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Alcohol be prohibited : अंगूरी गरली है, निषिद्ध हो

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  अंगूरी गरली है, निषिद्ध हो ! दा रू की दुकानों पर इतना मजमा देखकर लगा कि संक्रमित लोग कोरोना की वैक्सीन खरीदने में जुटे हैं| एक ही दिन में योगी सरकार को सौ करोड़ रुपयों की आवक हो गई| बापू के चेलों (नेहरू-इंदिरा) के राज में बेझिझक ज्यादा लाभ मिलता था| उसी वक्त से ही मद्यनिषेध और आबकारी विभागों में सहभागिता सृजित की गयी थी| हालाँकि दर्शनशास्त्र के मुताबिक यह विरोधाभासी है, किन्तु दलीय राजनीति की नजर में बेमेल नहीं| आजाद भारत के इतिहास में केवल मोरारजी देसाई के राज में ही मद्यनिषेध का असली अर्थ शराब-बंदी थी| तब वे अविभाजित मुंबई राज्य के गाँधीवादी मुख्य मंत्री थे| सोवियत प्रधान मंत्री बुल्गानिन और रूसी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव ख्रुश्चोव मुंबई आये| दोनों को मुख्य मंत्री का निर्देश था कि शराब के लिए परमिट हेतु राज्य मद्यनिषेध अधीक्षक को दरख्वास्त दे दें| पर ये दोनों रूसी मास्को से ही वोदका भरकर लाये थे| एक अन्य अवसर पर जब मोरारजी देसाई नेहरू काबीना में वित्त मंत्री थे तो ब्रिटिश प्रधान मंत्री मैकमिलन के सम्मान में दिल्ली स्थित उच्चायुक्त भवन में रात्रिभोज ...

Chaudhry Mahendra Tikait : किसानों का क्रांतिदूत चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत

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    किसानों का क्रांतिदूत : चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत                 (6 अक्टूबर 1935 – 15 मई 2011) किसानों को हकों के लिए संघर्ष करने के रास्ते पर लाए टिकैत  कि सान मसीहा चौधरी महेंद्र टिकैत का जन्म मुजफ्फरनगर के कस्बा सिसौली में 6 अक्टूबर 1935 में एक जाट परिवार में हुआ था। गांव के ही जूनियर हाईस्कूल में कक्षा सात तक पढ़ाई की। उनके पिता का नाम चौधरी चौहल सिंह टिकैत और माता जी श्रीमती मुख्त्यारी देवी थीं। चौधरी चौहल सिंह टिकैत बालियान खाप के चौधरी थे। चौधरी महेन्‍द्र सिंह टिकैत को एक जुझारु किसान नेता के तौर पर पूरी दुनिया जानती है लेकिन यह व्‍यक्ति एक दिन में या किसी की कृपा से 'किसानों का मसीहा' नहीं बन गया बल्कि सच तो यह है कि कभी इस शख्‍सीयत ने धूप-छांव, भूख-प्‍यास, लाठी-जेल की परवाह नहीं की। अगर अपने कदमों को किसान संघर्ष के लिए बाहर निकाल दिया तो फिर कभी पीठ नहीं दिखाई चौधरी साहब किसानों के सच्चे हितैषी और किसानों को उनका हक दिलाने के लिए सदैव तत्पर रहते थे। अब किसान आंदोलन की ...

Journalist Pawan Mittal passed away : दैनिक मयराष्ट्र के प्रधान संपादक पवन मित्तल का निधन

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 दैनिक मयराष्ट्र के प्रधान संपादक का निधन  मेरठ में दैनिक मयराष्ट्र के प्रधान संपादक श्री पवन मित्तल जी का आज प्रातः दिनांक 14 मई 2020 को स्वर्गवास हो गया वह पिछले काफी समय से कैंसर से पीड़ित थे उनके निधन पर उत्तर प्रदेश श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के पदाधिकारी पंकज मंगल, राजेंद्र चौहान, बालकिशन शर्मा और अन्य सदस्यों द्वारा  शोक व्यक्त किया गया और दिवंगत आत्मा की शान्ति हेतु भगवान से प्रार्थना की।  पवन मित्तल स्वतंत्रता सेनानी एवं वरिष्ठ पत्रकार स्व. श्री मामचंद मित्तल के सुपुत्र थे। मामचंद मित्तल जहां मेरठ में पत्रकारिता के माध्यम से आजादी की अलख जगाने वाले पत्रकारों में से एक थे वहीं आजादी के बाद भी वह अपने पूरे जीवनकाल में जनहितों के लिए लड़ते रहे। उनके बाद उनके सुपुत्र पवन मित्तल ने भी "मयराष्ट्र" की ज्योति को जलाए रखा। कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी ने वास्तव में पवन मित्तल जी को असहाय ही बना दिया था। उनके निधन से मेरठ के पत्रकारिता जगत को भारी क्षति हुई, जिसकी पूर्ति नहीं की जा सकती है। 

Lockdown : ...वो राजा महलों के नुमाइंदे बन गए

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  ...वो राजा महलों के नुमाइंदे बन गए जिन्होंने महल बनाए, वो झोपड़ियों से भी बेदखल कर दिए गए। जिन्हें बनाया महलों का मालिक, वो भी उन्हें अब भूल गए ।। जिन्होंने बताया झोपड़ी का नुमाइंदा, वो राजा अब महलों के नुमाइंदे बन गए। वो भी करोड़ों के सूट बूट पहन, महलों को रोशन करने में लग गए ।। भाषणों में जिनके गरीब मजदूर होता है, वो खुलेआम धनाढ्यों को खैरात बांटने में लग गए। जो बैंकों के लुटेरे होते जेलों में, वे अब बगलगीर बन गए।। जिन्हें  दिखाया हवाई जहाज में बैठने का सपना, भूखे प्यासे मरने को उन्हें पैदल चलने को छोड़ गए।  अगर मिल जाए भगवान तो पूछू , तुम गरीब मजदूर को मजबूर क्यों बना गए। जिनको बनाया अपना रहनुमा, वो राजा महलों के नुमाइंदे बन गए।। -राजेन्द्र मौर्य

Over Dodge politics (VIDEO): धर्म की कटट्ररता और अधिक राजनीति ही समस्याओं की जड़

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MAHABHARAT : पांडव नहीं थे पांडु के पुत्र, दुर्योधन समेत शत पुत्रों के पिता नहीं थे धृतराष्ट्र

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म हाभारत केवल एक महायुद्ध नहीं था, बल्कि कई रहस्यों, कहानियों और प्रतिशोधों का एक हवन माना जाता है। कौरवों और पांडवों के बीच हस्तिनापुर की गद्दी के लिए कुरूक्षेत्र में महाभारत का युद्ध हुआ था। कुरूक्षेत्र हरियाणा प्रांत का एक जिला है। महाभारत युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। कृष्ण इस युद्ध में पांडवों के साथ थे। युद्ध के बाद से कलियुग का आरंभ माना जाता है। कृष्ण जन्म और मृत्यु के समय ग्रह-नक्षत्रों की जो स्थिति थी उस आधार पर तमाम ज्योतिषियों ने कृष्ण की आयु 119-33 वर्ष आंकी है। उनकी मृत्यु एक बहेलिए का तीर लगने से हुई थी। माना जाता है कि महाभारत युद्ध में एकमात्र जीवित बचा कौरव युयुत्सु था। महाभारत युग में कौरवों का पूरे भारत में प्रभाव था। कौरव, पौरव और यादव तीनों ही चन्द्रवंशी थे। महाभारत में हर पात्र के साथ बड़ी ही रहस्यमय कहानी जुड़ी है। तमाम शोध पत्रों में माना गया है कि न पांडू के पुत्र पांडव थे और न ही दुर्योधन समेत ...

New Delhi :IFWJ Demands for Immediate withdrawal of Increased Working Hours

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Indian Federation of Working Journalists (IFWJ) has demanded the immediate withdrawal of the provision for 72 hours work per week from the ordinance issued by six state governments as it is not only anti-labour but also against all forms of human values. It may be noted here that under the existing laws a worker is mandated to work only 48 hours in a week, but in the case of journalists it is only 36 hours a week as per the Working Journalists Act. In a statement the IFWJ President BV Mallikarjunaih, Vice Presidents Hemant Tiwari, KM Jha, Keshab Kalita and Vibhuti Bhushan Kar, Secretaries Sidharth Kalhans, Gitika Talukdar, K Asudhulla and Treasurer Rinku Yadav have expressed shock over the dilution of labour laws particularly with regard to the increase in working hours by the state governments of Uttar Pradesh, Madhya Pradesh, Maharashtra, Odissa, Goa and Gujrat in the name of meeting the challenges arisen due to calamity of Covid-19. The IFWJ wonders as to how t...

Five lakh help to Journalist : पत्रकार को मौत या विकलांगता पर केंद्र सरकार देगी पांच लाख की मदद

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पत्रकारों के लिए केंद्र सरकार का तोहफा मो दी सरकार ने ‘पत्रकार वेलफेयर स्कीम‘ में संशोधन कर इसे देशभर के सभी पत्रकारों के लिए लागू कर दिया है। दरअसल, केंद्र सरकार ने पत्रकारों के कल्याण के लिए इस स्कीम को फरवरी 2013 में लागू किया था। अब इसमें संशोधन किया गया है, जिसका फायदा देश के सभी जर्नलिस्ट्स ले सकेंगे। यदि किसी जर्नलिस्ट का निधन होता है या फिर वह विकलांग हो जाता है, तो इस स्कीम के तहत केंद्र सरकार उसके आश्रितों को पांच लाख रुपए की सहायता देगी। वहीं, इलाज के लिए भी पत्रकार को सरकार की ओर से पांच लाख रुपए की सहायता राशि दी जाएगी। इस योजना की पात्रता के लिए एक समिति का गठन भी किया गया है, जिसके संरक्षक केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री होंगे। विभागीय सचिव अध्यक्ष, प्रधान महानिदेशक, एएस एंड एएफ, संयुक्त सचिव समिति के सदस्य बनाए गए हैं। समिति पीड़ित पत्रकार या फिर उनके परिजनों के आवेदन पर आर्थिक सहायता देने का फैसला लेगी। इस योजना में केंद्र या राज्य सरकार से मान्यता प्रापत् होने का कोई बंधन नहीं है। यह योजना पत्रकारों से संबंधित 1955 के एक अधिनियम “Working Journali...

Happy Marriage (VIDEO) : कवि सम्मेलन : परिवार नियोजन ने छीनी सालियां

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Corona : Open Letter To UP'S CM : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखा खुला पत्र।

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यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को खुला पत्र लिखा गया है। यह पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पत्र में मुख्यमंत्री से खुले पत्र में अनुरोध किया गया है कि अस्पतालों में हो रही मौतों के मामले में शवों को कोरोना जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सौंपा जाए ताकि शव का अंतिम संस्कार निर्धारित गाइडलाइन के मुताबिक किया जा सके। और अंतिम संस्कार में शामिल लोग किसी मुसीबत में फंसने से बच सकें। वायरल हो रहे पत्र में लिखा गया है कि "मैं माननीय मुख्यमंत्री जी उत्तर प्रदेश सरकार भारत सरकार के सभी प्रशासनिक अधिकारियों और अपने जिले के सभी शासन और प्रशासन के अधिकारियों से एक अनुरोध करना चाहता हूं कृपया जो भी रोगी अस्पताल में भर्ती हैं और जिनका की कोविड टेस्ट हुआ है और उनकी किसी कारण रिपोर्ट आने से पहले ही मृत्यु हो जाती है तो कृपया उनके शव को किसी भी उनके किसी रिश्तेदार को तब तक ना सौंपा जाए जब तक कि उसकी कोविड की टेस्ट की रिपोर्ट ना आ जाए इससे सभी लोग सचेत हो जाएंगे  रिपोर्ट पॉजिटिव होने पर परिवार और सभी रिश्तेदार संबंधी सचेत हो जाएंगे इससे कोरोना रोग फैलने का खतरा ना के बराबर हो जाएगा सब दूरी ...

Old is Gold Song (VIDEO) :

Old is Gold Song (VIDEO):

Govt's Decision Anti Labour : श्रम कानून पर सरकार के फैसले का मायावती ने किया विरोध

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यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा सुप्रीमो मामायावती ने सरकार द्वारा कोरोना महामारी की आड़ में श्रम कानून को तीन वर्ष के लिए निष्प्रभावी किए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इस निर्णय को श्रमिक विरोधी बताया है। मायावती ने किए ट्वीट में कहा है कि "कोरोना प्रकोप में मजदूरों/श्रमिकों का सबसे ज्यादा बुरा हाल है, फिर भी उनसे 8 के बजाए 12 घण्टे काम लेने की शोषणकारी व्यवस्था पुनः देश में लागू करना अति-दुःखद व दुर्भाग्यपूर्ण। श्रम कानून में बदलाव देश की रीढ़ श्रमिकों के व्यापक हित में होना चाहिये ना कि कभी भी उनके अहित में। जबकि परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर ने श्रमिकों के लिए प्रतिदिन 12 नहीं बल्कि 8 घण्टे श्रम व उससे ज्यादा काम लेने पर ओवरटाइम देने का युगपरिवर्तनकारी काम तब किया था जब देश में श्रमिकों/मजदूरों का शोषण चरम पर था। इसे बदलकर देश को उसी शोषणकारी युग में ढकेलना क्या उचित? देश में वर्तमान हालात के मद्देनजर श्रम कानून में ऐसा संशोधन करना चाहिए ताकि खासकर जिन फेक्ट्री/प्राइवेट संस्थानों में श्रमिक कार्य करते हैं वहीं उनके रूकने आदि की व्यवस्था हो। किसी भी...

Motivational Story : बच्चे को मिला एक रुपये में ईश्वर

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सिर्फ एक रुपया आठ साल का एक बच्चे ने 1 रूपये का सिक्का मुट्ठी में लेकर एक दुकान पर जाकर कहा, क्या आपकी दुकान में ईश्वर मिलेंगे ? दुकानदार ने यह बात सुनकर सिक्का नीचे फेंक दिया और बच्चे को निकाल दिया। बच्चा पास की दूसरी दुकान में जाकर 1 रूपये का सिक्का लेकर चुपचाप खड़ा रहा ! दुकानदार ने पूछा -- ए लड़के.. 1 रूपये में तुम क्या चाहते हो? मुझे ईश्वर चाहिए। आपकी दुकान में हैं? दूसरे दुकानदार ने भी भगा दिया। लेकिन, उस अबोध बालक ने हार नहीं मानी। एक दुकान से दूसरी दुकान, दूसरी से तीसरी, ऐसा करते करते कुल चालीस दुकानों के चक्कर काटने के बाद एक बूढ़े दुकानदार के पास पहुंचा। उस बूढ़े दुकानदार ने पूछा, तुम ईश्वर को क्यों खरीदना चाहते हो,  क्या करोगे ईश्वर लेकर ? पहली बार एक दुकानदार के मुंह से यह प्रश्न सुनकर बच्चे के चेहरे पर आशा की किरणें लहराईं৷ लगता है इसी दुकान पर ही ईश्वर मिलेंगे ! बच्चे ने बड़े उत्साह से उत्तर दिया, --इस दुनिया में मां के अलावा मेरा और कोई नहीं है। मेरी मां दिनभर काम करके मेरे लिए खाना लाती है। मेरी मां अब अस्पताल में हैं। अगर मेरी मां मर ...

IAS Rani Nagar(Video): इस्तीफा मंजूर नहीं होने पर और शोषण की आशंका

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आईएएस रानी नागर का इस्तीफा नामंजूर, यूपी कैडर करने की सिफारिश  एक जानकारी के मुताब‌िक भाजपा राज्यसभा सांसद सुरेन्द्र सिंह नागर और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल सिंह गुर्जर के दबाव के चलते हरियाणा सरकार ने आईएएस अधिकारी रानी नागर  का इस्तीफा नामंजूर कर दिया है। साथ ही रानी नागर का हरियाणा कैडर बदलकर यूपी कैडर किए जाने के लिए भी केंद्र सरकार को सिफारिश कर दी है। सुरेन्द्र नागर ने इस मामले में गत दिनों नागर ने कहा था कि रानी नागर को इंसाफ मिलेगा और उनका इस्तीफा मंजूर नहीं किया जाएगा। रानी नागर चाहती हैं अपना इस्तीफा स्वीकार कराना हरियाणा सरकार द्वारा इस्तीफा नामंजूर किए जाने के विपरित पूर्व मुख्यमंत्री एवं बसपा सुप्रीमो मायवती के पैतृक गांव बादलपुर की बेटी रानी नागर का कहना है कि अगर मेरा इस्तीफा मंजूर नहीं होता है तो मेरा और शोषण होता रहेगा। उन्होंने अपना इस्तीफा स्वीकार नहीं होने के लिए आंदोलन और बिरादरी के जरिए हरियाणा सरकार पर दबाव बनाने वाले सभी लोगों से अनुरोध किया है कि वे इसके लिए कोई प्रयास न करें। रानी नागर का मानना है कि यदि उनका इस्तीफा स्व...

Spanish flu was more dangerous than Corona (Video) : स्पेनिश फ्लू कोरोना से भी ज्यादा खतरनाक था

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कोरोना और स्पेनिश फ्लू के लक्षण समान,  1918 में हुई थीं करोड़ों मौतें दुनिया में 1918 में स्पेनिश फ्लू नाम की महामारी से 50 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हुए थे और करीब दो करोड़ से पांच करोड़ के बीच लोगों की जान चली गई थी और यह आंकड़े प्रथम विश्वयुद्ध में मारे गए सैनिकों व नागरिकों की कुल संख्या से बहुत ज्यादा हैं।  पूरी दुनिया में इस समय कोरोनावायरस महामारी की वजह से कोहराम मचा है और बड़ी-बड़ी सरकारें इसके सामने बेबस नजर आ रही हैं, लेकिन वर्ष 1918 में भी एक वायरस ने भयानक तबाही मचाई थी और इसकी भयावहता का अनुमान लगाना भी मुश्किल है। स्पेनिश फ्लू नाम की इस महामारी से दुनियाभर के 50 करोड़ से ज्यादा लोग संक्रमित हो गए थे और करीब दो से पांच करोड़ के बीच लोगों की जान चली गई थीं और यह आंकड़े प्रथम विश्वयुद्ध में मारे गए सैनिकों व नागरिकों की कुल संख्या से ज्यादा हैं। स्पेनिश फ्लू ने हालांकि दो वर्षों यानि 1920 तक कोहराम मचाया था, लेकिन अधिकतर मौतें 1918 के तीन क्रूर महीने में हुई थी। इतिहासकारों का अब मानना है कि स्पेनिश फ्लू के दूसरे दौर में हुई व्यापक ज...

Ramayan : रामायण में भोग नहीं, हर पात्र त्याग की मूर्ति है

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Ramayan : रामायण में भोग नहीं, त्याग है भरत जी नंदिग्राम में रहते हैं, शत्रुघ्न जी  उनके आदेश से राज्य संचालन करते हैं। एक रात की बात हैं,माता कौशिल्या जी को सोते में अपने महल की छत पर किसी के चलने की आहट सुनाई दी। नींद खुल गई । पूछा कौन हैं ?, मालूम पड़ा श्रुतिकीर्ति जी हैं। नीचे बुलाया गया। श्रुतिकीर्ति जी, जो सबसे छोटी हैं, आईं, चरणों में प्रणाम कर खड़ी रह गईं। माता कौशिल्या जी ने पूछा, श्रुति ! इतनी रात को अकेली छत पर क्या कर रही हो बिटिया ? क्या नींद नहीं आ रही ? शत्रुघ्न कहाँ है ? श्रुतिकीर्ति की आँखें भर आईं, माँ की छाती से चिपटी, गोद में सिमट गईं, बोलीं, माँ उन्हें तो देखे हुए तेरह वर्ष हो गए। उफ ! कौशल्या जी का ह्रदय काँप गया । तुरंत आवाज लगी, सेवक दौड़े आए । आधी रात ही पालकी तैयार हुई, आज शत्रुघ्न जी की खोज होगी, माँ चली। आपको मालूम है शत्रुघ्न जी कहाँ मिले ? अयोध्या जी के जिस दरवाजे के बाहर भरत जी नंदिग्राम में तपस्वी होकर रहते हैं, उसी दरवाजे के भीतर एक पत्थर की शिला हैं, उसी शिला पर, अपनी बाँह का तकिया बनाकर लेटे मिले । माँ सिराहन...

Mahabharat : तुम मेरी राखो लाज हरि

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Mahabharat : तुम मेरी राखो लाज हरि  कुरुक्षेत्र के युद्धक्षेत्र को विशाल सेनाओं के आवागमन की सुविधा के लिए तैयार किया जा रहा था,  इसमें हाथियों का इस्तेमाल पेड़ों को उखाड़ने और जमीन साफ करने के लिए किया जा रहा था । ऐसे ही एक पेड़ पर एक टटीरी (गौरैया) अपने पाँच बच्चों के साथ रहती थी, लेकिन बच्चे अभी अंडों के भीतर ही थे, अभी तक वे बाहर प्रकट नहीं हुए थे । जब उस पेड़ को उखाड़ा जा रहा था, तब उस टटीरी का घोंसला उसके अंडों सहित जमीन पर आकर गिर पड़ा । पर अण्डे टूटे नहीं, सुरक्षित रहे । कमजोर और भयभीत टटीरी मदद के लिए इधर-उधर देखती रही । तभी उसने भगवान श्रीकृष्ण को अर्जुन के साथ वहाँ आते देखा । वे महाभारत युद्ध से पहले युद्ध के मैदान का निरीक्षण करने के लिए वहाँ आए थे । टटीरी ने भगवान के रथ तक पहुँचने के लिए अपने पंख फड़फड़ाए और भगवान के पास पहुँचकर प्रार्थना की - 'हे प्रभु ! मेरे बच्चों की रक्षा कीजिए । कल युद्ध शुरू होने पर वे कुचले जाएंगे ।' सर्वव्यापी भगवान ने ईशारे में कहा - 'मैं तुम्हारी बात सुन रहा हूँ, लेकिन मैं प्रकृति के कानून में हस्तक्षेप नहीं...

Budh Poornima : बुद्धम् शरणम् गच्छामि

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Mahabharata (VIDEO): सूर्य पुत्र कर्ण को माता कुंती ने बनाया सूत पुत्र, हुआ कदम कदम पर अपमान

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Mahabharat : दुर्योधन से दोस्ती का अंतिम सांस तक निभाया कर्ण ने अपमानित किए जाने पर कर्ण को दुर्योधन ने भरी सभा में बनाया अंगदेश का राजा महाभारत में कर्ण को भले ही हर मोड़ पर पाप का साथ देने वाला योद्धा साबित करने की कोशिश की गई।  कर्ण की हर मौके पर बुराई ही दिखाई दी। फिर चाहे वह द्रौपदी चीर हरण हो या फिर हर अन्याय के फैसलों में अपने दोस्त दुर्योधन का साथ देना। कर्ण के जीवन को जब भी देखा जाता है तो उसमे बुराइयाँ ही दिखाई देती हैं। हालाँकि कर्ण के अंदर अच्छाइयों का अथाह भंडार था। कर्ण अर्जुन से भी बड़े तीरंदाज थे महाभारत में कर्ण का शुरूआती जीवन बहुत सारी कठिनाइयों से भरा रहा था, क्योंकि वह एक सूतपुत्र माने जाते थे। चूंकि अनाथ कर्ण का पालन पोषण एक रथ चालक ने किया था। और रथ चालक निचले दर्जे की जाति से था।  इसकी वजह से ही कर्ण को तमाम मुश्किलें सहनी पड़ीं। उन्हें वह अधिकार नहीं मिले थे, जो बाकी लोगों को मिलते थे। कर्ण भले ही सूतपुत्र के नाम से जाने जाते थे मगर उनकी रगों में वीरता का खून था, इसलिए ही वह बचपन से धनुष-विद्या सीखना चाहते थे। माना जाता है ...