STORY In ancient times, a king had a boulder placed on a roadway. Then he hid himself and watched to see if anyone would remove the huge rock. Some of the king’s wealthiest merchants and courtiers came by and simply walked around it. Many loudly blamed the king for not keeping the roads clear, but none did anything about getting the big stone out of the way.Then a peasant came along carrying a load of vegetables. On approaching the boulder, the peasant laid down his burden and tried to move the stone to the side of the road. After much pushing and straining, he finally succeeded. As the peasant picked up his load of vegetables, he noticed a purse lying in the road where the boulder had been. The purse contained many gold coins and a note from the king indicating that the gold was for the person who removed the boulder from the roadway. The peasant learned what many others never understand. MORAL OF THE STORY: Every obstacle presents an opportunity to improve one’s condition.
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मायावती समझें खतरे की घंटी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में अब यह बात साफ होने लगी है कि सवर्णों को लुभाने के चक्कर में बसपा के दलित वोट बैंक में सेंध लग गई है। दलितों में गैर जाटव वोट के बंटने से बसपा क ो भारी नुकसान हुआ। महापुरूषों के सम्मान में पार्कों और स्मारकों के जरिए दलित स्वाभिमान की आंच तेज करके उनके एकमुश्त वोट पाने की हसरत पर सपा ने जहां पानी फेर दिया, वहीं अन्य राजनीतिक दलों ने भी इसपर गंभीरता से काम किया है। जिस बसपा ने 2007 के विधानसभा चुनाव में दलित बाहुल्य सुरक्षित सीटों में 62 पर कब्जा किया था, उसमें से वह इस बार 47 सीटें हार गई। वह केवल 15 सीटें ही जीत पाई, जबकि मुख्यत: पिछड़े वर्ग की पार्टी मानी जाने वाली सपा ने 58 सीटें जीतकर संकेत दिया है कि अब दलितों में जाटव और चमार जाति के अलावा दूसरी जातियों को साथ लेकर अच्छी सफलता हासिल की जा सकती है। इस चुनाव में इसी रणनीति पर कमोबेश सभी राजनीतिक दलों ने काम किया है, चूंकि सत्ताधारी बसपा विरोधी लहर में जनता के समक्ष समाजवादी पार्टी विकल्प बनी तो उसको थोक में वोट मिल गया और अगले चुनाव में...
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अफसरों की राय में मायावती की हार एक मेरे घनिष्ट प्रशासनिक अधिकारी ने फोन पर मायावती की हार के कारणों को लेकर अलग ही बात बताई। उनका कहना था कि तीन साल पहले सत्ता विरोधी रुझान की सरसराहट को अगर मायावती ने तनिक महसूस किया होता तो शायद वह इस माहौल को आंधी में बदलने से रोक सकती थीं, लेकिन वे केवल सोशल इंजीनियरिंग के भरोसे सत्ता में वापसी का ख्वाब देख रहीं थीं। अब यह उनके लिए महज रेत का टीला ही साबित हुआ। बसपा इस सवाल को नहीं समझ पाई कि जब पांच साल के लिए पूर्ण बहुमत का जनादेश मिला है तो दागियों, माफिया को गले लगाने की क्या जरूरत है? अगर किसी का अपराध सामने आता है तो उस पर कार्रवाई करने में हिचकिचाहट क्यों रहती है? यह सवाल पहले बसपा काडर से उठता था धीरे-धीरे जनता के बीच उठने लगा। हर समस्या के लिए विरोधियों या केंद्र सरकार पर ठीकरा फोड़ने वाली बसपा सरकार से जनता ने अब सपा के पक्ष में जनादेश देकर पूछा है कि जब आपको केवल आरोप ही लगाना है तो आपकी जरूरत ही क्या है? पांच साल पहले बसपा को जो कामयाबी मिली थी उससे बड़ी कामयाबी सपा को इस बार हासिल हुई है। वहीं सपा ...
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जाति विरोधी भावना को महसूस नहीं कर पाईं मायावती जी! उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार धराशाई हो गई, जिसको लेकर कोई सत्ता विरोधी आंधी बता रहा है तो कोई मायावती के भ्रष्टाचार को लेकर जनादेश बता रहा है। मेरा इस परिणाम को लेकर अलग ही मानना है और इसको लेकर मैं 2009 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान भी कहता रहा हूं कि उत्तर प्रदेश में मायावती को सबल वर्ग ने वोट देकर पूर्ण बहुमत का दलित मुख्यमंत्री बनाया जरूर है, लेकिन मायावती के मुख्यमंत्री बनते ही किए गए व्यवहार को लेकर जातीय भेदभाव से सबल वर्ग उबलने लगा है। सभा के खुले स्थलों के मंचों पर प्रधानमंत्री की सभाओं का उदाहरण देकर एसी लगवाना. मंच पर अकेले बैठकर सबल वर्ग के मंत्रियों और विधायक से पैर छूने को देखकर सबल वर्ग पचा नहीं पाया। कई सबल वर्ग के मंत्रियों और विधायकों को इस बाबत कई बार अपने क्षेत्रों में विरोध भी झेलना पड़ा। जब मायावती और उनकी पार्टी ने 2009 के लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री बनने की हुंकार भरी तो...
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STORY A sage presented a prince with a set of three small dolls. The prince was not amused. "Am I a girl that you give me dolls?" he asked. "This is a gift for a future king," said the man. "If you look carefully, you'll see a hole in the ear of each doll." "So?" The sage handed him a piece of string. "Pass it through each doll," he said. Intrigued, the prince picked up the first doll and put the string into the ear. It came out from the other ear. "This is one type of person," said the man. "Whatever you tell him comes out from the other ear. He doesn't retain anything." The prince put the string into the second doll. It came out from the mouth. "This is the second type of person," said the man. "Whatever you tell him, he tells everybody else." The prince picked up the third doll and repeated the process. The string did not reappear from anywhere else. "This...
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मीडिया पर हमला निंदनीय कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में कोर्ट परिसर में वकीलों द्वारा मीडियाकर्मियों और पुलिस पर हमला निंदनीय है। आखिर सभी को कानून का पाठ पढ़ाने वाले वर्ग को क्या हो गया है ?, जो उनके द्वारा आए दिन देश के किसी न किसी हिस्से में कानून को अपने हाथ में लेने की घटनाएं अब आम हो गई हैं। वकीलों को कोई आदर्श व्यवहार का पाठ पढ़ाए, यह काफी शर्मनाक है। उनको खुद ही इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि कोई उनकी ओर अंगुली न उठाए और कम से कम उनको कानून तो अपने हाथ में किसी भी दशा में नहीं लेना चाहिए। बंगलूरू में टकराव तब शुरू हुआ जब वकीलों ने अवैध खनन मामले में पेश हुए पूर्व मंत्री व खनन उद्योग के दिग्गज जी. जनार्दन रेड्डी के कवरेज के लिए मीडियाकर्मियों की मौजूदगी का विरोध किया। झड़प के बाद उन्होंने पथराव शुरू कर दिया। पानी की बोतलें, कुर्सियां, हेलमेट और जो भी चीज हाथ में आई, उसका हथियार के रूप में इस्तेमाल किया गया। कोर्ट में कई मामलों की सुनवाई बाधित हो गई। हिंसा पर उतारू वकीलों को काबू करने वाली पुल...
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केंद्रीय मंत्री कुमारी शैलजा के प्रति संवेदना मुझे जानकारी मिली कि केंद्रीय पर्यटन मंत्री कुमारी शैलजा की मां का लंबी बीमारी के बाद बृहस्पतिवार को निधन हो गया। वे पिछले कई दिनों से अस्पताल में भरती थीं। कुमारी शैलजा की 85 वर्षीय मां कलावती के निधन पर दिल से दुखी हूं। मैं उनकी आत्मा की शांति के लिए ईश्वरीय शक्ति से प्रार्थना करता हूं और कुमारी शैलजा के प्रति गहरी संवेदना प्रकट करता हूं।
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पासवानजी का सराहनीय कदम बिहार में प्रेस की आजादी को लेकर पिछले दिनों प्रेस कौंसिल के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने सवाल उठाया था, इसको लेकर बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने कुछ भी टिप्पणी न करके अपने खास सुशील कुमार मोदी को आगे करके काटजू के बयान पर तीखी टिप्पणी कराई थी, लेकिन एक भी प्रयास ऐसा नहीं किया गया, जिससे नीतिश कुमार पर प्रेस की आजादी पर अंकुश लगाने का आरोप न लगे। अच्छा होता कि नीतिश कुमार प्रेस को और अधिक आजादी से काम करने का मौका देते, चूंकि कुमार को दुबारा सत्ता में आने के लिए कहीं न कहीं प्रेस का भी सहयोग माना जाता रहा है। अभी भी बराबर सूचनाएं आ रही हैं कि नीतिश कुमार प्रेस कौंसिल के अध्यक्ष की टिप्पणी करने के बाद सुधार करने की बजाय प्रेस के प्रति सख्ती अपना रहे हैं, इसलिए आवश्यकता है कि अधिकाधिक लोग बिहार के मुख्यमंत्री के खिलाफ सड़कों पर आएं। आज लोक जनशक्ति पार्टी ने दिल्ली में जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सांसद रामविलास पासवान के नेतृत्व में गिरफ्तारी द...
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मार्कंडेय काटजू की मीडिया को सलाह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने मीडिया को सलाह दी है कि महिलाओं के प्रति होने वाले अपराध खासतौर पर यौन दुष्कर्मों के मामलों में रिपोर्टिंग करते समय सावधानी बरती जाए। काटजू का मानना है कि अगर पीड़िता के नाम रिपोर्ट में प्रकाशित हो जाते हैं तो उनके विवाह होने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। भारत एक रूढ़िवादी देश है, इसलिए अगर आप ये रिपोर्ट छापते हैं कि किसी महिला के साथ बलात्कार हुआ है तो लोग उससे विवाह नहीं करना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि इसे ध्यान में रखते हुए मीडिया रिपोर्ट में पीड़ित महिला का नाम या पहचान उजागर करने से बचना चाहिए। काटजू ने इससे संबंधित निर्देश पीसीआई द्वारा सभी मीडिया हाउसों को जल्दी ही भेजने की भी बात कही है। हालांकि काटजू ने यह बात आंध्र प्रदेश के एक मामले की सुनवाई करते हुए कही है। इस मामले में बलात्कार पीड़ित महिला का नाम एक समाचार चैनल द्वारा प्रसारित कर दिया गया था, लेकिन इन दिनों नोएडा में एक नाबालिग लड़की के साथ गैंगरेप के मामले में भी यह चिंता ठीक समय...
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कैसे मानें अरविंद केजरीवाल को जिम्मेदार नागरिक ? जनता को मतदान के लिए जागरूक करने के लिए अभियान चला रहे टीम अन्ना के सदस्य अरविंद केजरीवाल खुद मतदान नहीं कर पाए, ऊपर से तुर्रा यह कि मतदाता परिचय पत्र उनके पास है, लेकिन सूची में नाम नहीं है तो वे क्या कर सकते हैं?, जबकि निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाता सूची का पुनरीक्षण होने के बाद अनंतिम प्रकाशन और उसके बाद भी लोगों को अपने नाम अंकित कराने और ठीक कराने का मौका मिलता है। ऐसे में अरविंद केजरीवाल जी अपनी जिम्मेदारी से भी बच नहीं सकते। यह भी सभी जानते हैं कि केजरीवाल पहले ही ऐलान कर चुके थे कि गोवा जाने के कारण मतदान नहीं करेंगे, लेकिन आज पूरी तरह चाट बनाकर खबर बेचने का धंधा करने वाले खबरिया चैनलों ने जब उनको सुबह घेर लिया तो वह मतदान के लिए मजबूरन चले गए, जहां उनको पता चला कि सूची में उनका नाम ही नहीं है। जिस मतदाता फोटो पहचान पत्र को उन्होंने दिखाया, उसपर उनका नाम अरविंद लिखा है, जो नाम ही अधूरा है, ऐसे में उनको अपना नाम भी ठीक कराने के...
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केजरीवाल जी जुबान पर लगाम लगाओ ! टीम अन्ना के अहम सदस्य अरविंद केजरीवाल ने ग्रेटर नोएडा में शनिवार को यह कहकर सियासी बवाल पैदा कर दिया कि संसद में हत्यारे, लुटेरे और बलात्कारी बैठे हुए हैं। उनके इस बयान के बाद सभी राजनीतिक दलों ने उनके वक्तव्य पर कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि इससे साफ है कि लोकतंत्र और संविधान में उनका विश्वास नहीं है। तमाम राजनीतिक दलों के आपत्ति करने के बावजूद आज पूरे दिन विभिन्न खबरिया चैनलों पर अरविंद केजरीवाल अपने बयान पर अड़े रहे। केजरीवाल का कहना है कि ‘ संसद में 163 सदस्यों पर बेहद संगीन मामले दर्ज हैं। इसी संसद में बलात्कारी, हत्यारे और लुटेरे बैठे हैं। ऐसे में देश का भला कैसे होगा ? लोकपाल बिल पास होने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। गरीबी और भ्रष्टाचार से मुक्ति कैसे मिलेगी। अब तो संसद ही समस्या बन गई है। इसके चरित्र को बदलने की जरूरत है। ’ केजरीवाल भ्रष्टाचार के मामले में मंत्रियों के खिलाफ कार्रवाई को भी ड्रामा मानते हैं। यह कार्रवाई सिर्फ वोट बटोरने के उद्देश्य से की जा रही है। वैसे तो जबसे टीम अन्ना के आंदोलन को जब स...
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STORY Horror gripped the heart of the World War I soldier as he saw his lifelong friend fall in battle. Caught in a trench with continuous gunfire whizzing over his head, the soldier asked his lieutenant if he might go out into the “no man’s land” between the trenches to bring his fallen comrade back. “You can go,” said the lieutenant, “but i don’t think it will be worth it. Your friend is probably dead and you may throw your life away.” The lieutenant’s advice didn’t matter, and the soldier went anyway. Miraculously he managed to reach his friend, hoist him onto his shoulder and bring him back to their company’s trench. As the two of them tumbled in together to the bottom of the trench, the officer checked the wounded soldier, and then looked kindly at his friend. “I told you it wouldn’t be worth it,” he said. “Your friend is dead and you are mortally wounded.” “It was worth it, though, sir,” said the soldier. “What do you mean; worth it?” responded the Lie...
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क्या हो गया मायावती को ? उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री सुश्री मायावती इन दिनों चुनावी दौरे में विभिन्न जनपदों में चुनावी सभा कर रही हैं। पता नहीं दलित की इस बेटी को क्या हो गया है ?, जब से वह पूर्ण बहुमत की सरकार की मुख्यमंत्री बनी हैं, उनको आम जनता से मिलने में दिक्कत होने लगी है। पूरे पांच वर्ष के कार्यकाल में वह जहां भी गईं, वहां कर्फ्यू के से हालात बना दिए गए। रास्तों को बैरिकेडिंग करके सील कर दिया जाता रहा है, लेकिन अब जब चुनावी जनसभाएं हो रही हैं, तब भी वह जनसाधारण की पीड़ा को सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। कल वह दिल्ली के ही निकट जिला बागपत में एक जनसभा को संबोधित करने पहुंची थी। इस जनसभा की एक तस्वीर और खबर अखबारों और कुछ खबरिया चैनलों में देखकर मुझे काफी दुख हुआ कि जब मायावती के राज में खुद महिलाओं के साथ ऐसा बर्ताव किया जा रहा है, तो फिर उनसे सभी के लिए न्याय और सम्मान की कैसे उम्मीद की जा सकती है। इस सभा में जब मुख्यमंत्री मायावती संबोधित कर रहीं ...
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केंद्र सरकार का अच्छा कदम केंद्र सरकार ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजातियों के खिलाफ होने वाले अत्याचार के मामलों में राहत राशि दिए जाने के प्रावधान में बदलाव करते हुए राहत राशि में बढ़ावा कर दिया है। सरकार का यह फैसला सराहनीय है। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निरोधक संशोधित नियम 2011, 23 दिसंबर 2011 से प्रभावी माना जाएगा, इसके मुताबिक कमाने वाले किसी एससी/एसटी की हत्या के मामलों में मुआवजे की राशि दो लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये, बेरोजगार की हत्या के मामले में मुआवजा एक लाख से बढ़़ाकर 2.5 लाख और एससी/एसटी महिलाओं के साथ यौन शोषण के मामलों में मुआवजा 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.2 लाख रुपये कर दिया गया है। इन नियमों की प्रतियां दलितों में जागरुकता फैलाने वाले एक स्वयंसेवी संगठन द्वारा मीडिया को उपलब्ध कराई गई। इन नियमों में यह भी कहा गया है कि धारा 3(1) भाग-एक से धारा 3(1) भाग-दस तक आने वाले सभी मामलों में राहत राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दी गई है। साथ ही सेवा विक्रय संबंधित मामलों में भी मुआवजा 25 हजार की बजाय 50 हजार मिलेगा।...
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अब ओमपुरी की नजर में अन्ना भी अनपढ़ गंवार दिल्ली में अन्ना हजारे के आंदोलन के दौरान पूरी संसद को अनपढ़ गंवार बताकर फंसे फिल्म अभिनेता ओमपुरी ने अन्ना हजारे को भी अनपढ़ गंवार बताते हुए चार-छह लोगों के हाथों की कठपुतली बताया है। पंजाब में एक निजी कार्यक्रम में उन्होंने यह बयान देकर नया बखेड़ा खड़ा किया है। ओमपुरी के अनुसार अन्ना की अपनी कोई समझ नहीं है। वह तो वही करते हैं जो अरविंद केजरीवाल सरीखे लोग उनसे करवाते हैं। देर से ही सही अन्ना की आरती उतारने वाले लोगों को भी अब असलियत समझ में आने लगी है। वे जानने लगे हैं कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन की आड़ में टीम अन्ना का असल खेल कुछ और ही चल रहा है।
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साबित हुई अन्ना हजारे की आएएसएस से साठगांठ राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने पटना में अन्ना हजारे की चुप्पी पर हैरानी जताते हुए कहा कि न जाने क्यों अन्ना हजारे इस बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं कि उनके द्वारा पिछले साल चलाए गए भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन में संघ कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया था। संघ प्रमुख ने दावा किया कि अन्ना हजारे द्वारा चलाए गए आंदोलन में संघ कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया था। भागवत ने यह भी कहा कि जब अन्ना हजारे को यह पता है कि आंदोलन के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं ने भी उनकी आवाज में आवाज मिलाई थी, तो उन्हें इस बात को सबके सामने कुबूल करने में क्या गुरेज है? भागवत ने जिस तरह दावा किया है कि अन्ना हजारे आरएसएस के कार्यकर्ताओं के आंदोलन में शामिल होने की बात को जानते हैं, इससे स्पष्ट हो गया है कि आरएसएस से इस तथाकथित गांधीवादी नेता अन्ना की साठगांठ है। अब वह यह दिखावा नहीं कर सकते हैं कि उनका या उनके आंदोलन का आरएसएस से कोई संबंध नहीं है।
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राष्ट्रीय बहन -मायावती राष्ट्रीय भाई .. दावूद इब्राहिम राष्ट्रीय रोबोट …मनमोहन सिंह राष्ट्रीय समस्या …मनीष तिवारी राष्ट्रीय चिंता …सलमान की शादी राष्ट्रीय बॉडी गार्ड – जितिन प्रसाद , प्रमोद तिवारी , आरपीएन सिंह राष्ट्रीय रहस्य …सोनिया गांधी राष्ट्रीय गिरगिट … अजित सिंह राष्ट्रीय रथ यात्री …लालकृष्ण आडवाणी राष्ट्रीय चुगलखोर …स्वामी अग्निवेश राष्ट्रीय असंतुष्ट ..मेधा पाटकर राष्ट्रीय स्ट्रगलर …अभिषेक बच्चन राष्ट्रीय भुलक्कड़ …एसएम कृष्णा राष्ट्रीय अतिथि(अस्थाई)..हिना रब्बानी राष्ट्रीय अतिथि (स्थाई)- अजमल कसाब राष्ट्रीय कोयल …मीरा कुमार राष्ट्रीय गहनों की दुकान …बप्पी लहरी राष्ट्रीय गर्लफ्रेंड …दीपिका पादुकोण राष्ट्रीय रईसज़ादा ..सिद्धार्थ माल्या राष्ट्रीय टेलीफोन ऑपरेटर …दिग्विजय सिंह राष्ट्रीय गणितज्ञ …कपिल सिब्बल राष्ट्रीय किसान – अमिताभ बच्चन राष्ट्रीय मसखरा … लालू यादव राष्ट्रीय इंतज़ार …सचिन का सौंवा शतक राष्ट्रीय गाल …शरद पवार राष्ट्रीय थप्पड़ - हरविंदर सिंह राष्ट्रीय ढीला पेंच - अरुंधती राय राष्ट्रीय दहशत …रा वन का सीक्वल राष्ट्रीय गाली …आम आदमी राष्ट...
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काटजू जी बधाई के पात्र पत्रकारों और उनके हक के लिए प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्केंडय काटजू अपनी नई पहल के लिए बधाई के पात्र हैं। मैं उनको जहां इसके लिए बधाई देता हूं, वहीं उनसे यह भी उम्मीद करता हूं कि वह हमेशा पत्रकारों के हकों के लिए अपनी सजगता दिखाते रहेंगे। नई पहल में प्रेस की आजादी के अतिक्रमण की शिकायतों के मद्देनजर प्रेस परिषद के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि वह जमीनी हालात का जायजा लेने और तथ्यों की जानकारी के लिए उन जगहों पर टीमें भेजेंगे। उन्होंने कहा कि कुछ राज्यों में प्रेस की आजादी पर खतरा है, लिहाजा टीम उन जगहों पर भेजने का इरादा है, जहां से इस तरह की ज्यादा शिकायतें ज्यादा मिली हैं। प्रेस की आजादी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। काटजू ने प्रेस परिषद के सदस्यों से भी विचार मांगे हैं। उन्होंने सरकारी एजेंसी और संगठनों द्वारा पत्रकारों या मीडिया प्रतिष्ठानों पर हमले, सरकार की आलोचना करने वाले अखबारों के विज्ञापन रोकने जैसे अन्य हथकंडे अपनाए जाने का भी जिक्र किया है। जम्मू-कश्मीर, महाराष...
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गंगा में कीड़े मैं कुछ दिन उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में रहा। संगम स्नान के लिए गया, लेकिन वहां गंगा की दशा देख काफी दुखी हुआ। वहां का पानी काफी गंदा था और उसमें कीड़े रेंग रहे थे। मैंने इस दशा के बारे में लोगों से पूछा तो बताया कि इलाहाबाद महानगर की गंदगी भरे सभी नालों का पानी गंगा में डाला जा रहा है, जिससे गंगा की दशा बद बदतर होती जा रही है। लोग मान्यता के अनुसार संगम में स्नान के लिए आस्था लेकर आते जरूर हैं, लेकिन इस दशा को देखकर बिना स्नान किए ही लौट जाते हैं। पिछले दिनों स्वीट्जरलैंड के एक राजनेता के आने की बाबत भी कुछ लोग कह रहे थे कि वह खुद जहां संगम में हिम्मत करके स्नान किए वहीं उनकी पत्नी ने गंगा की दशा पर दुख जताते हुए स्नान करने से मना कर दिया। समय-समय पर सरकार की ओर से गंगा को लेकर तमाम अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन ऐसे में ये अभियान कभी सफल होंगे, इसकी उम्मीद करना ही बेकार है। मैं हरिद्वार में अक्सर जाता रहता हूं, वहां हर की पौड़ी पर स्नान करके जो असीम शांति मिलती है काश इलाहाबाद के संगम में वह अनुभव हो...