथ चालक ने किया था। और रथ चालक निचले दर्जे की जाति से था।  इसकी वजह से ही कर्ण को तमाम मुश्किलें सहनी पड़ीं। उन्हें वह अधिकार नहीं मिले थे, जो बाकी लोगों को मिलते थे। कर्ण भले ही सूतपुत्र के नाम से जाने जाते थे मगर उनकी रगों में वीरता का खून था, इसलिए ही वह बचपन से धनुष-विद्या सीखना चाहते थे। माना जाता है ...

IAS Rani Nagar Resigned (VIDEO): आईएएस रानी नागर के इस्तीफे पर मायावती ने जताया रोष

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मायावती ने बताया दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण     यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने अपने पैतृक गांव बादलपुर की बेटी आईएएस अफसर रानी नागर के इस्तीफे पर गहरा रोष प्रकट करते हुए ट्वीट किया है जिसमें उन्होने कहा है कि " हरियाणा की महिला आईएएस अफसर रानी नागर को, ’नौकरी के दौरान अपनी जान को खतरा’ के कारण अन्ततः अपनी नौकरी से ही इस्तीफा देकर वापस अपने घर यूपी लौट आना पड़ा है, जो अति-दुःखद व अति-दुर्भाग्यपूर्ण। महिला सुरक्षा व सम्मान के मामले में ऐसी सरकारी उदासीनता व अन्यों की चुप्पी क्यों? " IAS Rani Resigned: आईएएस रानी नागर का इस्तीफा, गुर्जर नेताओं का दबाव नहीं आया काम चंडीगढ़ : यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री बसपा सुप्रीमो मायावती के गांव बादलपुर की बेटी आईएएस रानी नागर ने अपने उत्पीड़न और अपनी सुरक्षा को खतरा बताते इस्तीफा दे दिया है। उनके समर्थन में उतरीं मायावती और बसपा सांसद गुर्जर नेता मलूक नागर के साथ ही भाजपा सांसद व राष्ट्रीय गुर्जर नेता सुरेन्द्र नागर का हरियाणा की मनोहर खट्टर सरकार पर दबाव भी काम नहीं आया।             ...

Two Motivational Story : बदल दें जिंदगी जीने का अंदाज

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दो ऐसी सत्य कथाएं, जिनको पढ़ने के बाद शायद आप भी अपनी  ज़िंदगी जीने का अंदाज़ बदलना चाहें। पहली: नेल्सन मंडेला और उनका जेलर दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति बनने के बाद एक बार नेल्सन मांडेला अपने सुरक्षा कर्मियों के साथ एक रेस्तरां में खाना खाने गए। सबने अपनी अपनी पसंद का खाना  आर्डर किया और खाना आने का इंतजार करने लगे। उसी समय मांडेला की सीट के सामने वाली सीट पर एक व्यक्ति अपने खाने का इंतजार कर रहा था। मांडेला ने अपने सुरक्षा कर्मी से कहा कि उसे भी अपनी टेबल पर बुला लो। ऐसा ही हुआ। खाना आने के बाद सभी खाने लगे, "वो आदमी भी अपना खाना खाने लगा, पर उसके हाथ खाते हुए कांप रहे थे।" खाना खत्म कर वो आदमी सिर झुका कर रेस्तरां से बाहर निकल गया। उस आदमी के जाने के बाद मंडेला के सुरक्षा अधिकारी ने मंडेला से कहा कि वो व्यक्ति शायद बहुत बीमार था, खाते वख़्त उसके हाथ लगातार कांप रहे थे और वह ख़ुद भी कांप रहा था। मांडेला ने कहा नहीं ऐसा नहीं है। "वह उस जेल का जेलर था, जिसमें मुझे कैद रखा गया था। जब कभी मुझे यातनाएं दी जाती थीं  और मै कराहते हुए पानी मांगता था तो ये मेरे ऊपर ...

Corona's specter on the Central Vista project : मोदी सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट सेंट्रल विस्टा पर कोरोना संकट का सवाल

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को रोना महामारी के कारण इन दिनों देश की राजधानी में सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट भी मुख्य चर्चा का विषय बन गया है। जहां मोदी सरकार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट है, वहीं विपक्ष यह सवाल उठा रहा है कि हम अपने पुराने संसद भवन से ही काम चला लेंगे। यह संकट का समय है, ऐसे में हमें 20 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट को तुरंत स्थगित कर देना चाहिए। इसके लिए सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया गया है। कई ने इस प्रोजेक्ट के जरिए गुजरात के लोगों को उपकृत किए जाने के भी आरोप लगाए हैं। लेकिन मोदी सरकार बिना किसी आलोचना की परवाह किए अपने इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर लगी हुई है। प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी और पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने तो सरकार पर यहां तक तंज कसा है कि मुसीबत में फंसे मजदूरों से सरकार रेल का निर्धारित किराया भी अतिरिक्त शुल्क के साथ वसूल रही है और गैर जरूरी इस प्रोजेक्ट पर 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पर अमादा है। ऐेसे में हर किसी के मन में यह विचार और सवाल उठ रहा है कि आखिर यह प्रोजेक्ट क्या है?  वास्तविकता में यह बहुत ही गंभीर विषय है, जिसमे...

Corona Lockdown 3.0 : कोरोना ने पेट्रोल और डीजल में लगाई आग

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नई दिल्ल्लीः लॉकडाउन में ढील मिलने के बाद ही अब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में आग लग गई है। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दामों में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली सरकार के ईंधन पर वैट  बढ़ाने के बाद राजधानी में मंगलवार को पेट्रोल 1.67 रुपये और डीजल 7.10 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया। तेल कंपनियों से मीडिया में आईं खबरों के मुताबिक अब दिल्ली में एक लीटर पेट्रोल 71.26 रुपये का होगा. पहले यह कीमत 69.59 रुपये प्रति लीटर थी। इसी तरह डीजल की नयी कीमत 69.39 रुपये प्रति लीटर होगी जो पहले 62.29 रुपये प्रति लीटर थी। दिल्ली सरकार ने पेट्रोल पर वैट को 27 प्रतिशत से बढ़ाकर 30 प्रतिशत कर दिया है जबकि डीजल पर वैट लगभग दोगुना बढ़कर 16.75 प्रतिशत 30 प्रतिशत हो गया है। लॉकडाउन में पेट्रोल, डीजल की बिक्री गिरी एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल के मुकाबले अप्रैल में पेट्रोल की बिक्री 61 फीसदी और डीजल की बिक्री 57 फीसदी गिर गई है। वहीं अप्रैल के पहले 15 दिन में बिक्री क्रमशः 64 फीसदी और 61 फीसदी गिर गई।

Every Relationship thirsty for blood In MAHABHARAT: हर रिश्ता बना खून का प्यासा

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महाभारत युद्ध : हर रिश्ता बना खून का प्यासा दुनिया में यूं तो तमाम युद्ध हुए, लेकिन जो इतिहास में याद किए जाते हैं उनमें  महाभारत युद्ध को शायद ही कभी भुलाया जा सकेगा। इस युद्ध के कारणों और जिम्मेदारों को लेकर हर व्यक्ति अपने-अपने तरह से व्याख्या करता है, जो हमेशा होती रही है और भविष्य में भी होती रहेगी। इन दिनों कोरोना लॉकडाउन के चलते टीवी पर प्रसारित हो रहे महाभारत धारावाहिक के कारण एक बार फिर घर-घर में लोग इस धारावाहिक की व्याख्या करने में जुटे हैं। निश्चित ही आप भी कुछ न कुछ अवश्य ही किसी भी पात्र की अपने स्तर से व्याख्या करने में जुटे होंगे। युद्ध वास्तव में बहुत बड़ा था, जिसमें कौरवों की सेना की ओर से सभी बड़े-बड़े योद्धा मारे गए, जिनको तमाम वरदान और उनकी प्रतिज्ञाएं भी मरने से नहीं रोक पाईं। एकमात्र जीवित बचा कौरव युयुत्सु था और करीब 25 हजार  कौरव सैनिक लापता हो गए थे। माना जाता है कि लव और कुश की 50वीं पीढ़ी में शल्य हुए, ‍जो महाभारत युद्ध में कौरवों की ओर से लड़े थे। इस महाभारत ...

Congress`s befitting reply to Modi government : घर लौटने वाले मजदूरों का रेल किराया देगी कांग्रेस

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घर लौटने वाले मजदूरों की रेल यात्रा का खर्च उठाएगी कांग्रेस, सोनिया गांधी ने किया ऐलान देश में कोरोनावायरस संकट में लॉकडाउन के कारण प्रवासी मजदूर लंबे वक्त से फंसे हुए थे. अब जब लंबे वक्त बाद उन्हें घर जाने की अनुमति मिली, लेकिन केंद्र ने रेल किराये का अतिरिक्त पचास रुपये सहित सारा खर्च मजदूरों से वसूलने का फैसला किया. इस पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई और अब कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसको लेकर मोदी सरकार को करारा जवाब देते हुए बड़ा फैसला लिया है, जिसमें कांग्रेस पार्टी सभी जरूरतमंद मजदूरों के रेल टिकट का खर्च उठाएगी। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी की प्रदेश इकाइयों से मजदूरों के किराए का खर्च उठाने को कहा है. सोमवार को ऐलान किया कि देशभर में फंसे मजदूरों के घर वापस जाने के लिए रेलयात्रा का खर्च कांग्रेस पार्टी उठाएगी। कांग्रेस ने ट्वीट करते हुए लिखा है, 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने यह निर्णय लिया है कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की हर इकाई हर जरूरतमंद श्रमिक व कामगार के घर लौटने की रेल यात्रा का टिकट खर्च वहन करेगी व इस बारे  में जरूरी कदम उठा...

WORLD PRESS FREEDOM DAY : मीडिया की स्वतंत्रता हर नागरिक की स्वतंत्रता

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 विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस पर आईएफडब्लूजे के वेबीनार में शामिल हुए कई राज्यों के पत्रकार मीडिया की स्वतंत्रता हर नागरिक की स्वतंत्रता, पत्रकारों की लड़ाई में समाज भी साथ दे नई दिल्ली : पत्रकारों की स्वतंत्रता नागरिकों की स्वतंत्रता से अलग नही है। पत्रकारों पर होने वाले हमले के विरोध में केवल मीडिया ही नही समाज के हर वर्ग को साथ आना चाहिए। विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस (वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे) के मौके पर रविवार 3 मई को इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट (आईएफडब्लूजे) ने प्रेस की स्वतंत्रता पर एक वेबिनार का आयोजन किया। कार्यक्रम में देश के कई राज्यों से सौ से ज्यादा लोग जुड़े। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (सीपीजे) के भारत में प्रतिनिधि कुणाल मजूमदार ने पत्रकारों पर भारत में हाल के दिनों में हुए हमलों और उत्पीड़न को लेकर रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि हाल के दिनों में यह देखा गया है कि उत्तर प्रदेश के जिलों में सरकार ही नही बल्कि स्थानीय माफियाओं में पत्रकारों पर हमला बोलने की प्रवृत्ति बढ़ी है। उन्होंने कहा कि अब अवैध काम करने वाले प्...